स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी ने नहीं किए साइन, कांग्रेस के 118 सांसदों का समर्थन
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, संसदीय लोकतंत्र की परंपराओं के तहत किसी विपक्षी नेता द्वारा स्पीकर को हटाने की मांग का समर्थन करना उचित नहीं माना जाता, इसी कारण राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव से दूरी बनाए रखी।
इस बीच, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मंगलवार को लोकसभा सचिवालय को अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस की जांच करने और नियमों के अनुसार आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव
कांग्रेस ने लोकसभा के नियम 94C के तहत स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि यह नोटिस दोपहर 1:14 बजे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सौंपा गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि पार्टी ने जो निर्णय लिया है, वे एक सदस्य के रूप में उसका समर्थन करते हैं और फिलहाल वे बजट भाषण की तैयारी में जुटे हैं।
विपक्ष के आरोप
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए नोटिस में स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने के आरोप लगाए गए हैं। विपक्ष का दावा है कि उनके नेताओं को सदन में बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
नोटिस में चार प्रमुख घटनाओं का उल्लेख किया गया है, जिनमें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने का मामला भी शामिल है। राहुल गांधी ने उस दौरान 2020 के चीन स्टैंडऑफ को लेकर पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित यादों का हवाला दिया था।
इसके अलावा, आठ सांसदों के निलंबन, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियां और स्पीकर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में उपस्थित होने का आग्रह करने वाले बयान को भी मुद्दा बनाया गया है।
टीएमसी की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी ने कांग्रेस से अपील की थी कि अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले स्पीकर से बातचीत की जाए। टीएमसी ने स्पष्ट किया है कि यदि दो-तीन दिनों के भीतर स्पीकर विपक्ष की मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं, तो उनकी पार्टी भी इस नोटिस पर हस्ताक्षर करेगी।