बरेली बवाल का एक साल: सलाखों के पीछे मौलाना तौकीर रजा, 55 उपद्रवी अब भी फरार; एसएसपी ने दिए कुर्की के सख्त आदेश
उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले चर्चित बवाल और सांप्रदायिक तनाव की घटना को पूरा एक साल बीत चुका है, लेकिन पुलिस और न्यायिक जांच की तपिश आज भी शहर में महसूस की जा रही है। शहर की फिजा में जहर घोलने और सुनियोजित तरीके से उपद्रव भड़काने के मामले में जहां इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां पिछले एक वर्ष से सलाखों के पीछे दिन काट रहे हैं, वहीं इस मामले में नामजद व प्रकाश में आए 55 उपद्रवी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहे हैं। घटना के एक साल पूरे होने पर बरेली पुलिस कप्तान (एसएसपी) ने पूरे मामले की समीक्षा करते हुए फरार चल रहे सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कड़े तेवर दिखाए हैं और मातहतों को उनकी अचल संपत्तियों की कुर्की का अंतिम कानूनी चाबुक चलाने का स्पष्ट फरमान जारी कर दिया है।
कानून-व्यवस्था को ताक पर रखकर किए गए पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी की इस वारदात के बाद शासन ने पूरे घटनाक्रम की गहन विवेचना के आदेश दिए थे। मौलाना तौकीर रजा पर भीड़ को भड़काने, भड़काऊ भाषण देने और साजिश रचने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था। पिछले 365 दिनों में उनके वकीलों की ओर से जिला अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक कई बार जमानत की अर्जी लगाई गई, लेकिन मामले की गंभीरता और पुलिस द्वारा पेश किए गए पुख्ता साक्ष्यों के चलते उन्हें कोई विधिक राहत नहीं मिल सकी। हालांकि, इस पूरी कानूनी लड़ाई के बीच 55 अन्य आरोपियों का अब तक फरार रहना स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा था, जिसे लेकर अब पुलिस मुख्यालय ने विशेष रणनीति तैयार कर ली है।
एसएसपी का कड़ा रुख: कुर्की की मुनादी और विशेष टीमों की तैनाती
फरार आरोपियों को लेकर बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि कानून से खिलवाड़ करने वाले किसी भी उपद्रवी को राहत की सांस नहीं लेने दी जाएगी। एसएसपी ने संबंधित थाना प्रभारियों, सर्विलांस टीम और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) को निर्देशित करते हुए कहा कि फरार 55 आरोपियों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (पूर्ववर्ती सीआरपीसी की धारा 82 और 83) के तहत मुनादी कराकर संपत्ति कुर्की की कार्रवाई युद्धस्तर पर पूरी की जाए।
एसएसपी के आदेशानुसार, यदि तय समय-सीमा के भीतर आरोपी अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं करते हैं या थाने में हाजिर नहीं होते हैं, तो ढोल-नगाड़ों के साथ उनके घरों पर मुनादी कराई जाएगी और उनके मकानों, दुकानों व अचल संपत्तियों पर बुलडोजर चलाकर कुर्की की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके लिए पुलिस की चार विशेष टीमों का गठन किया गया है, जिन्हें इन फरार उपद्रवियों की सटीक लोकेशन ट्रेस करने और पड़ोसी जिलों व राज्यों में दबिश देने की सीधी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सर्विलांस और मुखबिर तंत्र सक्रिय, शरणदाताओं पर भी गिरेगी गाज
पुलिस की तकनीकी जांच में यह बात सामने आई है कि घटना के बाद से ही अधिकांश फरार आरोपी अपने पैतृक निवासों को छोड़कर उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में अपने रिश्तेदारों और परिचितों के यहां ठिकाना बनाए हुए हैं। कई आरोपियों ने पुलिस ट्रैकिंग से बचने के लिए अपने पुराने मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया अकाउंट्स पूरी तरह बंद कर रखे हैं।
एसएसपी ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति इन फरार उपद्रवियों को किसी भी प्रकार की आर्थिक मदद, कानूनी संरक्षण या अपने घर में शरण दे रहा है, उसे भी इस आपराधिक साजिश का हिस्सा माना जाएगा। पुलिस ऐसे शरणदाताओं को चिन्हित कर रही है और उनके खिलाफ भी आईपीसी/बीएनएस की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाएगा। स्थानीय स्तर पर खुफिया तंत्र (एलआईयू) को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी तरह की संभावित हलचल पर तुरंत काबू पाया जा सके।
सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई और गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई
एक साल पुराने इस मामले में केवल गिरफ्तारी ही पुलिस का एकमात्र लक्ष्य नहीं है, बल्कि उपद्रव के दौरान हुए सार्वजनिक और निजी नुकसान की पूरी वसूली भी प्रशासन के रडार पर है। उत्तर प्रदेश सरकार के कड़े नियमों के तहत दंगे और पथराव के दौरान नष्ट हुई सरकारी संपत्तियों, वाहनों और दुकानों के नुकसान का जो आकलन किया गया था, उसकी भरपाई के लिए रिकवरी नोटिस की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
इसके साथ ही, समाज में दहशत फैलाने और गिरोह बनाकर हिंसा को अंजाम देने वाले प्रमुख आरोपियों पर उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं असामाजिक क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम यानी गैंगस्टर एक्ट लगाने की संस्तुति भी की जा रही है। गैंगस्टर एक्ट के तहत पुलिस को आरोपियों द्वारा अवैध रूप से अर्जित की गई चल और अचल संपत्ति को जब्त (सीज) करने का विधिक अधिकार प्राप्त हो जाएगा, जिससे इन उपद्रवियों की आर्थिक रीढ़ को पूरी तरह तोड़ा जा सके।
संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा का कड़ा पहरा और शांति की अपील
बरेली हिंसा की पहली बरसी के मद्देनजर पुराने शहर, संवेदनशील मोहल्लों और मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस और प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। किसी भी अप्रिय स्थिति या अफवाह को फैलने से रोकने के लिए पुलिस के आला अधिकारी लगातार फ्लैग मार्च कर रहे हैं। संवेदनशील चौराहों और प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी (PAC) की कंपनियां तैनात कर दी गई हैं।
ड्रोन कैमरों के जरिए छतों और तंग गलियों की निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी स्थान पर ईंट-पत्थर या आपत्तिजनक सामग्री का भंडारण न किया जा सके। जिला प्रशासन ने अमन पसंद नागरिकों और धर्मगुरुओं के साथ बैठक कर स्पष्ट संदेश दिया है कि शहर के शांतिपूर्ण माहौल से खिलवाड़ करने वाले किसी भी शरारती तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। एक साल से जेल में बंद तौकीर रजा के मामले में कोर्ट में प्रभावी पैरवी जारी है और अब 55 फरार आरोपियों पर नकेल कसकर पुलिस इस पूरे मामले का अंतिम पटाक्षेप करने की तैयारी में है।