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November 06 2026 01:16 pm

भारत में 6G नेटवर्क की तैयारी तेज: अमेरिका समेत 25 देशों के वैश्विक गठबंधन में शामिल हुआ देश

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देश में 5G नेटवर्क के तेजी से विस्तार के बाद अब अगली पीढ़ी की अल्ट्रा-फास्ट और सुरक्षित वायरलेस कनेक्टिविटी '6G' को लेकर भारत ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ा कदम उठाया है। भारत अब संयुक्त राज्य अमेरिका (US) की अगुवाई वाली अगली पीढ़ी के 6G नेटवर्क विकास और साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक अहम अंतरराष्ट्रीय पहल में औपचारिक रूप से शामिल हो गया है।

अमेरिकी वाणिज्य विभाग (US Department of Commerce) ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि भारत के शामिल होने के बाद अब इस वैश्विक गठबंधन में कुल 26 देशों की सरकारें एक साथ आ गई हैं। इसका उद्देश्य केवल इंटरनेट की स्पीड बढ़ाना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सुरक्षित, भरोसेमंद, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी 6G दूरसंचार बुनियादी ढांचा (Telecom Infrastructure) तैयार करना है।

G20 बैठक में हुआ ऐतिहासिक करार: जितिन प्रसाद और अमेरिकी सचिव की अहम वार्ता

इस अहम वैश्विक साझेदारी पर अंतिम मुहर अमेरिका में आयोजित G20 इनोवेशन मिनिस्टीरियल बैठक के दौरान लगी। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक (Howard Lutnick) के बीच हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक में 6G के भविष्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर गहन चर्चा हुई।

अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने सोशल मीडिया पर इस घोषणा की पुष्टि करते हुए कहा कि भारत, अमेरिका और अन्य सहयोगी देश मिलकर यह तय करेंगे कि 6G नेटवर्क साझा राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखकर विकसित हो। बैठक में भारत ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM 2.0) में अमेरिकी कंपनियों की ओर से बड़े निवेश और दोनों देशों के बीच सुरक्षित एआई डेटा सेंटर्स की स्थापना का भी खाका पेश किया।

दुनिया के कौन-से 25 देश हैं इस पहल का हिस्सा?

अमेरिका के नेतृत्व वाली इस 6G सुरक्षा और मानक पहल में दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाएं और तकनीकी दिग्गज देश शामिल हैं। भारत के अलावा इस समूह में शामिल प्रमुख देश हैं:

अमेरिका और यूरोप: संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन (UK), फ्रांस, जर्मनी, इटली, फिनलैंड, स्वीडन, चेक गणराज्य, डेनमार्क और नॉर्वे।

एशिया-प्रशांत: जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित कुल 25 देश।

साझा एजेंडा: ये सभी देश आने वाले 12 महीनों के भीतर 6G के वैश्विक सुरक्षा मानक, स्पेक्ट्रम नीतियां, ओपन-रैन (Open-RAN) इंटरऑपरेबिलिटी और नेटवर्क संचालन में सुरक्षित AI के इस्तेमाल पर एक समान नीतिगत रूपरेखा तैयार करेंगे।

भारत के लिए इसके क्या हैं मायने? 'भारत 6G मिशन' को मिलेगा बूस्ट

वैश्विक मंच पर इस समूह का हिस्सा बनने से भारत को कई रणनीतिक और तकनीकी फायदे मिलेंगे:

ग्लोबल स्टैंडर्ड तय करने में भागीदारी: 2G, 3G और 4G के दौर में भारत केवल विदेशी तकनीक को अपनाने वाला उपभोक्ता देश था। लेकिन इस गठबंधन में शामिल होने से भारत को अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) और 3GPP के वैश्विक मानकों और प्रोटोकॉल्स को तय करने वाली टेबल पर सीधी आवाज मिलेगी।

2030 तक 6G लॉन्च का लक्ष्य: भारत पहले से ही घरेलू स्तर पर 'भारत 6G मिशन' और 'भारत 6G अलायंस' पर काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश में स्वदेशी 6G रोलआउट करने और 6G तकनीक से जुड़े पेटेंट व किफायती हार्डवेयर उत्पादों का दुनिया में बड़ा निर्यातक बनने का है।

5G से 100 गुना अधिक स्पीड और AI इंटीग्रेशन: 6G नेटवर्क में सब-टेराहर्ट्ज (Sub-THz) फ्रिक्वेंसी का इस्तेमाल होने की उम्मीद है, जिससे 1 टेराबिट प्रति सेकंड (Tbps) तक की डाउनलोड स्पीड, जीरो-लेटेंसी और होलोग्राफिक कम्युनिकेशन की सुविधा मिलेगी।

वैश्विक स्तर पर 26 देशों के इस संयुक्त प्रयास से साफ हो गया है कि भविष्य की दूरसंचार क्रांति में साइबर सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित तकनीक ही दुनिया का नया तकनीकी ढांचा तय करेगी।