संसद में कंगना का 'रौद्र रूप': कांग्रेस को याद दिलाई 30 साल की सुस्ती

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India News Live,Digital Desk : बॉलीवुड क्वीन और मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने एक बार फिर संसद के भीतर अपने तीखे तेवरों से विपक्ष को चारों खाने चित कर दिया। महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान कंगना ने न केवल कांग्रेस की नियत पर सवाल उठाए, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नारीवाद का असली 'ध्वजवाहक' करार दिया। सदन में कंगना के इस संबोधन ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

कांग्रेस की 'सुस्ती' पर कंगना का करारा प्रहार

सदन में दहाड़ते हुए कंगना रनौत ने कांग्रेस पार्टी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने महिला आरक्षण बिल में हो रही देरी और विपक्ष के संदेहों पर पलटवार करते हुए कहा कि यह वही कांग्रेस है जिसने इस ऐतिहासिक बिल को तीन दशकों तक ठंडे बस्ते में डाल रखा था। कंगना ने सीधे तौर पर सोनिया गांधी का जिक्र करते हुए पूछा कि आखिर विपक्ष को भाजपा की तेजी से दिक्कत क्यों है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "क्या हमें भी आपकी तरह इस विधेयक को 30 साल तक लटकाए रखना चाहिए?"

'60 साल का काम 10 साल में': पीएम मोदी की तारीफ के बांधे पुल

कंगना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली को महिलाओं के लिए क्रांतिकारी बताया। उन्होंने कहा कि जो काम पिछली सरकारें 60 सालों में नहीं कर सकीं, वह मोदी सरकार ने महज 10 वर्षों में मुमकिन कर दिखाया है। पक्के मकान, उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर और सेना में महिलाओं की भागीदारी का उदाहरण देते हुए कंगना ने पीएम मोदी को 'सबसे बड़ा फेमिनिस्ट' बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए बेताब हैं और उनका हर कदम नारी शक्ति के उत्थान को समर्पित है।

हिमाचल का उदाहरण दे खोली राजनीति की पोल

अपने गृह राज्य हिमाचल प्रदेश की स्थिति साझा करते हुए कंगना ने महिला प्रतिनिधित्व की असल तस्वीर पेश की। उन्होंने आंकड़ों के जरिए बताया कि हिमाचल की 68 विधानसभा सीटों में से केवल एक महिला विधायक का होना चिंताजनक है। उन्होंने अन्य राज्यों में भी महिलाओं के महज 8-9 प्रतिशत प्रतिनिधित्व पर अफसोस जताया। कंगना के मुताबिक, एनडीए सरकार द्वारा लाया गया 33 फीसदी आरक्षण विधेयक राजनीति में महिलाओं की इस कम भागीदारी को जड़ से मिटा देगा।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर बड़ी बहस

बता दें कि केंद्र सरकार ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का विधेयक पेश किया है। इसके साथ ही सदन में परिसीमन आयोग की स्थापना और केंद्र शासित प्रदेशों में महिला कोटा लागू करने से जुड़े महत्वपूर्ण बिलों पर भी चर्चा हो रही है। कंगना ने इन विधेयकों को देश की आधी आबादी के लिए स्वर्णिम युग की शुरुआत बताया।