मई में 'कपकपी' और जून में 'सूखा'? मौसम विभाग की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता, जानें शहर का हाल
India News Live, Digital Desk: आमतौर पर मई का महीना सूरज की तपिश और झुलसा देने वाली लू (Heatwave) के लिए जाना जाता है, लेकिन साल 2026 की शुरुआत कुछ अलग ही अंदाज में हुई है। यूपी, बिहार और दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में मई के पहले हफ्ते में ही आसमान से बरसती राहत ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। आलम यह है कि दोपहर में भी बाइक चलाने वालों को हल्की ठंड का एहसास हो रहा है। लेकिन क्या यह राहत किसी बड़ी आफत का संकेत है? क्या मई की यह बारिश जून में सूखे का कारण बनेगी? आइए जानते हैं मौसम विभाग (IMD) का पूरा पूर्वानुमान।
क्यों बदला मौसम का मिजाज?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय उत्तर भारत में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और मध्य भारत में साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक साथ सक्रिय हैं। इन दोनों सिस्टमों के मिलने की वजह से अगले 15 दिनों तक देशभर के मौसम में काफी अनिश्चितता बनी रहेगी।
अगले कुछ दिनों का 'वेदर अलर्ट':
यूपी और बिहार: प्रयागराज, वाराणसी, जौनपुर और गाजीपुर समेत पूर्वांचल के कई जिलों में आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना है। बिहार के सभी जिलों के लिए मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है।
उत्तराखंड और हिमाचल: पहाड़ी राज्यों में 8 मई तक मौसम खराब रहने और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी है।
राजस्थान और मध्य प्रदेश: राजस्थान के कोटा, उदयपुर और भरतपुर में पश्चिमी विक्षोभ का असर दिखेगा। वहीं, एमपी के सिवनी, मंडला और बालाघाट में तेज आंधी के साथ बारिश की उम्मीद है।
कालबैशाखी का कहर: पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 'कालबैशाखी' (Nor'westers) की दस्तक हो चुकी है। इससे गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन तूफानी हवाएं तबाही मचा सकती हैं।
क्या जून में पड़ेगा सूखा?
मई की इस बेमौसमी बारिश को कई लोग मानसूनी बारिश समझ रहे हैं, लेकिन मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मई में अधिक नमी और बारिश के कारण जून में मानसून की रफ्तार सामान्य से कम रह सकती है।
संभावित खतरे:
भीषण लू (Heatwave): जून के महीने में उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ने की आशंका है।
पानी की किल्लत: मानसून की सुस्त रफ्तार के कारण जलाशयों के जलस्तर में कमी आ सकती है।
खेती पर असर: जून में बारिश कम होने से खरीफ फसलों (जैसे धान) की बुवाई पर बुरा असर पड़ सकता है।
फिलहाल, मौसम विभाग ने सलाह दी है कि बदलते मौसम और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए लोग सावधानी बरतें और आंधी के समय पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।