साल में 90 दिन नंगे पैर और जमीन पर सोते हैं राम चरण, सुपरस्टार ने बताया क्यों करते हैं 'अयप्पा दीक्षा'
India News Live,Digital Desk : साउथ सिनेमा से लेकर बॉलीवुड और ग्लोबल स्तर पर अपनी दमदार एक्टिंग का लोहा मनवाने वाले 'RRR' स्टार राम चरण (Ram Charan) इन दिनों अपनी अपकमिंग मेगा-बजट फिल्म 'पेद्दी' (Peddi) के प्रमोशन में काफी व्यस्त हैं। 4 जून को रिलीज होने जा रही इस फिल्म के प्रमोशनल इवेंट्स के दौरान राम चरण ने अपनी उस आध्यात्मिक यात्रा के बारे में खुलकर बात की, जो अक्सर सोशल मीडिया और खबरों में सुर्खियां बटोरती है। हम बात कर रहे हैं उनकी 'अयप्पा दीक्षा' (Ayyappa Deeksha) की।
राम चरण को कई बार बड़ी-बड़ी फिल्मों की सक्सेस पार्टियों या एयरपोर्ट्स पर काले कपड़ों में, गले में तुलसी की माला पहने और नंगे पैर घूमते हुए देखा गया है। फैंस अक्सर जानना चाहते हैं कि एक ग्लोबल सुपरस्टार होने के बावजूद वे इतनी कठिन साधना क्यों करते हैं। अपनी को-स्टार जाह्नवी कपूर के साथ दिए एक इंटरव्यू में राम चरण ने इस 45 दिनों की कठिन साधना के पीछे की असली वजह, इसके वैज्ञानिक महत्व और शरीर पर पड़ने वाले इसके जादुई फायदों के बारे में विस्तार से समझाया है।
क्या होती है अयप्पा दीक्षा? जानिए इसकी कठिन विधि
राम चरण ने बताया कि वे साल में एक बार नहीं, बल्कि दो बार यानी कुल 90 दिनों के लिए 'अयप्पा दीक्षा' के कड़े नियमों का पालन करते हैं। इस 45 दिनों की साधना अवधि के दौरान राम चरण किसी आम इंसान या वीआईपी की तरह नहीं, बल्कि एक बेहद साधारण साधु की तरह जीवन जीते हैं। इस दौरान वे:
पूरी अवधि में चप्पल या जूते नहीं पहनते, पूरी तरह नंगे पैर (Barefoot) रहते हैं।
केवल काले या नीले रंग के साधारण वस्त्र धारण करते हैं और गले में अयप्पा माला पहनते हैं।
बिस्तर या गद्दे का त्याग करके जमीन पर चटाई बिछाकर सोते हैं।
शराब, मांस या तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बनाकर केवल शुद्ध सात्विक आहार ग्रहण करते हैं।
'यह सिर्फ धर्म का मसला नहीं, बल्कि जीने का तरीका है'
इंटरव्यू के दौरान जब राम चरण से पूछा गया कि ऑस्कर विनिंग फिल्म 'RRR' की अपार सफलता के बाद क्या उन पर करियर को लेकर कोई मानसिक दबाव (Pressure) रहता है? इस पर उन्होंने बेहद समझदारी भरा जवाब दिया। राम चरण ने कहा, "जो जादू आप एक बार स्क्रीन पर बिखेर चुके हैं, उसे दोबारा हूबहू क्रिएट करना बहुत मुश्किल होता है। हर फिल्म की परिस्थितियां अलग होती हैं। परिणाम हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हम काम के प्रॉसेस को एन्जॉय कर सकते हैं। और इसी मानसिक संतुलन को बनाए रखने में 'अयप्पा दीक्षा' मेरी मदद करती है।"
राम चरण ने आगे कहा, "यह साधना मेरे लिए सिर्फ एक धार्मिक कर्मकांड या धर्म का मसला नहीं है, बल्कि यह मेरे जीने का एक तरीका (Way of Life) है। यह मेरी 'ग्राउंडिंग' है। पूरे साल की चकाचौंध और व्यस्तता के बीच, शायद यही एक सबसे समझदारी वाली चीज है जो मैं अपने लिए करता हूँ। यह मुझे अंदर से इतनी मानसिक और शारीरिक ताकत देता है कि इसके खत्म होने के बाद भी अगले 6 से 7 महीनों तक मैं पूरी ऊर्जा से काम कर पाता हूँ।"
45 दिनों के नियम के पीछे का वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण
राम चरण ने इस साधना के वैज्ञानिक और शारीरिक पहलुओं पर रोशनी डालते हुए बताया कि हमारे पुराणों और प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में हर नियम के पीछे एक ठोस वजह छिपी हुई है।
उन्होंने बताया, "यह पूरी प्रक्रिया हमारे तन और मन की 'क्लींजिंग' (Deterioration) यानी आंतरिक सफाई करती है। चिकित्सा विज्ञान भी मानता है कि मानव शरीर की कोशिकाओं (Cells) और हमारी आदतों में किसी भी बड़े बदलाव को पूरी तरह अपनाने में कम से कम 45 दिन का समय लगता है। जैसे हम वजन घटाने के लिए 3 महीने या 45 दिन से ज्यादा डाइटिंग करते हैं, ठीक वैसे ही यह 45 दिन का अनुशासन हमारे शरीर की हर एक सेल को पूरी तरह रीसेट और रिचार्ज कर देता है। इससे हमारी ब्रीदिंग (सांस लेने की प्रक्रिया) बेहतर होती है, विचारों में क्लैरिटी आती है और भटकता हुआ मन पूरी तरह शांत हो जाता है।"
जाह्नवी कपूर ने खोला राज: 'कैमरा बंद होते ही मासूम और ऑन-कैमरा टाइगर हैं राम चरण'
इंटरव्यू के दौरान मौजूद फिल्म 'पेद्दी' की लीड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर ने भी राम चरण की इस साधना को लेकर अपनी राय रखी। जाह्नवी ने एक दिलचस्प राज खोलते हुए बताया, "फिल्म 'पेद्दी' की शूटिंग के दौरान ही राम चरण सर ने दो बार अपनी इस अयप्पा दीक्षा को पूरा किया है। वह इस दौरान कड़ा उपवास (Fastings) रखते थे और बेहद कम खाते थे, लेकिन इसके बावजूद जैसे ही डायरेक्टर 'एक्शन' बोलता था, कैमरे के सामने उनकी एनर्जी बिल्कुल एक खूंखार और फुर्तीले टाइगर (Tiger) जैसी हो जाती थी।"
जाह्नवी ने आगे कहा कि राम चरण जितने बड़े स्टार हैं, असल जिंदगी में वे उतने ही जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं। कैमरा बंद होते ही वे एक बेहद शर्मीले, शांत, मासूम और गहरी सोच रखने वाले व्यक्ति बन जाते हैं, जो तामझाम से दूर एकांत और शांति पसंद करते हैं। राम चरण का यह आध्यात्मिक अनुशासन आज की युवा पीढ़ी और उनके करोड़ों फैंस के लिए एक बहुत बड़ी सीख है।