लुधियाना के छात्रों ने सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो में जीत हासिल की

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कचरे को विकास में बदलना: लुधियाना के छात्रों ने सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 में एआई-इनेबल्‍ड कंपोस्टिंग इनोवेशन के साथ जीत हासिल की

  • उनका नवाचार कंपोस्टिंग को स्वचालित करता है, और प्रोसेसिंग के समय को लगभग 50% कम कर देता है
  • विजेता टीमों को आईआईटी दिल्ली में 1 करोड़ रुपये की इनक्यूबेशन सहायता प्राप्त हुई

लुधियाना, भारत – 4 दिसंबर, 2025 – एक ऐसे देश में जहां हर साल 62 मिलियन टन से अधिक कचरा उत्पन्न होता है, बी.सी.एम. आर्य मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल लुधियाना के कक्षा 12 के तीन छात्र तकनीक और सहानुभूति के माध्यम से वास्तविक बदलाव ला रहे हैं। अभिषेक धांडा, प्रभकीरत सिंह और रचिता चंडोक ने ‘पृथ्वी रक्षक’ विकसित किया है। यह एक स्मार्ट, मॉड्यूलर वर्मीकंपोस्टिंग सिस्टम है जो जैविक कचरा प्रबंधन को स्वचालित करता है और कचरे को विकास में बदल देता है।

यह नवाचार सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के चार राष्ट्रीय विजेताओं में से एक स्थान दिला चुका है, जो थीम ‘टेक्नोलॉजी के माध्यम से पर्यावरणीय स्थिरता’ पर आधारित है। विजेता टीमों को आईआईटी दिल्ली के एफआईटीटी में 1 करोड़ रुपये की इनक्यूबेशन सहायता प्राप्त हुई है, ताकि वे अपने प्रोटोटाइप को ओर बेहतर कर सकें और प्रभाव को बढ़ा सकें।

 

अभिषेक ने कहा “हम चाहते थे कि कंपोस्टिंग तेज, स्मार्ट और स्केलेबल हो।”

 

रचिता ने बतायाा कि “हमारी सबसे बड़ी सीख यह रही कि सहानुभूति एक डिजाइन टूल हो सकती है।”

 

पारंपरिक वर्मीकंपोस्टिंग में 90 दिनों तक का समय लगता है और इसमें काफी जगह तथा मैनुअल हैंडलिंग की आवश्यकता होती है। पृथ्वी रक्षक सेंसर, मॉड्यूलर कम्पार्टमेंट्स और बुद्धिमान नियंत्रणों को जोड़कर कंपोस्टिंग चक्र को लगभग 50 प्रतिशत कम कर देता है, यानी 90 दिनों से घटाकर मात्र 30 दिनों तक कर देता है जिससे शहरों में भी कचरे की इकोफ्रेंडली प्रोसेसिंग व्‍यवहार्य हो जाती है।

 

सिस्टम वर्मीकेंद्र निम्नलिखित उत्पादन करता है:

  • वर्मीकंपोस्ट – पोषक तत्वों से भरपूर सॉइल एन्‍हैंसर
  • वर्मीवॉश – प्राकृतिक तरल उर्वरक
  • वर्मिस्टिक्स – टेरेस गार्डन के लिए कॉम्पैक्ट कंपोस्ट स्टिक्स

 

प्रभकीरत ने बताया, “हमारा लक्ष्य है कि इसे नगर निगमों और स्मार्ट सिटी मिशनों के साथ पायलट करें।

“इनोवेशन प्रभाव - और कचरे को संसाधन में बदलने के बारे में है।”

 

सैमसंग के प्रमुख सीएसआर कार्यक्रम सॉल्व फॉर टुमॉरो के माध्यम से समर्थित और आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों से मेंटरशिप प्राप्त करके, छात्र अब अपने सॉल्‍यूशन को भारत भर के खेतों, घरों और शहरों तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। इससे एक स्वच्छ, परिपत्र भविष्य का निर्माण करने में मदद मिलेगी।

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