टाइपिंग टेस्ट में तीन बार लगातार फेल हुआ कनिष्ठ सहायक, डीएम ने कर दिया डिमोशन
सरकारी महकमों में बाबू की कुर्सी पर बैठकर बिना काम या बिना अपेक्षित दक्षता के नौकरी चलाने वालों के लिए एक बेहद कड़ा और नजीर पेश करने वाला प्रशासनिक फैसला सामने आया है। तीन-तीन बार अवसर दिए जाने के बावजूद कंप्यूटर टाइपिंग टेस्ट पास न कर पाने वाले एक कनिष्ठ सहायक (क्लर्क) पर प्रशासनिक गाज गिर गई है। जिलाधिकारी ने सेवा नियमावली और निर्धारित कार्यदक्षता मानकों की अवहेलना पर बड़ा एक्शन लेते हुए क्लर्क का सीधा डिमोशन (पदावनति) कर दिया है। आदेश जारी होते ही बाबूजी की कुर्सी छिन गई और उन्हें उनके मूल पद से पदावनत कर सीधे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यानी चपरासी (सर्दल/अर्दली) बना दिया गया है। इस अप्रत्याशित प्रशासनिक फैसले से पूरे जिले के सरकारी कर्मचारियों और कलेक्ट्रेट कर्मियों में हड़कंप मच गया है।
मृतक आश्रित कोटे पर मिली थी नियुक्ति, टाइपिंग पास करने की थी शर्त
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, संबंधित कर्मचारी को मृतक आश्रित नियमावली के तहत कलेक्ट्रेट संवर्ग में कनिष्ठ सहायक (लिपिक) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। नियुक्ति के समय तय सेवा शर्तों के मुताबिक, कर्मचारी को एक निश्चित समयावधि के भीतर हिंदी/अंग्रेजी कंप्यूटर टाइपिंग में निर्धारित गति (स्पीड) हासिल कर विभागीय टाइपिंग दक्षता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य था। नियमावली में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि निर्धारित अवधि या तय अवसरों में टाइपिंग टेस्ट पास नहीं किया जाता, तो पद पर स्थायीकरण नहीं होगा और पद की पात्रता समाप्त मानी जाएगी।
विभाग ने दिए तीन मौके, हर बार फेल साबित हुए बाबूजी
जिला प्रशासन ने कर्मचारी को अपनी टाइपिंग स्पीड सुधारने और परीक्षा पास करने के लिए एक नहीं, बल्कि पूरे तीन अवसर प्रदान किए। हर बार पर्याप्त समय और मोहलत दी गई ताकि वह कार्यालयीय कामकाज के अनुकूल न्यूनतम 25 से 30 शब्द प्रति मिनट की गति हासिल कर सके। इसके बावजूद कर्मचारी तीनों ही दक्षता परीक्षाओं में न्यूनतम अर्हक अंक और गति हासिल करने में पूरी तरह नाकाम रहा। तीसरी और अंतिम बार परीक्षा परिणाम में अनुत्तीर्ण होने के बाद स्थापना पटल ने पूरी फाइल समीक्षा के लिए जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर दी।
डीएम ने नियमों का दिया हवाला, जारी किया पदावनति का आदेश
पत्रावली का परीक्षण करने के बाद जिलाधिकारी ने पाया कि जब कर्मचारी क्लर्क पद के लिए अनिवार्य तकनीकी योग्यता पूरी नहीं कर पा रहा है, तो उसे उस पद पर बनाए रखना सरकारी कामकाज की गुणवत्ता और नियमों के साथ खिलवाड़ है। प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से डीएम ने तत्काल प्रभाव से कनिष्ठ सहायक पद से पदावनत करते हुए उसे चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप-डी/चपरासी) के पद पर तैनात करने का आदेश पारित कर दिया। इसके साथ ही उसका वेतनमान और पद का दायित्व भी चतुर्थ श्रेणी कर्मी के नियमों के अनुरूप निर्धारित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुस्त कार्यशैली वाले कर्मियों में मचा हड़कंप, काम सुधारने की नसीहत
प्रशासनिक गलियारों में इस तरह के डिमोशन की घटनाएं बेहद दुर्लभ मानी जाती हैं, क्योंकि आमतौर पर ऐसे मामलों में केवल वेतन वृद्धि रोकी जाती है या चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है। लेकिन जिलाधिकारी द्वारा सीधे चपरासी बनाए जाने के कड़े फैसले ने दफ्तरों में लंबे समय से सुस्त बैठे अन्य कर्मचारियों के कान खड़े कर दिए हैं। कलेक्ट्रेट और विकास भवन के विभिन्न पटलों पर तैनात लिपिकों के बीच इस कार्रवाई की दिनभर चर्चा होती रही। अधिकारियों ने साफ संकेत दे दिया है कि सरकारी सेवा में अब महज हाजिरी लगाना काफी नहीं है, बल्कि पद के अनुरूप योग्यता और समय पर परिणाम देना अनिवार्य होगा।