New internal crisis in Ukraine surrounded by Russian attacks ज़ेलेंस्की के खिलाफ हजारों सड़कों पर, 'तानाशाही' के आरोपों ने घेरा
India News Live,Digital Desk : रूसी आक्रमण से जूझ रहे यूक्रेन को अब एक नए और अप्रत्याशित संकट का सामना करना पड़ रहा है - खुद राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के खिलाफ बड़े पैमाने पर सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी कीव सहित विभिन्न शहरों में हजारों की संख्या में यूक्रेनियन नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर ज़ेलेंस्की सरकार की नीतियों का विरोध किया है। ये प्रदर्शन ऐसे समय हो रहे हैं जब देश भारी सैन्य हमलों और तबाही से जूझ रहा है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि युद्धकाल के नाम पर ज़ेलेंस्की सरकार नागरिक स्वतंत्रताओं का दमन कर रही है और विरोध की आवाज को दबा रही है। विपक्ष और कुछ नागरिक अधिकार समूहों का कहना है कि सरकार "मार्शल लॉ" (युद्धकालीन कानून) की आड़ में सत्ता का केंद्रीकरण कर रही है, विपक्षी दलों पर प्रतिबंध लगा रही है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंट रही है। प्रदर्शनकारियों ने इन कदमों की तुलना "गेस्टापो तरीकों" (Gestapo methods) से की है, जो यह दर्शाता है कि उनकी नाराज़गी कितनी गहरी है।
दूसरी ओर, राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और उनकी सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए ऐसे कठोर कदम उठाना अनिवार्य है। उनका तर्क है कि युद्ध के दौरान आंतरिक तोड़फोड़ और अराजकता देश की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है, इसलिए उन्हें उन लोगों से सख्ती से निपटना पड़ रहा है जो कथित तौर पर आंतरिक दुश्मनों या रूसी सहानुभूति रखने वाले हैं।
यह आंतरिक विरोध यूक्रेन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ उसे रूस के बाहरी आक्रमण से अपनी ज़मीन की रक्षा करनी है, वहीं दूसरी ओर उसे अपनी ही जनता के असंतोष और लोकतंत्र समर्थक मांगों का भी सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता पैदा करती है, क्योंकि पश्चिमी देशों का यूक्रेन को समर्थन काफी हद तक उसके लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता पर आधारित है। अब देखना यह है कि ज़ेलेंस्की इस दोहरे मोर्चे पर कैसे संतुलन बिठा पाते हैं।