SCO Summit 2025 : एशियाई ताकतों की एकजुटता से अमेरिका पर दबाव
India News Live,Digital Desk : चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन 2025 इस बार आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम साबित हुआ है। इस बैठक में भारत, चीन और रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ बुलंद की। तीनों देशों की यह साझेदारी न सिर्फ अमेरिका को जवाब देने का संकेत देती है, बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन में बदलाव का संकेत भी है।
भारत-रूस-चीन की ताकत कितनी बड़ी?
भारत, रूस और चीन की संयुक्त आर्थिक ताकत का अंदाज़ा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि इनका कुल GDP 53.9 ट्रिलियन डॉलर है, जो विश्व की अर्थव्यवस्था का लगभग एक-तिहाई है। इनकी कुल जनसंख्या 3.1 बिलियन से अधिक है, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार 4.7 ट्रिलियन डॉलर का है। ये देश मिलकर वैश्विक रक्षा बजट का करीब 20 प्रतिशत यानी 549 बिलियन डॉलर खर्च करते हैं।
जहाँ चीन विनिर्माण क्षेत्र में सबसे मजबूत है, वहीं रूस ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाता है। भारत अपनी तेज़ी से बढ़ती सेवा और आईटी सेक्टर की ताकत के लिए जाना जाता है।
ट्रंप टैरिफ से व्यापार पर असर
ट्रंप सरकार की टैरिफ नीतियों ने वैश्विक व्यापार पर गहरा असर डाला है। खासतौर पर भारत पर लगाए गए 50% तक के टैरिफ ने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। भारत अब अमेरिका पर निर्भरता कम कर अपने पड़ोसी देशों के साथ नए व्यापारिक और निवेश के अवसर तलाश रहा है। इस क्रम में रूस और चीन ने भी भारत के लिए अपने बाज़ार और निवेश को और खुला करने का संकेत दिया है।
ऊर्जा, बुनियादी ढाँचे और भुगतान प्रणाली जैसे क्षेत्रों में ये तीनों देश एक-दूसरे के सहयोग से नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
अमेरिका पर सीधा दबाव
भारत, चीन और रूस का यह गठबंधन अमेरिकी टैरिफ नीतियों पर सीधा सवाल खड़ा करता है। हालांकि भारत के लिए अमेरिका अब भी एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है, जिसका अंदाज़ा 2024 में अमेरिका को हुए 77.5 अरब डॉलर के निर्यात से लगाया जा सकता है। इसके बावजूद, तीनों देशों की यह साझेदारी दुनिया को यह संदेश दे रही है कि एशियाई ताकतें मिलकर एक नए आर्थिक समीकरण की ओर बढ़ रही हैं।
हालांकि यह गठबंधन भारत के लिए चीन और पाकिस्तान से जुड़े सीमा विवादों और सुरक्षा चिंताओं को भी जटिल बना सकता है। लेकिन कुल मिलाकर, यह नई साझेदारी वैश्विक राजनीति और व्यापार पर बड़ा असर डालने की क्षमता रखती है।