Pakistan's Blunt Warning to Israel: 'हमें कतर न समझें, अंजाम भुगतने को तैयार रहें', क्या छिड़ेगा महायुद्ध
India News Live,Digital Desk : मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव के बीच अब पाकिस्तान की एंट्री ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। तेहरान स्थित पाकिस्तानी दूतावास के करीब हुए हवाई हमलों के बाद पाकिस्तान का गुस्सा फूट पड़ा है। पाकिस्तानी हुकूमत से जुड़े एक आधिकारिक मंच ने इजराइल को सीधी और कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि पाकिस्तान को 'कतर' समझने की भूल न की जाए। पाकिस्तान ने साफ किया है कि यदि उसके राजनयिकों या अधिकारियों को रत्ती भर भी नुकसान पहुँचा, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर और विनाशकारी होंगे।
तेहरान में धमाके और पाकिस्तान की तल्ख चेतावनी
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान में पाकिस्तानी दूतावास के बेहद करीब हवाई हमले किए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि दूतावास के कर्मचारी सुरक्षित हैं, लेकिन आसपास की इमारतों को भारी नुकसान पहुँचा है। इस घटना के तुरंत बाद पाकिस्तान ने अपना रुख आक्रामक कर लिया है। पाकिस्तान का यह बयान ऐसे समय आया है जब इजरायली सेना (IDF) ने तेहरान के मध्य में कई ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है, वहीं ईरान ने भी 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' के तहत इजराइल के हाइफ़ा में ड्रोन हमलों से पलटवार किया है।
मध्यस्थ की भूमिका या युद्ध की आहट?
एक तरफ जहाँ पाकिस्तान युद्ध की चेतावनी दे रहा है, वहीं दूसरी ओर वह खुद को एक शांतिदूत के रूप में भी पेश कर रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने दावा किया है कि पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के साथ मिलकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का जरिया बना हुआ है। खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है, जिस पर इस्लामाबाद में चर्चा होने की संभावना है। यहाँ तक कि डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के अनुरोध पर ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को 6 अप्रैल तक टालने का संकेत दिया है।
क्या पाकिस्तान वाकई युद्ध में कूदेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान फिलहाल 'दोहरी चाल' चल रहा है। वह एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनकर अपनी अंतरराष्ट्रीय साख बचाना चाहता है, तो दूसरी तरफ इजराइल को धमकी देकर मुस्लिम देशों के बीच अपनी धाक जमाना चाहता है। 'कतर नहीं हैं' वाला बयान सीधे तौर पर पाकिस्तान की परमाणु शक्ति और सैन्य क्षमता की ओर इशारा करता है। हालांकि, आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए सीधे तौर पर युद्ध में कूदना आत्मघाती कदम हो सकता है, लेकिन तेहरान में बढ़ते हमलों ने दक्षिण एशिया से लेकर मध्य पूर्व तक खतरे की घंटी बजा दी है।