आतंक का नया गठजोड़? दोहा में हमास और लश्कर कमांडर की मीटिंग से बढ़ी भारत की चिंता
India News Live,Digital Desk : दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय आतंकी संगठनों के बीच बढ़ते तालमेल को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सीनियर कमांडर फैसल नदीम ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि उसका संपर्क फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास से रहा है और वह उसके शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर चुका है। इस बयान के सामने आने के बाद भारत समेत कई देशों की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।
दोहा में हमास नेतृत्व से मुलाकात का दावा
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, एक वीडियो में पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग के कमांडर फैसल नदीम ने बताया कि वर्ष 2024 में उसने कतर की राजधानी दोहा का दौरा किया था। इसी दौरान उसकी मुलाकात हमास के वरिष्ठ नेताओं से हुई। मरकजी मुस्लिम लीग को लश्कर-ए-तैयबा का राजनीतिक मुखौटा माना जाता है।
फैसल नदीम ने दावा किया कि इस यात्रा के दौरान उसके साथ सैफुल्लाह कसूरी भी मौजूद था, जिसे जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड बताया जाता है। नदीम के अनुसार, दोनों की मुलाकात हमास के वरिष्ठ नेता खालिद मशाल से हुई थी।
भारतीय एजेंसियों के लिए अहम संकेत
भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह स्वीकारोक्ति दक्षिण एशिया और मध्य-पूर्व में सक्रिय आतंकी संगठनों के बीच सीधे संपर्क और समन्वय का ठोस संकेत है। सुरक्षा विश्लेषकों के मुताबिक, यह गठजोड़ केवल विचारधारा या समर्थन तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसमें प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल अनुभव साझा करने की आशंका भी शामिल है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लश्कर और हमास के बीच उभरता यह संबंध आने वाले समय में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
पहले भी दिख चुकी है नजदीकियों की झलक
इससे पहले भी हमास और लश्कर के बीच संपर्क की खबरें सामने आ चुकी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमास के वरिष्ठ कमांडर नाजी जहीर और लश्कर कमांडर राशिद अली संधू की मुलाकात पाकिस्तान के गुजरांवाला में हुई थी। यह मुलाकात PMML द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां नाजी जहीर मुख्य अतिथि के तौर पर मंच पर मौजूद थे और राशिद संधू राजनीतिक नेता की पहचान में शामिल हुआ था।
एक वीडियो में दोनों को एक साथ मंच साझा करते हुए देखा गया था। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि इस तरह खुले मंच पर मौजूदगी दोनों संगठनों के बीच बढ़ते भरोसे और गहरे होते रिश्तों को दर्शाती है।
बार-बार की यात्राओं से गहराया शक
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, नाजी जहीर अक्टूबर 2023 के बाद से अब तक करीब 15 बार पाकिस्तान का दौरा कर चुका है। बार-बार की यात्राएं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में खुली भागीदारी इस ओर इशारा करती हैं कि दोनों संगठन अब अपने संबंधों को छिपाने से परहेज नहीं कर रहे।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठ सकता है मुद्दा
काउंटर-टेररिज्म विशेषज्ञों का कहना है कि हमास और लश्कर-ए-तैयबा दोनों ही अमेरिका समेत कई देशों द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन घोषित हैं। ऐसे में इनके बीच किसी भी तरह का सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानूनों और वैश्विक सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
भारतीय खुफिया तंत्र इस उभरते आतंकी गठजोड़ पर करीबी नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।