धनखड़ के इस्तीफे पर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया, राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज़
India News Live,Digital Desk : भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार (21 जुलाई 2025) को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत में अचानक इस्तीफा देने के बाद मंगलवार (22 जुलाई 2025) को उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ गई है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जगदीप धनखड़ के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की और कहा कि उन्हें भारत के उपराष्ट्रपति समेत कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है। संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, इस पद के रिक्त होते ही जल्द से जल्द चुनाव कराने होते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जगदीप धनखड़ के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए एक पोस्ट शेयर की। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "श्री जगदीप धनखड़ जी को भारत के उपराष्ट्रपति सहित कई महत्वपूर्ण भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूँ।"
उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव अनिवार्य है।
जगदीप धनखड़ का इस्तीफा स्वीकार होने के साथ ही भारत के उपराष्ट्रपति का पद अब रिक्त हो गया है। भारतीय संविधान के अनुसार, यदि उपराष्ट्रपति का पद मृत्यु, त्यागपत्र या पद से हटाए जाने के कारण रिक्त होता है, तो उस पद को भरने के लिए जल्द से जल्द चुनाव कराना अनिवार्य है। इसलिए, उम्मीद है कि चुनाव आयोग जल्द ही नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगा।
नड्डा और धनखड़ के बीच कथित विवाद
उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और जगदीप धनखड़ के बीच कथित विवाद की चर्चाएँ भी ज़ोर पकड़ रही हैं। सोमवार को सदन की कार्यवाही के दौरान शाम करीब साढ़े चार बजे कार्य मंत्रणा समिति की दूसरी बैठक होनी थी। दावा किया गया है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू इस बैठक से अनुपस्थित थे, जिससे धनखड़ नाराज़ थे।
इसके अलावा, सदन में नड्डा द्वारा दिए गए एक बयान, "मेरी बातें रिकॉर्ड की जाएँगी" पर भी विवाद खड़ा हो गया था। कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाया था। हालाँकि, अब जेपी नड्डा ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि उनका यह वाक्य कुर्सी (उपराष्ट्रपति पद) के लिए नहीं, बल्कि किसी अन्य संदर्भ में था।
उपराष्ट्रपति के रूप में जगदीप धनखड़ का कार्यकाल कई वजहों से काफ़ी चर्चा में रहा। अपने बयानों और विपक्ष पर हमलों के कारण वे अक्सर विवादों में रहे। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों और अन्य मुद्दों पर भी अपनी राय बेबाकी से रखी, जो अक्सर राजनीतिक बहस का विषय बन जाते थे।