नेटफ्लिक्स पर चुपके से आई 7.9 IMDb रेटिंग वाली कॉमेडी फिल्म 'मोधा रात्रि', 18 सितंबर को हुई रिलीज
ओटीटी की दुनिया में हर हफ्ते दर्जनों फिल्में और वेब सीरीज स्ट्रीम होती हैं, लेकिन उनमें से कुछ ऐसी सादगी भरी कहानियां होती हैं जो बिना किसी भारी-भरकम शोर-शराबे के दर्शकों के दिलों में जगह बना लेती हैं। प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर 18 सितंबर को एक ऐसी ही खूबसूरत और हल्की-फुल्की कॉमेडी-ड्रामा फिल्म रिलीज हुई है, जिसे दर्शकों और समीक्षकों से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। इस फिल्म का नाम 'मोधा रात्रि' (Modha Rathiri) है, जिसे मशहूर रिव्यू एग्रीगेटर साइट आईएमडीबी (IMDb) पर 7.9 की शानदार यूजर रेटिंग प्राप्त हुई है। अगर आप इस हफ्ते किसी ऐसी फिल्म की तलाश में हैं जो तनाव भरे माहौल से दूर चेहरे पर मुस्कान बिखेर दे, तो यह फिल्म आपकी वॉचलिस्ट का हिस्सा बन सकती है।
जबरन शादी और एक रात के सफर की अनूठी दास्तान
तमिल भाषा में 'मोधा रात्रि' का शाब्दिक अर्थ 'शादी की पहली रात' यानी सुहागरात होता है। फिल्म की पूरी पटकथा मरुथु (ऋषिकांत) और मुथुसेल्वी (अनिशमा अनिलकुमार) नाम के दो मुख्य किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है। मरुथु दुबई में नौकरी करता है और लंबे समय बाद अपने गांव लौटता है। परिवार के भारी सामाजिक और भावनात्मक दबाव के आगे झुकते हुए वह मुथुसेल्वी के साथ सात फेरे ले लेता है। वहीं दूसरी तरफ, मुथुसेल्वी एक महत्वाकांक्षी एथलीट है, जिसका दिल पहले से किसी दूसरे लड़के के लिए धड़कता है और वह इस अनचाही शादी के सख्त खिलाफ होती है। हालांकि, दोनों परिवारों की जिद के सामने किसी की नहीं चलती और दोनों एक रिश्ते के बंधन में बांध दिए जाते हैं।
कहानी में सबसे बड़ा और मजेदार मोड़ शादी की पहली ही रात आता है। मुथुसेल्वी अपने प्रेमी के साथ भागने के इरादे से चुपचाप घर की दहलीज लांघने की कोशिश करती है। आमतौर पर ऐसी परिस्थितियों में फिल्में ड्रामे, गुस्से या मारपीट की तरफ मुड़ती हैं, लेकिन मरुथु का किरदार बिल्कुल अलग सोच वाला दिखाया गया है। वह न तो कोई हंगामा खड़ा करता है और न ही मुथुसेल्वी पर गुस्सा होता है, बल्कि वह समझदारी दिखाते हुए खुद अपनी नई नवेली दुल्हन को उसके प्रेमी तक पहुंचाने का फैसला करता है।
लेकिन असली ट्विस्ट तब आता है जब तय जगह पर पहुंचने के बाद मुथुसेल्वी का बॉयफ्रेंड मौके पर आने से साफ इनकार कर देता है और फोन बंद कर लेता है। इसके बाद मरुथु और मुथुसेल्वी आधी रात के सन्नाटे में सुनसान रास्ते पर अकेले खड़े रह जाते हैं। यहां से दोनों के बीच शुरू होती है एक अप्रत्याशित रोड ट्रिप और एक लंबी रात की यात्रा, जिसमें हास्य, तकरार और मानवीय संवेदनाओं का बेहतरीन संगम देखने को मिलता है। वहीं पीछे गांव में, दोनों के कमरे से अचानक गायब होने को लेकर दोनों परिवारों में तरह-तरह के कयास और मजेदार अफवाहें फैलने लगती हैं।
