Mystery of Varanasi Ghats : क्यों केवल दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर ही होती है विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती?

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India News Live, Digital Desk: वाराणसी, जिसे हम स्नेह से काशी भी कहते हैं, एक ऐसा शहर है जिसकी आत्मा गंगा में बसती है. दुनिया भर से लोग यहाँ एक अनूठे और अविस्मरणीय अनुभव के लिए आते हैं - गंगा आरती. यह एक ऐसा दिव्य आयोजन है जो हर शाम लाखों दिलों को अपनी भक्ति और भव्यता से छू लेता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वाराणसी में चौरासी घाट होने के बावजूद, सबसे भव्य और प्रसिद्ध गंगा आरती केवल दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर ही क्यों होती है? इसके पीछे कुछ खास कारण और दिलचस्प कहानियाँ छिपी हैं.

दशाश्वमेध घाट: जहाँ देवताओं ने की थी पूजा

वाराणसी के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण घाटों में से एक है दशाश्वमेध घाट. जैसा कि नाम से ही जाहिर है, इस घाट का संबंध पौराणिक कथाओं से जुड़ा है. माना जाता है कि स्वयं भगवान ब्रह्मा ने इसी स्थान पर दस अश्वमेध यज्ञ संपन्न किए थे. इसी पौराणिक महत्व के कारण, यह घाट सदियों से पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का एक प्रमुख केंद्र रहा है.

यहाँ गंगा आरती की शुरुआत 1991 में पंडित सत्येंद्र मिश्र 'मुंडन महाराज' द्वारा की गई थी. हालाँकि इसकी प्रेरणा हरिद्वार की गंगा आरती से ली गई थी, लेकिन जल्द ही दशाश्वमेध घाट की आरती ने अपनी एक अलग पहचान बना ली और लोगों की गहरी आस्था का प्रतीक बन गई.

अस्सी घाट: जहाँ मिलती हैं दो पवित्र नदियाँ

अब बात करते हैं अस्सी घाट की, जो अपनी सुबह की आरती 'सुबह-ए-बनारस' के लिए जाना जाता है. यह घाट भी अत्यंत प्राचीन है और इसका धार्मिक महत्व इस बात से और बढ़ जाता है कि यहीं पर अस्सी नदी का गंगा में संगम होता है. पुराणों में तो इस स्थान को 'अस्सी सैंबेड तीर्थ' कहा गया है. ऐसी मान्यता है कि अस्सी घाट पर एक डुबकी लगाने से सभी तीर्थों में स्नान करने जितना पुण्य मिलता है. यहाँ की सुबह की आरती अपनी शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है, जो एक अलग ही तरह का अनुभव देती है.

क्यों यही दो घाट हैं इतने खास?

इन दोनों घाटों के अलावा भी कुछ व्यावहारिक कारण हैं जो इन्हें गंगा आरती के लिए सबसे उपयुक्त बनाते हैं. दशाश्वमेध और अस्सी घाट, दोनों ही काफी चौड़े और खुले हैं, जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आसानी से आरती देख सकते हैं और उसमें शामिल हो सकते हैं. साथ ही, पर्यटकों के लिए यहाँ पहुँचना और सुविधाओं का लाभ उठाना अन्य घाटों की तुलना में अधिक सुविधाजनक है.

हालांकि यह भी सच है कि वाराणसी के कई अन्य घाटों पर भी छोटे स्तर पर गंगा आरती होती है और भक्तों के लिए उनका भी अपना एक अलग महत्व है. लेकिन दशाश्वमेध और अस्सी घाट की आरती की भव्यता और दिव्यता का कोई मुकाबला नहीं है.