ईरान में विरोध तेज़, क्या खामेनेई की सत्ता पर कूप संभव है? सही‑गलत संकेतों का विश्लेषण
India News Live,Digital Desk : ईरान में सरकार‑विरोधी प्रदर्शन कुछ दिनों से लगातार बढ़ रहे हैं और यह देशव्यापी आंदोलन बनता जा रहा है। इन प्रदर्शनकारियों का संघर्ष आर्थिक कठिनाइयों, मुद्रा गिरावट और राजनीतिक असंतोष के खिलाफ है, और इसका केंद्र बिंदु सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ नाराज़गी है।
हालांकि मौजूदा हालात को कूप (सैन्य तख्तापलट) के रूप में तुरंत देखा नहीं जा सकता, पर राजनीति‑विवेक और विशेषज्ञ समीक्षा कुछ प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित कर रही है:
1. व्यापक, बिना नेतृत्व वाले आंदोलन (Leaderless Movement)
वर्तमान विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से एक केंद्रीकृत विपक्षी नेतृत्व के बिना फैल रहे हैं। प्रदर्शन का नेतृत्व स्थानीय समूहों, आर्थिक मुद्दों और युवा वर्ग की नाराज़गी जैसे कारणों से जुड़ा है, न कि किसी ठोस संगठन या राजनीतिक दल के नेतृत्व से सीधे।
2. विपक्षी समूहों की विविधता
ईरान के विरोध में कई विरोधी समूह संगठित हैं, जिनमें निर्वासित राजवंश समर्थक रेका पहलवी, कुछ कुर्द और बलूच समूह, तथा राजनैतिक विरोधी संगठन शामिल हैं। लेकिन इनमें से किसी भी समूह ने व्यापक सैन्य समर्थन या पूरी तरह से सेना‑संबंधित तख्तापलट की रणनीति घोषित नहीं की है।
3. सुरक्षा बलों की भूमिका और IRGC
ईरान में मुख्य सुरक्षा शक्ति इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) है — जिसे राज्य की रक्षा और विद्रोह को दबाने के लिए संवैधानिक रूप से जिम्मेदार माना जाता है। IRGC की संरचना सैनिक और मिलिशिया दोनों पर आधारित है और इसे अक्सर कूप को रोकने वाला बल कहा जाता है, न कि उसके पक्ष में होने वाला।
4. बाहरी दबाव की भूमिका
अमेरिका और इज़राइल जैसे देशों के बयान और समर्थन का जिक्र हो रहा है — जिसमें अमेरिका ने ईरानी नेताओं को चेतावनी दी है कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिंसा से दबाया गया तो वे प्रतिक्रिया देंगे। इज़राइल के नेतृत्व ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है, जिससे विवाद और तनाव बढ़ा है।
5. क्या तख्तापलट संभव है?
अभी तक ठोस संकेत नहीं है कि ईरान में एक सशस्त्र सैन्य कूप (coup d’état) तत्काल संभव है। मौजूदा प्रवाह अधिकतर जनता‑आंदोलन, आर्थिक असंतोष और राजनीतिक प्रदर्शन का रूप ले रहा है, न कि सैन्य या भीतर से सेना‑संबंधी कूप की तैयारी का। इससे पहले भी ईरान की राजनीतिक प्रणाली ने अस्थिरताओं का सामना किया है — पर तख्तापलट का प्रयास हमेशा सफल नहीं रहा है और आम तौर पर IRGC जैसे संरक्षित संस्थानों के कारण रोका गया है।
संक्षेप में
ईरान में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी हैं और वे लंबे समय से सबसे बड़े हैं।
आंदोलन आर्थिक संकट और राजनीतिक असंतोष से प्रेरित है।
विपक्षी ताकतें विविध हैं, लेकिन संगठित सैन्य कूप अभी स्पष्ट नहीं दिखता।
IRGC जैसे सुरक्षा बल आमतौर पर मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने में सक्षम हैं।
बाहरी देशों के बयान तनाव बढ़ा रहे हैं, पर सीधे तख्तापलट के संकेत नहीं दे रहे।
अतः अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि ईरान में तत्काल तख्तापलट अवश्य होगा, लेकिन सोच यह है कि विद्रोह और असंतोष कई साल तक जारी रह सकता है, और लंबी अवधि में राजनीतिक बदलाव की संभावनाएँ बन रही हैं।