'मोधा रात्रि' की सबसे बड़ी खूबियां
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका जमीन से जुड़ा अंदाज और बनावटीपन से कोसों दूर रहने वाली नेचुरल कॉमेडी है। आमतौर पर भारतीय समाज में जबरन शादी या प्रेम विवाह की असफलता जैसे मुद्दों को बहुत आक्रामक या उपदेशात्मक शैली में दिखाया जाता है, लेकिन इस फिल्म के निर्देशक ने बिना कोई लंबा-चौड़ा भाषण दिए पूरे मामले को बेहद सहज, परिपक्व और गुदगुदाने वाले अंदाज में प्रस्तुत किया है।
कलाकारों के अभिनय की बात करें तो मरुथु की भूमिका में अभिनेता ऋषिकांत ने कमाल का ठहराव दिखाया है। उनकी सादगी और परिस्थितियों को संभालने का शांत तरीका दर्शकों का दिल जीत लेता है। वहीं, मुथुसेल्वी के किरदार में अनिशमा अनिलकुमार ने एक विद्रोही लेकिन भीतर से डरी हुई लड़की के मनोभावों को पर्दे पर बखूबी जिया है। एक ही रात के घटनाक्रम में दोनों अजनबियों की केमिस्ट्री जिस तरह धीरे-धीरे नोकझोंक से आपसी समझ और सम्मान में तब्दील होती है, वह स्क्रीनप्ले को जीवंत बनाए रखती है। ग्रामीण परिवेश का हास्य और परिवारों के बीच की गलतफहमियां दर्शकों को लगातार बांधे रखती हैं।
फिल्म में कहां रह गई कमी
सकारात्मक पहलुओं के बावजूद फिल्म कुछ जगहों पर थोड़ी कमजोर भी साबित होती है। कहानी का मध्य भाग यानी जब दोनों मुख्य किरदार सड़क पर सफर कर रहे होते हैं, वहां पेसिंग (रफ्तार) थोड़ी धीमी पड़ जाती है। कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे खिंचे हुए लगते हैं, जिन्हें एडिटिंग टेबल पर थोड़ा कसा जा सकता था।
इसके अलावा, फिल्म की कहानी काफी हद तक प्रेडिक्टेबल यानी अनुमान लगाने योग्य है। आखिरी वक्त पर प्रेमी का पीछे हट जाना और पति-पत्नी के बीच धीरे-धीरे एक भावनात्मक जुड़ाव का पनपना कोई नया फॉर्मूला नहीं है; दर्शक शुरुआत के आधे घंटे में ही अंदाजा लगा लेते हैं कि अंत किस दिशा में जाने वाला है। यदि क्लाइमेक्स या सेकंड हाफ में कुछ नए अप्रत्याशित सरप्राइज एलिमेंट्स जोड़े जाते, तो यह फिल्म और भी ज्यादा असरदार साबित हो सकती थी।
क्या आपको यह फिल्म देखनी चाहिए?
सिनेमाघरों में अपनी रिलीज के दौरान औसत लेकिन सम्मानजनक कारोबार करने के बाद अब जब यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है, तो यह वीकेंड बिंज-वॉच के लिए एक अच्छा विकल्प है। अगर आप अत्यधिक एक्शन, खून-खराबे या दिमाग को थका देने वाले सस्पेंस-थ्रिलर से ब्रेक लेकर एक सुकून देने वाली, हल्की-फुल्की और पारिवारिक पृष्ठभूमि वाली फिल्म देखना चाहते हैं, तो 'मोधा रात्रि' आपको बिल्कुल निराश नहीं करेगी। हालांकि, इसे देखते वक्त किसी क्रांतिकारी सिनेमा की उम्मीद न रखें; यह एक बार देखी जाने वाली मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली कहानी है।