यूपी में अब सड़कों की बढ़िया क़िस्मत पीडब्ल्यूडी ने उठाया बड़ा कदम, जानें क्यों नहीं टूटेंगी अब सड़कें
India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है, जिससे अब प्रदेश के प्रमुख और अन्य जिला मार्ग मजबूत और टिकाऊ बनेंगे। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने अपनी पुरानी 'गलती' को सुधारते हुए एक अहम आदेश जारी किया है। दरअसल, बीते कुछ सालों से राज्य में प्रमुख जिला मार्गों और अन्य जिला मार्गों के नवीनीकरण (मरम्मत) में इंडियन रोड कांग्रेस (IRC) और सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा निर्धारित मानकों से कम मोटाई की बिटुमिनस कंक्रीट (BC) की लेयर डाली जा रही थी। अब इस कमी को दूर करते हुए, विभाग ने निर्देश दिए हैं कि सड़कों के निर्माण और नवीनीकरण में अब 25 मिलीमीटर की जगह न्यूनतम 30 मिलीमीटर मोटी बिटुमिनस व कंक्रीट (बीसी) की लेयर डाली जाएगी। यह बदलाव सड़कों को बार-बार टूटने और ऊपरी परत (लेयर) उखड़ने की समस्या से मुक्ति दिलाएगा, जिससे प्रदेश में बेहतर सड़क नेटवर्क स्थापित होगा।
क्या थी दिक्कत? इंजीनियर क्यों चाहते थे ये बदलाव?
सड़कों के निर्माण और नवीनीकरण में सबसे ऊपर डाली जाने वाली बिटुमिनस व कंक्रीट की परत ही सड़क की वास्तविक मजबूती और उसकी उम्र तय करती है। विभागीय इंजीनियर लंबे समय से मोर्थ और आइआरसी के मानकों के मुताबिक गुणवत्तापूर्ण सड़कों के निर्माण का प्रयास कर रहे थे, लेकिन शायद लागत बचाने या अन्य कारणों से इस महत्वपूर्ण परत की मोटाई में कमी की जा रही थी। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के अध्यक्ष एनडी द्विवेदी ने इस गंभीर समस्या को सबसे पहले उठाया था। उन्होंने जनवरी में विभागाध्यक्ष और शासन को पत्र लिखकर इस ओर ध्यान आकर्षित किया था कि घटिया निर्माण के कारण सड़कों की उम्र कम हो रही है।
उनके पत्र का ही नतीजा था कि उच्च स्तरीय समिति की बैठक कराई गई, जिसमें इस विषय पर गहन विचार-विमर्श हुआ। समिति ने अंततः बिटुमिनस व कंक्रीट लेयर की मोटाई 25 से बढ़ाकर 30 मिलीमीटर करने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी। यह मंजूरी इस बात का प्रमाण है कि अधिकारियों ने भी समस्या की गंभीरता को समझा और समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया।
'दबा दी गई थी फाइल'! किसने फिर उठाया मुद्दा?
समिति से अनुमोदन मिलने के बाद भी, सूत्रों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण फाइल को 'दबा' दिया गया था। यानी, मंजूरी मिलने के बावजूद इस पर तुरंत अमल नहीं हो पाया था, जिससे आशंका थी कि सड़कों की गुणवत्ता फिर से प्रभावित होगी। लेकिन डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ चुप नहीं बैठा। उन्होंने कुछ दिनों पहले फिर से इस मुद्दे पर विभागाध्यक्ष से लेकर शासन स्तर तक को पत्र लिखे, जिससे एक बार फिर यह मुद्दा गरमा गया। उनके अथक प्रयासों और लगातार दबाव का ही यह नतीजा है कि विभागाध्यक्ष एके द्विवेदी ने अब आधिकारिक रूप से बिटुमिनस व कंक्रीट लेयर की मोटाई 30 मिलीमीटर किए जाने का आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश प्रदेश भर में सड़क निर्माण से जुड़े सभी ठेकेदारों और अधिकारियों के लिए अनिवार्य रूप से लागू होगा।
बढ़ेगी सड़क की लागत, पर मिलेगी लंबी उम्र: आम आदमी को क्या फायदा?
इस नए आदेश के लागू होने से निश्चित रूप से प्रदेश के प्रमुख जिला मार्ग और अन्य जिला मार्गों की ऊपरी परत की मजबूती कई गुना बढ़ जाएगी। भारतीय रोड कांग्रेस (आइआरसी) और सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) के प्रावधानों के अनुसार, बिटुमिनस व कंक्रीट लेयर को 'ग्रेड-दो' में 30 से 40 मिलीमीटर तक की मोटाई में डाला जा सकता है। यह दिखाता है कि 30 मिलीमीटर की मोटाई भी उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
हालांकि, यह भी सच है कि लेयर की मोटाई 25 से बढ़ाकर 30 मिलीमीटर किए जाने से सड़क निर्माण और नवीनीकरण की लागत में थोड़ी बढ़ोतरी जरूर होगी। लेकिन यह छोटी सी अतिरिक्त लागत लंबी अवधि में बहुत बड़ा फायदा देगी। नए और अधिक कठोर मानक का पूरी तरह पालन करने से ये सड़कें कम टूटेंगी, उनके बार-बार नवीनीकरण की जरूरत नहीं पड़ेगी, और उनका जीवनकाल बढ़ जाएगा। इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा, क्योंकि उन्हें अच्छी और गड्ढा-मुक्त सड़कें मिलेंगी, जिससे यात्रा सुरक्षित और सुविधाजनक बनेगी। इससे न केवल परिवहन की लागत कम होगी, बल्कि वाहनों के रखरखाव पर होने वाला खर्च भी घटेगा, और सबसे महत्वपूर्ण, दुर्घटनाओं की संख्या में भी कमी आएगी। यह उत्तर प्रदेश को एक मजबूत और कुशल बुनियादी ढांचे वाला राज्य बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।