Pitru Paksha 2025 : पूर्वजों को प्रसन्न करने के नियम और बचने योग्य गलतियां
India News Live,Digital Desk : हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वह समय है जब हम अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धा, प्रेम और कृतज्ञता के साथ याद करते हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितरों की आत्माएं धरती पर आती हैं और अपने वंशजों द्वारा किए गए श्राद्ध, तर्पण और दान से प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं।
यह समय जितना शुभ होता है, उतना ही संवेदनशील भी माना जाता है। यदि इस दौरान कुछ गलतियां हो जाएं, तो पूर्वज नाराज़ हो सकते हैं, जिससे जीवन में पितृ दोष, अशांति और बाधाएं आ सकती हैं।
इस साल पितृ पक्ष 18 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर को समाप्त होगा। आइए जानते हैं किन बातों का पालन करना चाहिए और किन चीज़ों से बचना जरूरी है—
महिलाओं का श्रृंगार
कुछ मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में महिलाओं को श्रृंगार से बचना चाहिए, लेकिन सेलिब्रिटी ज्योतिषी प्रद्युम्न सूरी का कहना है कि ऐसा कोई कठोर नियम नहीं है। महिलाएं अपनी इच्छा के अनुसार श्रृंगार कर सकती हैं।
घर में शांति बनाए रखें
पितृ पक्ष में घर का माहौल शांत और पवित्र होना चाहिए। झगड़ा, कलह और नकारात्मक माहौल अशुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि जहां विवाद होता है, वहां पितर प्रसन्न नहीं रहते और आशीर्वाद देने से भी दूर हो सकते हैं।
स्त्रियों का सम्मान करें
पितृ पक्ष के दौरान घर की किसी भी महिला—चाहे वह पत्नी हो, बहन हो या मां—का अपमान न करें। शास्त्रों में कहा गया है कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवता और पितर दोनों वास करते हैं।
मंत्र जाप और ध्यान
इस अवधि में धार्मिक और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व है। प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें और पूरे परिवार के साथ मिलकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें। यह वातावरण को पवित्र बनाता है और पितरों को प्रसन्न करता है।
पितृ पक्ष हमारे पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने और उनके आशीर्वाद को आमंत्रित करने का समय है। इस दौरान सकारात्मक कर्म, श्रद्धा और सम्मान से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।