Madhya Pradesh and Rajasthan cough syrups investigated : बच्चों की मौत सिरप से नहीं, सरकार ने दी नई चेतावनी

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India News Live,Digital Desk : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश और राजस्थान से एकत्र किए गए कफ सिरप के नमूनों में जहरीले रसायन डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) और एथिलीन ग्लाइकॉल (ईजी) नहीं पाए गए। ये दोनों रसायन किडनी को गंभीर नुकसान पहुँचाते हैं और अतीत में कई बच्चों की जान ले चुके हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान में हाल ही में हुई 11 बच्चों की मौत के बाद यह संदेह पैदा हुआ था कि कफ सिरप इसका कारण हो सकता है। मृतकों की उम्र 1 से 7 साल के बीच थी और उनमें किडनी में गंभीर संक्रमण और पेशाब में पेशाब की समस्या के लक्षण दिखाई दे रहे थे। इसके बाद, एक केंद्रीय जाँच दल मौके पर पहुँचा और नमूने एकत्र किए।

डीईजी और ईजी क्या हैं?

डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) जहरीले रसायन हैं। इनका इस्तेमाल औद्योगिक उत्पादों में होता है, लेकिन अगर ये दवाओं में पाए जाएँ, तो ये किडनी फेल होने सहित गंभीर परिणाम पैदा कर सकते हैं। 2020 में जम्मू में 12 और 2022 में गाम्बिया में 70 बच्चों की इसी तरह के दूषित सिरप के कारण मौत हो गई।

जांच में क्या पाया गया?

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की टीमों द्वारा एक संयुक्त जाँच की गई। रिपोर्ट में डीईजी और ईजी दोनों रसायनों की अनुपस्थिति पाई गई। इसके अलावा, एक बच्चे में लेप्टोस्पायरोसिस की पुष्टि हुई है। पानी और अन्य पर्यावरणीय नमूनों की जाँच जारी है।

राजस्थान के मामले 

स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी कहा कि राजस्थान में जिन बच्चों की मौत हुई थी, उनके मामले में जिस सिरप पर संदेह था, उसमें डीईजी/ईजी नहीं था। यह सिरप डेक्सट्रोमेथॉर्फन पर आधारित था, जो आमतौर पर छोटे बच्चों के लिए अनुशंसित नहीं है। इसमें प्रोपिलीन ग्लाइकॉल भी नहीं था, जो कभी-कभी संदूषण का स्रोत हो सकता है।

बच्चों के लिए कफ सिरप पर नए दिशानिर्देश

स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं दिया जाना चाहिए। बड़े बच्चों में भी इन दवाओं का इस्तेमाल सावधानी से किया जाना चाहिए। बच्चों में खांसी-ज़ुकाम अक्सर अपने आप ठीक हो जाता है, इसलिए आराम, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ और घर पर देखभाल ही सबसे अच्छे विकल्प हैं।

जाँच रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि हाल ही में हुई मौतें सिरप के कारण नहीं हुई थीं, लेकिन सटीक कारण का पता लगाने के लिए जाँच चल रही है। सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि बच्चों में कफ सिरप का इस्तेमाल बेहद सावधानी से किया जाए और डॉक्टरों को भी इन दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए। 

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