तेंदुए की मौजूदगी से दहशत में स्थानीय लोग और जानवर
- by Priyanka Tiwari
- 2025-10-13 17:18:00
India News Live,Digital Desk : उस दिन शनिवार था और शाम करीब पांच बजे थे। मैं लगभग 15 फीट ऊंचे पोस्ट पर ड्यूटी कर रहा था। तभी कार्यालय भवन की ओर से एक तेंदुआ आया और मेरे पास आकर बैठ गया। मेरी नजर उससे मिली और पूरा शरीर ठहर सा गया। खुद को संभालते हुए मैंने तुरंत उच्च अधिकारियों को सूचना दी। मेरी आवाज सुनते ही तेंदुआ जंगल की तरफ भाग गया। यह अनुभव झूंसी स्थित एचआरआइ के सुरक्षाकर्मी हरिमोहन शुक्ला ने साझा किया।
सिर्फ हरिमोहन ही नहीं, बल्कि संस्थान के कर्मचारी और शोधार्थी भी तेंदुए को देख चुके हैं। बताया गया कि तेंदुआ ज्यादातर रात में ही बाहर निकलता है। हालांकि इलाके में कोई CCTV कैमरा नहीं है, इसलिए इसकी पुष्टि के पुख्ता सबूत नहीं मिल पा रहे।
जंगल की जमीन भी सूखी होने के कारण पगचिन्ह तलाशना मुश्किल हो रहा है। न केवल एचआरआइ परिसर में, बल्कि आसपास की बस्तियों में रहने वाले लोग भी दहशत में हैं। वहीं, इन बस्तियों के कुत्तों में भी तेंदुए का खौफ साफ देखा जा सकता है।
अधिवक्ता तेज प्रताप मिश्रा और अन्य लोगों का कहना है कि कुत्ते अब ज्यादातर छुपकर रहते हैं। पहले वे दिन-रात घूमते रहते थे। उनका यह व्यवहार बताता है कि इलाके में तेंदुए की गतिविधियां लगातार हो रही हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल है।
सचमुच, तेंदुए की उपस्थिति ने खतरे को और भी महसूस कराया। एचआरआइ परिसर में रविवार की सुबह एक कुत्ते का शव मिला, जो यहीं रहता था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुत्ते के गले पर गहरे निशान थे और वह पूरी तरह क्षत-विक्षत था। आशंका है कि यही तेंदुआ इसका शिकार कर सकता है।
स्थानीय लोगों की बातों से भी तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि होती है। छतनाग निवासी आकाश यादव ने बताया कि रात को अचानक मवेशी जोर-जोर से डरकर चिल्लाने लगे। बाहर जाकर देखा तो कोई दिखाई नहीं दिया, लेकिन सुबह पता चला कि तेंदुआ वहां था। छतनाग के ही बबलू सिंह ने कहा कि उनके परिसर में रहने वाला एक कुत्ता अब पूरे दिन कोने में दुबका रहता है। इलाके के लोग भी डर के मारे अब बाहर निकलने से कतराते हैं।