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September 24 2026 02:07 am

सरकार के एक बड़े फैसले से ऑप्टिमस इन्फ्राकॉम में लगा 20% का अपर सर्किट: ₹708 के पार निकला शेयर

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भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 22 सितंबर 2026 के कारोबारी सत्र के दौरान केंद्र सरकार के एक नीतिगत फैसले ने टेक-मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के एक प्रमुख स्मॉलकैप शेयर में अभूतपूर्व तेजी ला दी। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा मोबाइल एक्सेसरीज मानकों को लेकर जारी किए गए एक क्रांतिकारी आदेश के बाद निफ्टी माइक्रोकैप 250 इंडेक्स में शामिल ऑप्टिमस इन्फ्राकॉम लिमिटेड (Optiemus Infracom Ltd) के शेयरों पर निवेशक टूट पड़े। मंगलवार की सुबह सपाट स्तरों पर शुरुआत करने के बाद जैसे ही इस सरकारी अधिसूचना की बारीकियां बाजार तक पहुंचीं, स्टॉक में भारी खरीददारी देखने को मिली और यह देखते ही देखते 20 प्रतिशत की अधिकतम ऊपरी सीमा को छूकर अपर सर्किट में लॉक हो गया। दिन के कारोबार के दौरान स्टॉक का अपर प्राइस बैंड ₹708.40 था, जिसे शेयर ने भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम के साथ हिट कर दिया और पूरे सत्र में अपने ऊपरी स्तरों पर ही मजबूती से टिका रहा।

इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय का बड़ा आदेश: 1 अप्रैल 2027 से मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर पर बीआईएस अनिवार्य

शेयर बाजार में इस तूफानी तेजी की असल वजह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी किया गया ताजा गजट नोटिफिकेशन है। मंत्रालय ने 'इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी गुड्स (रिक्वायरमेंट ऑफ कम्पल्सरी रजिस्ट्रेशन) ऑर्डर, 2021' में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इस नीतिगत बदलाव के जरिए अब स्मार्टफोन के स्क्रीन प्रोटेक्टर (टेम्पर्ड ग्लास गार्ड) को कम्पल्सरी रजिस्ट्रेशन ऑर्डर यानी सीआरओ (CRO) के अनिवार्य दायरे में शामिल कर दिया गया है। सरकारी आदेश के अनुसार, यह नया और सख्त मानक नियम 1 अप्रैल 2027 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा।

 घटिया और बिना ब्रांड वाले ग्लास पर लगेगी रोक: तय भारतीय मानकों और रजिस्टर्ड फैक्ट्री का नियम

मंत्रालय द्वारा तय की गई 1 अप्रैल 2027 की अंतिम तारीख के बाद भारत में किसी भी स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर का निर्माण करने, विदेश से आयात करने, गोदामों में स्टोर करने या खुदरा बाजार में बेचने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के कड़े क्वालिटी मानकों पर खरा उतरना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। हर उत्पाद को बीआईएस से विधिवत पंजीकृत विनिर्माण संयंत्र (रजिस्टर्ड फैक्ट्री) में ही तैयार करना होगा और उस पर स्पष्ट रूप से मानक चिह्न (Standard Mark) अंकित होना चाहिए। वर्तमान में भारतीय मोबाइल एक्सेसरीज बाजार का एक बहुत बड़ा हिस्सा असंगठित (अनऑर्गनाइज्ड) है, जहां चीन और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से बिना किसी गुणवत्ता जांच और बिना किसी ब्रांड पहचान के लाखों घटिया स्क्रीन गार्ड आयात कर बेचे जाते हैं। दुकानदार फोन पर कोई भी साधारण कांच चिपका देता है और उपभोक्ता उसी को सुरक्षा कवच समझ लेते हैं। लेकिन नए नियम के लागू होते ही बिना रजिस्ट्रेशन और घटिया क्वॉलिटी वाले आयातित सामान का बाजार में टिक पाना पूरी तरह नामुमकिन हो जाएगा, जिससे संगठित घरेलू कंपनियों के लिए मैदान साफ हो जाएगा।

ऑप्टिमस इन्फ्राकॉम को क्यों मिलेगा सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ: नोएडा प्लांट में केमिकल टेम्परिंग

