भारतीय छात्रों के लिए मेडिकल की पढ़ाई का नया ठिकाना बना किर्गिस्तान: सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण विकल्प

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India News Live,Digital Desk : अब वो दौर बदल गया है जब भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए रूस, यूक्रेन या फिलीपींस जैसे देशों का रुख करते थे। आज छात्र और उनके माता-पिता ऐसी जगहों की तलाश में हैं जहाँ पढ़ाई के साथ-साथ सुरक्षा, पारदर्शिता और जीवन की गुणवत्ता भी सुनिश्चित हो। इसी बदलाव में किर्गिस्तान एक उभरता हुआ नाम बनकर सामने आया है।

मध्य एशिया में बसा किर्गिस्तान न सिर्फ शांतिपूर्ण देश है, बल्कि यहां मेडिकल शिक्षा का स्तर भी अब अंतरराष्ट्रीय मानकों से मेल खाने लगा है। इसकी वजह है – भारतीय निवेशकों का सक्रिय योगदान, जिन्होंने यहां आधुनिक मेडिकल संस्थान खड़े किए हैं और शिक्षा की पूरी व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण बनाया है।

बात करें बिश्केक स्थित इंटरनेशनल हायर स्कूल ऑफ मेडिसिन (IHSM) की, तो यह संस्थान अब तक 16,000 से ज़्यादा छात्रों को प्रशिक्षित कर चुका है, जिनमें 6,000 से अधिक भारतीय हैं। यहां NMC-अनुमोदित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है, जिसकी अवधि 5.5 साल की होती है और इसमें इंटर्नशिप व इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई शामिल है।

IHSM को WHO, FAIMER और ECFMG जैसे वैश्विक संगठनों से मान्यता प्राप्त है, जिससे छात्र USMLE, PLAB और MRCP जैसी अंतरराष्ट्रीय परीक्षाओं के लिए योग्य बनते हैं। यहां पढ़ाई के साथ-साथ भारत और किर्गिस्तान के अस्पतालों में क्लिनिकल ट्रेनिंग की सुविधा भी मिलती है।

FMGE में इस कॉलेज की सफलता दर 60% से ज़्यादा है, जो इसे एक भरोसेमंद विकल्प बनाती है। छात्रों को भारतीय भोजन, सुरक्षित हॉस्टल, अकादमिक मार्गदर्शन और सांस्कृतिक सहयोग जैसे तमाम जरूरी सुविधाएं मिलती हैं। इसकी प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी है और एजेंटों की कोई ज़रूरत नहीं होती, जिससे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा और भी बढ़ता है।

दूसरी ओर, कुछ देशों में मेडिकल एजुकेशन को लेकर छात्रों को गुमराह किया गया है, जहाँ भाषा की दिक्कत, कमजोर प्रशासन और अस्थिरता ने छात्रों को मानसिक तनाव दिया। वहीं किर्गिस्तान में हालात इसके उलट हैं – यहाँ सरकार और संस्थान दोनों छात्रों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हैं।

एक अभिभावक मनीष मलिक का कहना है: “मेरे बेटे का अब तक का अनुभव बहुत सकारात्मक रहा है। मेरी सरकार से गुज़ारिश है कि किर्गिस्तान जैसे सुरक्षित और भरोसेमंद देशों को मेडिकल शिक्षा की आधिकारिक सलाह सूची में शामिल किया जाए। साथ ही भारतीय दूतावास में छात्रों की मदद के लिए स्थायी हेल्प डेस्क होनी चाहिए।”

कुल मिलाकर, किर्गिस्तान भारतीय छात्रों के लिए एक उभरता हुआ मेडिकल एजुकेशन हब बन चुका है — जो सस्ती, सुरक्षित और विश्वस्तरीय शिक्षा का अवसर दे रहा है।