महिंद्रा ने की ₹5,100 करोड़ की महाडील: ब्राजीलियाई दिग्गज Embraer को बेचेगी एयरोस्पेस कंपनी की 51% हिस्सेदारी
भारतीय ऑटोमोबाइल और डिफेंस सेक्टर की दिग्गज कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड (M&M) ने रक्षा एवं विमानन (एयरोस्पेस) विनिर्माण क्षेत्र में एक बहुत बड़ा रणनीतिक सौदा किया है। महिंद्रा समूह ने ब्राजील की विश्व प्रसिद्ध विमान निर्माता कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer S.A.) के साथ एक निवेश समझौता संपन्न किया है, जिसकी कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹5,100 करोड़ आंकी गई है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत एम्ब्रेयर महिंद्रा समूह की पूर्ण स्वामित्व वाली एयरोस्पेस सहायक कंपनी नोवावायु एयरोस्पेस लिमिटेड (Novavaayu Aerospace Limited - NAL) में 51 प्रतिशत की बहुलांश (मेजॉरिटी) इक्विटी हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी। शुक्रवार देर शाम शेयर बाजारों (BSE, NSE) को भेजी गई नियामक फाइलिंग में महिंद्रा समूह ने इस बहुप्रतीक्षित सौदे की औपचारिक पुष्टि कर दी है।
नोवावायु एयरोस्पेस में बदलेगा मालिकाना हक, 1 दिसंबर 2026 तक पूरी होगी प्रक्रिया
स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, यह लेन-देन 1 दिसंबर 2026 को या उससे पहले पूरा होने की संभावना है। नोवावायु एयरोस्पेस लिमिटेड का गठन 29 जुलाई 2026 को महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड (MDSL) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई के रूप में किया गया था। अब एम्ब्रेयर द्वारा 51 प्रतिशत इक्विटी शेयर हासिल कर लेने के बाद नोवावायु एयरोस्पेस महिंद्रा की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी नहीं रह जाएगी, बल्कि यह महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स (MDSL) की एक 'एसोसिएट कंपनी' (सहयोगी इकाई) में तब्दील हो जाएगी। महिंद्रा ने अपनी फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि यह बिक्री किसी 'स्लंप सेल' के अंतर्गत नहीं आती है और न ही इसमें दोनों पक्षों का कोई विलय (Amalgamation) शामिल है, बल्कि यह विशुद्ध रूप से रणनीतिक इक्विटी हस्तांतरण का मामला है।
'मेक इन इंडिया' और भारतीय वायुसेना के मध्यम परिवहन विमान (MTA) प्रोजेक्ट को बड़ा बल
महिंद्रा और एम्ब्रेयर के बीच यह साझेदारी भारतीय रक्षा गलियारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारतीय वायुसेना (IAF) अपने पुराने एएन-32 (An-32) और अन्य परिवहन विमानों के बेड़े को बदलने के लिए 40 से 80 की संख्या में मध्यम परिवहन विमानों (Medium Transport Aircraft - MTA) की खरीद प्रक्रिया में जुटी हुई है। एम्ब्रेयर का आधुनिक दोहरे इंजन वाला सी-390 मिलेनियम (C-390 Millennium) विमान इस वैश्विक निविदा में सबसे आगे चल रहे दावेदारों में से एक है। महिंद्रा और एम्ब्रेयर ने पूर्व में भी भारत में इस विमान के सह-विकास, स्थानीय असेंबली और मेंटेनेंस, रिपेयर व ओवरहाल (MRO) हब स्थापित करने के लिए शुरुआती करार किया था। नोवावायु एयरोस्पेस में एम्ब्रेयर का 51% नियंत्रण भारत के घरेलू रक्षा निर्माण में भारी वैश्विक तकनीक और पूंजी लाने की राह खोलेगा।
एम्ब्रेयर को भारत में विनिर्माण आधार और महिंद्रा को वैश्विक सप्लाई चेन का लाभ
ब्राजील की एम्ब्रेयर दुनिया में बोइंग और एयरबस के बाद तीसरी सबसे बड़ी नागरिक व सैन्य विमान निर्माता कंपनी है। वैश्विक स्तर पर क्षेत्रीय जेट (Regional Jets) और सैन्य रणनीतिक विमानों के निर्माण में एम्ब्रेयर का लंबा अनुभव रहा है। इस सौदे के माध्यम से एम्ब्रेयर को भारत के विशाल एयरोस्पेस इकोसिस्टम और कुशल कार्यबल तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे वह अपने वैश्विक कंपोनेंट्स की आपूर्ति भारत से सुनिश्चित कर सकेगी। वहीं दूसरी ओर, महिंद्रा समूह को अपने एयरोस्पेस पोर्टफोलियो को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सैन्य मानकों पर विमान संरचनाएं (एयरोस्ट्रक्चर्स) तैयार करने का सुनहरा अवसर प्राप्त होगा।
शेयर बाजार में हलचल और निवेशकों की नजरें
शुक्रवार को बाजार बंद होने के समय महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) के शेयर एनएसई (NSE) पर 1.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹2,750.60 के स्तर पर बंद हुए थे। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोमवार को कारोबारी सत्र की शुरुआत में महिंद्रा के शेयरों में इस ₹5,100 करोड़ के सौदे का सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स के जरिए एयरोस्पेस कारोबार में वैश्विक साझेदार को जोड़ना कंपनी की पूंजीगत कार्यकुशलता (Capital Allocation Efficiency) को बढ़ाएगा, जिससे महिंद्रा समूह अपने मुख्य ऑटोमोटिव और फार्म इक्विपमेंट कारोबार पर केंद्रित रहते हुए रक्षा क्षेत्र से आकर्षक प्रतिफल प्राप्त कर सकेगा।