'हमारे पास ज्यादा क्वालिटी नहीं': रविचंद्रन अश्विन ने उजागर की टीम इंडिया की सबसे बड़ी कमजोरी
भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने टीम इंडिया के मौजूदा गेंदबाजी आक्रमण और बेंच स्ट्रेंथ को लेकर एक बड़ा और बेबाक बयान दिया है। अक्सर भारतीय क्रिकेट की असीम प्रतिभा और बेंच स्ट्रेंथ की तारीफों के बीच अश्विन ने कड़वी हकीकत सामने रखते हुए टीम की सबसे बड़ी कमजोरी की ओर इशारा किया है। अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर भारतीय गेंदबाजी के हालिया प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण करते हुए अश्विन ने कहा कि जब बात तेज गेंदबाजी की आती है, तो भारत के पास शीर्ष दो-तीन गेंदबाजों के बाद गहराई में ज्यादा क्वालिटी और विकल्प मौजूद नहीं हैं। उन्होंने साफ शब्दों में चेताया कि वर्कलोड मैनेजमेंट और लंबे टेस्ट दौरों के लिहाज से यह स्थिति भारतीय टीम के लिए गंभीर चिंता का सबब बन सकती है।
'बुमराह और शमी के बाद हमारे पास क्वालिटी की कमी'—अश्विन
अश्विन ने भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के मौजूदा ढांचे का विश्लेषण करते हुए कहा कि एक या दो असाधारण गेंदबाजों की मौजूदगी पूरी टीम के तेज गेंदबाजी पूल की खामियों को हमेशा नहीं छिपा सकती। अश्विन ने कहा, "हम अक्सर यह मान लेते हैं कि हमारे पास असीमित तेज गेंदबाज तैयार बैठे हैं, लेकिन अगर आप गहराई से देखें, तो जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी जैसे गेंदबाजों के बाद हमारे पास उस स्तर की क्वालिटी और नियंत्रण बहुत कम है। टेस्ट क्रिकेट में केवल 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकना काफी नहीं होता, बल्कि 20-25 ओवर तक लगातार एक ही टप्पे पर बल्लेबाज की परीक्षा लेने की क्षमता होनी चाहिए, जो वर्तमान में हमारे बैकअप विकल्पों में साफ तौर पर मिसिंग दिखती है।"
निरंतरता और साझेदारी की कमी से पिघल जाता है दबाव
अश्विन ने रेखांकित किया कि टेस्ट मैचों में विपक्षी टीम को बैकफुट पर धकेलने के लिए दोनों छोर से दबाव का बना रहना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि बुमराह जब भी गेंद थामते हैं, वे अकेले दम पर विरोधी खेमे में खलबली मचा देते हैं। लेकिन जैसे ही पहला स्पेल खत्म होता है या जब बुमराह को आराम दिया जाता है, तो तीसरे और चौथे तेज गेंदबाज उस दबाव को आगे नहीं ले जा पाते। ढीली गेंदों और अत्यधिक बाउंड्री लीक होने के कारण बल्लेबाज सेट हो जाते हैं और साझेदारी पनप जाती है। मोहम्मद सिराज के फॉर्म में उतार-चढ़ाव और नए तेज गेंदबाजों द्वारा लगातार ओवरों में अनुशासन न रख पाना भारतीय आक्रमण को सपाट पिचों पर बेहद कमजोर बना देता है।
नए विकल्पों के पास अनुभव और रेड-बॉल टेम्परामेंट का अभाव
हाल के समय में आकाश दीप, प्रसिद्ध कृष्णा, नवदीप सैनी और मुकेश कुमार जैसे गेंदबाजों को टेस्ट सेटअप में आजमाया गया है। अश्विन का मानना है कि इन गेंदबाजों में प्रतिभा जरूर है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय टेस्ट स्तर पर लंबे स्पेल फेंकने और मैच जिताऊ प्रदर्शन करने के लिए जिस अनुभव, धैर्य और फिटनेस की जरूरत होती है, उसे हासिल करने में अभी समय लगेगा। सफेद गेंद (टी20/आईपीएल) की लय और लाल गेंद से पांच दिन तक गेंदबाजी करने के टेम्परामेंट में बहुत बड़ा अंतर होता है। घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पर्याप्त ओवर फेंके बिना सीधे अंतरराष्ट्रीय टेस्ट में उतरने से यह तकनीकी अंतर साफ उजागर हो जाता है।
भविष्य के कड़े दौरों और WTC के लिए वेक-अप कॉल
अश्विन ने टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं को आगाह किया कि जसप्रीत बुमराह के वर्कलोड को देखते हुए उन्हें हर मैच में नहीं खिलाया जा सकता। ऐसे में यदि शमी पूरी तरह फिट नहीं होते या नए गेंदबाज अपनी लाइन-लेंथ पर तेजी से काम नहीं करते, तो सेना (SENA - दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया) देशों के आगामी दौरों पर भारतीय टीम को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अश्विन की यह बेबाक टिप्पणी भारतीय क्रिकेट के घरेलू ढांचे और तेज गेंदबाजों के विकास कार्यक्रम (डेवलपमेंट प्रोग्राम) के लिए एक गंभीर आत्ममंथन का संदेश मानी जा रही है।