Nag Panchami 2025 पावन नाग पंचमी पर पूजे जाते हैं ये पौराणिक नाग, जानें उनका महत्व और कहानी
India News Live,Digital Desk : हिंदू धर्म में प्रकृति के साथ संतुलन और हर जीव के प्रति आदर का भाव प्रमुख है, और इसी कड़ी में नागों की पूजा का एक विशेष स्थान है। नाग पंचमी का पावन पर्व, जो 28 जुलाई 2025 को मनाया जाएगा, नाग देवताओं के प्रति श्रद्धा अर्पित करने का एक महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन देशभर में सर्प पूजा की जाती है, और विशेष रूप से पौराणिक काल के उन प्रसिद्ध नागों का स्मरण किया जाता है जिनका वर्णन हमारे प्राचीन ग्रंथों और कथाओं में मिलता है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ प्रमुख नागों और उनके महत्व के बारे में:
1. शेषनाग:
ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली और पूज्य नागों में से एक, शेषनाग को भगवान विष्णु का आसन माना जाता है। वे सृष्टि के आरंभ से लेकर अंत तक भगवान विष्णु के साथ रहते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शेषनाग अपने हज़ार फनों पर पूरी पृथ्वी का भार उठाए हुए हैं। उन्हें अनंत या आदि शेष के नाम से भी जाना जाता है। नाग पंचमी पर उनकी पूजा से धरती पर संतुलन और स्थिरता बनी रहती है, ऐसी मान्यता है।
2. वासुकी:
समुद्र मंथन की कथा में वासुकी नाग की केंद्रीय भूमिका रही है। देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीरसागर को मथने के लिए मंदराचल पर्वत को मथनी बनाया और वासुकी को रस्सी के रूप में प्रयोग किया। उन्होंने मंथन में सहयोग करके स्वयं को कष्ट पहुंचाया, लेकिन अंततः अमृत की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वासुकी भगवान शिव के गले का हार भी माने जाते हैं।
3. तक्षक नाग:
नागराज तक्षक को पाताल लोक का एक शक्तिशाली नाग माना जाता है। वे अपनी तीव्र गति और घातक विष के लिए विख्यात हैं। राजा परीक्षित की मृत्यु के लिए भी तक्षक नाग को ही जिम्मेदार माना जाता है। हालांकि वे उग्र स्वभाव के थे, फिर भी उनकी शक्ति और शिव से जुड़ाव के कारण उनकी पूजा की जाती है ताकि उनके प्रकोप से बचा जा सके।
4. कालिया नाग:
भागवत पुराण में वर्णित भगवान कृष्ण और कालिया नाग का प्रसंग अत्यंत प्रसिद्ध है। यमुना नदी को प्रदूषित कर रहे कालिया नाग का भगवान कृष्ण ने अपनी बाल लीला में दमन किया और उन्हें सबक सिखाकर गोकुल के लोगों को राहत दी। नाग पंचमी पर कालिया नाग को पूजने का अर्थ प्रकृति के संतुलन और दुष्ट शक्तियों के विनाश से भी जोड़ा जाता है।
5. कार्कोटक नाग:
पौराणिक कथाओं में कार्कोटक नाग का वर्णन भी मिलता है, जिनका संबंध नल और दमयंती की कथा से है। इन्होंने नल को आशीर्वाद दिया था, जिसके कारण वे विभिन्न चुनौतियों का सामना कर पाए। कार्कोटक नाग का रंग काला और उनकी पूंछ सफेद होती है।
इन पौराणिक नागों की पूजा आज भी नाग पंचमी के दिन बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ की जाती है। यह मान्यता है कि इन नाग देवताओं का पूजन करने से घर में सर्पदंश का भय दूर होता है, सुख-समृद्धि आती है और व्यक्ति हर प्रकार के संकटों से सुरक्षित रहता है। यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति आदर और जीवों के सह-अस्तित्व का महत्वपूर्ण संदेश भी देता है।