घरेलू ब्रोकरेज और रिसर्च फर्म इक्विरस सिक्योरिटीज (Equirus Securities) के वरिष्ठ विश्लेषक नील मेहता के अनुसार, सरकार के इस कड़े नीतिगत कदम का सर्वाधिक प्रत्यक्ष और बड़ा फायदा ऑप्टिमस इन्फ्राकॉम को मिलने जा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि जब बाकी उद्योग इस नियम के असर को समझने की कोशिश कर रहा है, ऑप्टिमस ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन की तैयारियां काफी पहले से ही पूरी कर रखी हैं। कंपनी के पास उत्तर प्रदेश के नोएडा में अत्याधुनिक इन-हाउस ड्यूल-स्टेज केमिकल टेम्परिंग (Dual-Stage Chemical Tempering) की पूरी तरह से चालू विनिर्माण सुविधा मौजूद है। केमिकल टेम्परिंग वह अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें ग्लास को रासायनिक स्नान के जरिए अत्यधिक मजबूत और शॉक-प्रूफ बनाया जाता है। 'ड्यूल-स्टेज' का अर्थ है कि यह प्रक्रिया दो अलग-अलग चरणों में दोहराई जाती है, जिससे ग्लास की सतह की मजबूती, टिकाऊपन और डिस्प्ले सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है।

दुनिया के ग्लास दिग्गज कोर्निंग के साथ साझेदारी: प्रीमियम 'राइनोटेक' और किफायती 'ऑप्टिगार्ड' ब्रांड्स

ऑप्टिमस इन्फ्राकॉम के स्क्रीन प्रोटेक्टर में इस्तेमाल किया जाने वाला कच्चा ग्लास विश्वप्रसिद्ध ग्लास इंजीनियरिंग कंपनी 'कोर्निंग' (Corning) की तकनीक से तैयार किया गया है। कोर्निंग वही कंपनी है जिसके गोरिल्ला ग्लास दुनिया भर के प्रीमियम आईफोन और प्रमुख एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में उपयोग किए जाते हैं। स्क्रीन प्रोटेक्टर बाजार के सभी वर्गों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए ऑप्टिमस ने दो अलग-अलग रणनीतिक ब्रांड्स के जरिए बाजार में दस्तक दी है। कंपनी का पहला ब्रांड 'राइनोटेक' (Rhinotech) है, जिसे हाई-एंड और प्रीमियम स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। वहीं दूसरा ब्रांड 'ऑप्टिगार्ड' (Optiguard) है, जिसे मिड-रेंज और किफायती बजट वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर उतारा गया है। इस दोहरी ब्रांड रणनीति के जरिए कंपनी देश के हर स्मार्टफोन यूजर तक पहुंच बनाने में सक्षम होगी, और इक्विरस के अनुसार कंपनी की यह मजबूत तैयारी उसे किसी भी अन्य प्रतिस्पर्धी के मुकाबले कई कदम आगे रखती है।

 60 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स और ₹20,000 करोड़ का विशाल बाजार: 2030 तक दोगुना होने का अनुमान

भारत में मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर बाजार की संभावनाएं असाधारण रूप से विशाल हैं। कंपनी और उद्योग जगत के अनुमानों के मुताबिक भारत में वर्तमान समय में करीब 60 करोड़ सक्रिय स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं। यदि एक सामान्य ग्राहक साल भर में औसतन दो स्क्रीन प्रोटेक्टर भी बदलता है, तो देश में सालाना लगभग 120 करोड़ स्क्रीन प्रोटेक्टर यूनिट्स की घरेलू मांग पैदा होती है। मौजूदा समय में इस पूरे बाजार का वार्षिक आकार लगभग ₹20,000 करोड़ आंका गया है, जिसकी लगभग 90 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति फिलहाल असंगठित विदेशी आयात के जरिए पूरी होती है। उद्योग विश्लेषकों का अनुमान है कि 5जी नेटवर्क के विस्तार और महंगे कर्व्ड व फोल्डेबल स्मार्टफोन्स के बढ़ते चलन के कारण वर्ष 2030 तक भारत का स्क्रीन प्रोटेक्टर बाजार बढ़कर करीब ₹40,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगा। आयात पर बीआईएस की पाबंदी लगते ही इस ₹20,000 करोड़ से ₹40,000 करोड़ के बाजार का बड़ा हिस्सा सीधे ऑप्टिमस जैसी प्रमाणित घरेलू विनिर्माताओं की झोली में आ गिरेगा।

