तेहरान में IRGC खुफिया प्रमुख माजिद खादेमी की मौत; अमेरिका-इजरायल पर बरसे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स
India News Live,Digital Desk : मिडिल ईस्ट के महायुद्ध के 38वें दिन ईरान को अब तक का सबसे भीषण और गहरा जख्म मिला है। सोमवार तड़के राजधानी तेहरान में हुए एक सटीक हवाई हमले में ईरान के सबसे शक्तिशाली और खौफनाक माने जाने वाले पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के इंटेलिजेंस चीफ मेजर जनरल माजिद खादेमी की मौत हो गई है। IRGC ने इस हाई-प्रोफाइल हत्या के लिए अमेरिका और 'जायोनी दुश्मन' इजरायल को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे एक 'कायरतापूर्ण आतंकी हमला' करार दिया है।
तेहरान के रिहायशी इलाके में तड़के हुआ हमला
हालांकि IRGC ने सुरक्षा कारणों से हमले की सटीक लोकेशन साझा नहीं की है, लेकिन स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सोमवार सुबह तेहरान के आसपास के कई रिहायशी और रणनीतिक इलाकों को हवाई हमलों से निशाना बनाया गया। खादेमी की मौत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की खबरें चल रही थीं। IRGC ने अपने टेलीग्राम चैनल पर पुष्टि की कि उनके 'शक्तिशाली और शिक्षित' खुफिया प्रमुख इस हमले में 'शहीद' हो गए हैं।
कौन थे मेजर जनरल माजिद खादेमी? खुफिया तंत्र के 'मास्टरमाइंड'
माजिद खादेमी ईरान की सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाते थे। उनका करियर और प्रभाव कुछ इस तरह था:
दोहरी भूमिका: खादेमी 2022 से IRGC के इंटेलिजेंस प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइजेशन के प्रमुख थे और 2025 से वे पूरे खुफिया संगठन की कमान संभाल रहे थे।
उत्तराधिकारी: उन्होंने जनरल मोहम्मद काज़ेमी की जगह ली थी, जिन्हें इजरायल ने 2022 के युद्ध के दौरान मार गिराया था।
आधी सदी का अनुभव: खादेमी ने लगभग 50 वर्षों तक ईरान के खुफिया और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में योगदान दिया। उन्हें विदेशी दुश्मनों के खिलाफ रणनीतिक खुफिया अभियानों का विशेषज्ञ माना जाता था।
असीमित शक्तियां और सर्वोच्च नेता के प्रति जवाबदेही
ईरान में IRGC के खुफिया संगठन के पास इतनी व्यापक शक्तियां हैं कि वह किसी भी मंत्रालय या सरकारी एजेंसी के दायरे से बाहर है। यह संगठन सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) के प्रति जवाबदेह है। पश्चिमी देशों ने अक्सर खादेमी के संगठन पर विदेशी नागरिकों को हिरासत में लेने और विदेशों में शासन के विरोधियों को निशाना बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। IRGC ने अपने बयान में कहा कि खादेमी का काम आने वाले कई वर्षों तक ईरान के खुफिया समुदाय के लिए 'मार्गदर्शक प्रकाश' बना रहेगा।
क्या अब छिड़ेगा सीधा युद्ध? ईरान के तेवर सख्त
खुफिया प्रमुख की मौत ने ईरान के भीतर भारी रोष पैदा कर दिया है। तेहरान के सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला ईरान की संप्रभुता पर सीधी चोट है। जहाँ ट्रंप ने होर्मुज जलमार्ग खोलने के लिए मंगलवार रात तक का अल्टीमेटम दिया है, वहीं इस हत्याकांड के बाद ईरान के जवाबी हमले की आशंका बढ़ गई है। क्या ईरान अपने सबसे बड़े खुफिया अधिकारी की मौत का बदला लेने के लिए इजरायल या अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमला करेगा? दुनिया की नजरें अब ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं।