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August 09 2026 12:01 pm

Operation 'Epic Fury': कैसे नेतन्याहू की एक सलाह ने बदल दी दुनिया की किस्मत? ट्रंप और खामेनेई के बीच जंग की इनसाइड स्टोरी

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India News Live,Digital Desk : 24 मार्च 2026 तक आते-आते पश्चिम एशिया की आग बुझने के बजाय वैश्विक संकट बन चुकी है। हाल ही में सामने आई सनसनीखेज रिपोर्टों ने इस राज से पर्दा उठा दिया है कि आखिर दुनिया की दो महाशक्तियां—अमेरिका और ईरान—सीधे युद्ध के मैदान में कैसे उतरीं। इस पूरी जंग की पटकथा 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) के नाम से लिखी गई, जिसका केंद्र बिंदु प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई वह गुप्त बातचीत थी, जिसने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई को निशाने पर लिया।

वो 48 घंटे: जब नेतन्याहू ने ट्रंप को मनाया

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हमले से ठीक 48 घंटे पहले एक हाई-प्रोफाइल कॉल हुई। नेतन्याहू ने ट्रंप को एक ऐसी खुफिया जानकारी दी जिसे ठुकराना मुश्किल था:

गोल्डन चांस: नेतन्याहू ने बताया कि खामेनेई अपने शीर्ष सहयोगियों के साथ तेहरान में एक गुप्त बैठक कर रहे हैं। यह 'डकैपिटेशन स्ट्राइक' (शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने) का सबसे सटीक मौका था।

व्यक्तिगत प्रतिशोध: सूत्रों का दावा है कि नेतन्याहू ने ट्रंप को 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान उन पर हुए हत्या के प्रयासों की याद दिलाई, जिसका आरोप ईरान पर लगा था। उन्होंने तर्क दिया कि यह "बदला लेने और भविष्य के खतरों को खत्म करने" का समय है।

ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' और 28 फरवरी का वो धमाका

शुरुआत में ट्रंप युद्ध के खिलाफ थे, लेकिन नेतन्याहू के तर्कों और लगातार मिल रही खुफिया ब्रीफिंग ने उन्हें 'हरी झंडी' देने पर मजबूर कर दिया।

28 फरवरी: ऑपरेशन शुरू हुआ और पहला बम ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर गिरा। उसी शाम ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर खामेनेई की मौत की घोषणा कर दुनिया को चौंका दिया।

नतीजा: इस हमले में 2,300 से अधिक ईरानी नागरिक मारे गए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी सहयोगियों पर मिसाइलें दागीं, जिससे कई अमेरिकी सैनिकों की भी जान गई।

जंग का वैश्विक प्रभाव: तेल और बाजार में हड़कंप

इस युद्ध ने केवल सीमाओं को ही नहीं बदला, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी:

तेल की कीमतें: कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल आया, जिससे दुनिया भर में मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ गई।

सत्ता परिवर्तन: खामेनेई के निधन के बाद उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई ने कमान संभाली, जो अब ट्रंप के साथ शांति वार्ता की मेज पर आने के संकेत दे रहे हैं।

परमाणु क्षमता: नेतन्याहू का दावा है कि इस हमले से ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमता लगभग खत्म हो गई है, जिससे इजरायल अब खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा है।

क्या यह नेतन्याहू का दबाव था?

हालांकि ट्रंप सार्वजनिक रूप से कहते रहे हैं कि यह फैसला पूरी तरह उनका था, लेकिन जानकारों का मानना है कि 'एपिक फ्यूरी' की रणनीति पूरी तरह इजरायली इनपुट पर आधारित थी। नेतन्याहू का मानना था कि शीर्ष नेतृत्व के सफाए से ईरान के अंदर विद्रोह भड़केगा और सत्ता कमजोर होगी।

आज (24 मार्च) युद्ध के 25वें दिन, जब पाकिस्तान की मध्यस्थता में शांति की बातें हो रही हैं, दुनिया अभी भी उस एक फैसले के परिणामों को भुगत रही है जिसने 'विश्व युद्ध 3' जैसी स्थिति पैदा कर दी थी।