 कोर्निंग के साथ 70:30 का जॉइंट वेंचर: तमिलनाडु में तैयार हुआ भारत का पहला फिनिश्ड कवर ग्लास प्लांट

स्क्रीन प्रोटेक्टर के अलावा ऑप्टिमस ने मोबाइल स्क्रीन की मूल विनिर्माण श्रृंखला में भी अपनी मजबूत पैठ बना ली है। कंपनी ने वैश्विक दिग्गज कोर्निंग इंटरनेशनल के साथ मिलकर 70:30 की हिस्सेदारी वाला एक रणनीतिक कवर ग्लास जॉइंट वेंचर (JV) स्थापित किया है, जिसमें 70 प्रतिशत बहुलांश हिस्सेदारी ऑप्टिमस के पास और 30 प्रतिशत हिस्सेदारी कोर्निंग इंटरनेशनल के पास है। इस ऐतिहासिक संयुक्त उद्यम के तहत तमिलनाडु में भारत का पहला पूर्ण 'फिनिश्ड कवर ग्लास प्लांट' तैयार कर लिया गया है। उल्लेखनीय है कि स्क्रीन प्रोटेक्टर फोन के ऊपर अलग से लगाया जाने वाला सुरक्षा कांच होता है, जबकि कवर ग्लास मूल रूप से स्मार्टफोन डिस्प्ले स्क्रीन का वह आंतरिक और प्राथमिक हिस्सा होता है जिसे मोबाइल कंपनियां (OEMs) सीधे फोन असेंबली के दौरान इस्तेमाल करती हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार तमिलनाडु का यह विशाल प्लांट पूरी तरह तैयार हो चुका है और वर्तमान में दुनिया की दिग्गज ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (ओईएम) कंपनियां इसका तकनीकी व गुणवत्ता ऑडिट कर रही हैं। उम्मीद है कि आगामी तीन से चार तिमाहियों के भीतर प्रमुख वैश्विक मोबाइल ब्रांड्स की कस्टमर ऑनबोर्डिंग पूरी हो जाएगी, जिससे ऑप्टिमस मोबाइल ग्लास की समूची वैल्यू चेन में एक निर्विवाद लीडर बनकर उभरेगी।

 नियम लागू होने की टाइमिंग और निवेशकों के लिए आगे के प्रमुख संकेत

इक्विरस सिक्योरिटीज ने अपने विस्तृत नोट में निवेशकों के लिए टाइमिंग के पहलू का भी विश्लेषण किया है। पहले उद्योग यह मानकर चल रहा था कि अनिवार्य बीआईएस सर्टिफिकेशन की यह व्यवस्था जनवरी 2027 से लागू हो सकती है, लेकिन सरकार ने उद्योग को पर्याप्त तैयारी का अवसर देते हुए इसकी आधिकारिक प्रभावी तिथि 1 अप्रैल 2027 निर्धारित की है। इसका अर्थ यह है कि नियम लागू होने की समय सीमा एक तिमाही आगे बढ़ गई है, जिससे इस नए नियम के चलते होने वाली बंपर आय का बड़ा हिस्सा वित्तीय वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही से बैलेंस शीट में पूरी तरह दिखना शुरू होगा। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि इस अतिरिक्त तीन महीने की मोहलत से ऑप्टिमस को अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार करने, पैन-इंडिया डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने और बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर्स के साथ दीर्घकालिक अनुबंध करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा। बाजार के जानकारों का कहना है कि अब निवेशकों को आगामी तिमाहियों में कंपनी को मिलने वाले बड़े संस्थागत ऑर्डर्स, नए बीआईएस रजिस्ट्रेशन और खुदरा विस्तार की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए। सरकारी नीति और इन-हाउस तैयारी के इस दुर्लभ तालमेल के चलते ही मंगलवार को शेयर ₹590 के दायरे से छलांग लगाकर सीधे ₹708.40 के रिकॉर्ड अपर सर्किट पर जा पहुंचा।