रूस से तेल आयात बंद होने पर भारत में महंगाई की मार, पेट्रोल-डीज़ल के दामों में बड़ा उछाल संभव
India News Live,Digital Desk : अगर भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना बंद कर देता है, तो इसका सीधा असर देश में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे आम आदमी की जेब पर भारी बोझ पड़ सकता है और महंगाई बढ़ सकती है। भारत अभी अपनी तेल ज़रूरत का एक बड़ा हिस्सा रूस से पूरा करता है, जिससे कीमतें नियंत्रण में रहती हैं। इस लेख में हम इसी मुद्दे को विस्तार से समझेंगे।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और वर्तमान में अपनी 85% तेल ज़रूरतों को आयात से पूरा करता है। 2017-18 में भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी सिर्फ़ 1.3% थी, जो अब बढ़कर 35% हो गई है। रूस भारत को कच्चा तेल डिस्काउंट पर बेचता है, जिससे देश में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं। अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर दे, तो हमें दूसरे देशों से महंगा तेल खरीदना पड़ेगा, जिससे पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में ₹8 से ₹12 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
भारत-रूस तेल व्यापार का महत्व
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। हम अपनी कुल तेल ज़रूरत का लगभग 85% आयात करते हैं। कुछ साल पहले रूस से हमारा तेल आयात नगण्य था, लेकिन 2025 तक यह बढ़कर 35% हो जाएगा। इसका मुख्य कारण यह है कि यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध लगा दिए गए थे, जिसके कारण रूस ने भारत और चीन जैसे देशों को भारी छूट पर कच्चा तेल देना शुरू कर दिया था।
अगर हम रूस से तेल नहीं खरीदेंगे तो क्या होगा ?
अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है, तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। रूस भारत को 2.70 डॉलर प्रति बैरल की छूट देता है, जो कभी-कभी 10-12 डॉलर तक हो जाती है। इससे भारतीय रिफाइनरियों को सस्ता कच्चा तेल मिलता है, जिससे अंततः देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
अगर यह सस्ता तेल मिलना बंद हो जाए, तो भारत को सऊदी अरब, इराक और अमेरिका जैसे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा, जो रूस जितना सस्ता नहीं है। नतीजतन, पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में ₹8 से ₹12 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है। पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे सभी वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी और महंगाई बेकाबू हो सकती है।
आर्थिक और राजनीतिक कारक
रूस से तेल खरीदना भारत के लिए मजबूरी भी है और समझदारी भी। मजबूरी यह है कि हमारे पास घरेलू उत्पादन बहुत कम है, जबकि समझदारी यह है कि हम सस्ते दामों पर तेल खरीदकर आर्थिक स्थिरता बनाए रख सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भले ही कहा हो कि महंगाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा असर आम नागरिकों के जीवन स्तर पर पड़ेगा।