Ruckus in Parliament खेल विधेयक, मणिपुर और वोटर लिस्ट SCAM पर गरमाई सियासत
India News Live,Digital Desk : देश की संसद इस समय एक गंभीर गतिरोध का सामना कर रही है। मानसून सत्र, जो 21 जुलाई को शुरू हुआ था, वह लगभग ठप पड़ा हुआ है। पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर हुई दो दिन की बहस को छोड़कर, बाकी समय विपक्षी दलों के हंगामे की भेंट चढ़ गया है। इस बार हंगामे का मुख्य कारण बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) है। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया मतदाताओं को, खासकर उनके समर्थकों को, सूची से हटाने और भाजपा के नेतृत्व वाले NDA की चुनावी संभावनाओं को बढ़ाने की एक साजिश है। सरकार, वहीं, चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप न करने की बात कह रही है, जबकि लोकसभा में खेल विधेयक और राज्यसभा में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों को पारित कराने पर अड़ी है।
लोकसभा में खेल विधेयक पर सरकार का जोर:
सरकार, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के नेतृत्व में, लोकसभा में राष्ट्रीय खेल संचालन विधेयक (National Sports Governance Bill) और राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक (National Anti-Doping Bill) जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इन विधेयकों का उद्देश्य खेल प्रशासन में अधिक पारदर्शिता लाना और डोपिंग को रोकना है। खेल मंत्री मनसुख मांडविया द्वारा पेश किए गए राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक, 2025 का लक्ष्य भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) सहित सभी खेल महासंघों के कामकाज में सुधार लाना और विवादों के निपटारे के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करना है। हालाँकि, विपक्षी दलों के लगातार हंगामे के कारण इन विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया बाधित हो रही है।
राज्यसभा में मणिपुर पर राष्ट्रपति शासन का प्रस्ताव:
गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को राज्यसभा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश करने वाले हैं। इसके तहत मणिपुर में 13 अगस्त से राष्ट्रपति शासन को अगले छह महीने के लिए बढ़ाया जाएगा। यह प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत मणिपुर की वर्तमान स्थिति को देखते हुए लाया जा रहा है। लोकसभा पहले ही इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है। इस प्रस्ताव के पारित होने से राज्य में केंद्रीय नियंत्रण और स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी, खासकर मौजूदा संवेदनशील माहौल को देखते हुए।
वोटर लिस्ट SIR: विपक्ष का 'वोट चोरी' का आरोप और सरकार का बचाव:
विपक्षी गठबंधन 'INDIA' वोटर सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट नजर आ रहा है। वे आरोप लगा रहे हैं कि चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया 'वोटबंदी' है, जिसका मकसद उनके समर्थकों को चुनावी सूची से बाहर करना है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर "वोट चोरी" का आरोप लगाया है और इसे "एटम बम" करार दिया है, जिसके सबूत वे जल्द ही पेश करने वाले हैं। उन्होंने यहाँ तक कहा कि अगर कुछ सीटों पर धांधली न हुई होती तो प्रधानमंत्री मोदी सत्ता में न होते।
वहीं, चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को "निराधार, अप्रमाणित और भ्रामक" बताते हुए खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर पर मतदाता सूचियों की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए है, ताकि केवल योग्य मतदाता ही वोट डाल सकें। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि राहुल गांधी के पत्रों का जवाब दिया गया है और वे आयोग के कर्मचारियों को धमकाने का प्रयास कर रहे हैं।
संसदीय गतिरोध का कारण और सरकार की रणनीति:
SIR के मुद्दे पर सरकार के रवैये के कारण विपक्ष का विरोध लगातार जारी है, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि किसी संवैधानिक संस्था के कामकाज पर चर्चा नहीं की जा सकती, जैसा कि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के एक फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा। उनका मानना है कि SIR चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है और यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है। यदि संसद में गतिरोध जारी रहता है, तो सरकार अपने महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए जोर दे सकती है, भले ही हंगामा बना रहे।
यह गतिरोध न केवल महत्वपूर्ण विधेयकों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर भी सवाल खड़े कर रहा है, जहाँ विपक्षी दल अपनी बात रखने के लिए एक मंच की तलाश कर रहे हैं और सरकार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती है।