कंगाल पाकिस्तान की फटी जेब! 25 करोड़ में से 7 करोड़ लोग दाने-दाने को मोहताज, 11 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची गरीबी
India News Live,Digital Desk : आर्थिक बदहाली और कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान की पोल एक बार फिर खुल गई है। पाकिस्तान के योजना मंत्री एहसान इकबाल चौधरी द्वारा जारी ताजा सरकारी सर्वे (2024-25) के आंकड़ों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में गरीबी दर अब 29 प्रतिशत के पार पहुंच गई है, जो पिछले 11 सालों का सबसे उच्चतम स्तर है। हालत यह है कि देश की करीब 7 करोड़ आबादी अब अत्यधिक गरीबी की श्रेणी में आ गई है।
क्या है पाकिस्तान में 'अत्यधिक गरीबी' का पैमाना?
रिपोर्ट में गरीबी की जो परिभाषा दी गई है, वह रोंगटे खड़े करने वाली है। पाकिस्तान में 'अत्यधिक गरीब' उस व्यक्ति को माना गया है जिसकी मासिक आय 8484 रुपये से भी कम है। यानी रोजाना करीब 280 रुपये से कम कमाने वाला व्यक्ति अपनी बुनियादी जरूरतों (रोटी, कपड़ा और मकान) को पूरा करने में असमर्थ है। साल 2019 में जो गरीबी दर 21.9% थी, वह अब बढ़कर 28.9% हो गई है।
गांवों की हालत सबसे खराब, शहरों में भी मची त्राहि-त्राहि
महंगाई और आर्थिक मंदी का सबसे क्रूर प्रहार ग्रामीण इलाकों पर हुआ है। सर्वे के प्रमुख आंकड़े कुछ इस प्रकार हैं:
ग्रामीण क्षेत्र: गरीबी 28.2% से उछलकर 36.2% हो गई है।
शहरी क्षेत्र: शहरों में भी स्थिति बिगड़ी है, जहां गरीबी 11% से बढ़कर 17.4% तक पहुंच गई है।
बेरोजगारी: देश में बेरोजगारी की दर 7.1% हो गई है, जो पिछले 21 सालों में सबसे अधिक है।
बलूचिस्तान बना सबसे गरीब प्रांत, पंजाब-सिंध भी बेहाल
पाकिस्तान के सभी प्रांतों में गरीबी की लहर देखी गई है, लेकिन बलूचिस्तान की स्थिति सबसे दयनीय है:
बलूचिस्तान: यहां 47% आबादी गरीब है (पहले 42% थी)।
खैबर पख्तूनख्वा: गरीबी 28.7% से बढ़कर 35.3% हो गई है।
सिंध: यहां का आंकड़ा 24.5% से बढ़कर 32.6% पहुंच गया है।
पंजाब: तुलनात्मक रूप से बेहतर होने के बावजूद यहां गरीबी 16.5% से बढ़कर 23.3% हो गई है।
IMF की शर्तें और महंगाई ने तोड़ी जनता की कमर
योजना मंत्री एहसान इकबाल ने स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सख्त शर्तों, जैसे बिजली-गैस पर सब्सिडी में कटौती और मुद्रा (Rupee) की कीमत गिरने से आम आदमी की जेब खाली हो गई है। पिछले 7 सालों में पाकिस्तानियों की वास्तविक मासिक घरेलू आय 12% घट गई है, जो अब औसतन 31,127 रुपये रह गई है। मंत्री ने साफ कहा कि केवल नकद सहायता (बेनेजीर इनकम सपोर्ट) से गरीबी दूर नहीं होगी, इसके लिए स्थाई विकास जरूरी है, लेकिन फिलहाल IMF के चंगुल से निकलना नामुमकिन लग रहा है।