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May 06 2026 04:28 pm

ईरानी परमाणु प्लान को नहीं पहुंचा कोई नुकसान, US इंटेलिजेंस की रिपोर्ट ने चौंकाया

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India News Live, Digital Desk : मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और इजरायल द्वारा की गई भारी बमबारी को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (US Intelligence) के ताजा आकलन के अनुसार, पिछले दो महीनों (फरवरी से अप्रैल 2026) के दौरान ईरान पर किए गए भीषण हमलों के बावजूद, उसके परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Programme) को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा है। रिपोर्ट बताती है कि ईरान का परमाणु बम बनाने का 'टाइमलाइन' अब भी उतना ही है जितना युद्ध शुरू होने से पहले था।

बमबारी के बावजूद परमाणु क्षमता बरकरार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल ने दावा किया था कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। लेकिन रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया सूत्रों का कहना है कि नतांज (Natanz), फोर्डो (Fordow) और इस्फ़हान (Isfahan) जैसे परमाणु परिसरों पर हुए हमलों से केवल "न्यूनतम नुकसान" हुआ है।

टाइमलाइन: ईरान को परमाणु हथियार के लिए जरूरी यूरेनियम जुटाने में अब भी लगभग 9 से 12 महीने का समय लगेगा। यह अनुमान पिछले साल जून 2025 में हुए हमलों के बाद से स्थिर बना हुआ है।

सुरक्षित भंडार: विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने अपना अधिकांश समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) जमीन के बहुत अंदर बनी सुरंगों में छिपा दिया है, जहाँ अमेरिकी बम नहीं पहुंच पा रहे हैं।

40 दिनों की जंग का हासिल क्या?

28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस युद्ध में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य अड्डों, रडार सिस्टम और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया। हालांकि, परमाणु विशेषज्ञ एरिक ब्रेवर के अनुसार, हालिया हमलों में परमाणु ठिकानों के बजाय 'पारंपरिक सैन्य ठिकानों' (Conventional Military Sites) को प्राथमिकता दी गई थी। इसी कारण ईरान का परमाणु बुनियादी ढांचा काफी हद तक सुरक्षित बच गया है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी संकेत दिया है कि निरीक्षण की कमी के बावजूद, ईरान के परमाणु मटीरियल के नष्ट होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं।

क्या अब होगा 'ग्राउंड ऑपरेशन'?

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद वॉशिंगटन में खलबली मच गई है। कुछ अमेरिकी अधिकारी और सीनेटर मार्को रुबियो जैसे नेता अब और भी सख्त कदमों की वकालत कर रहे हैं। चर्चा है कि यदि हवाई हमलों से परमाणु कार्यक्रम नहीं रुका, तो अमेरिका 'ग्राउंड रेड' (Ground Raids) या विशेष कमांडो मिशन जैसे जोखिम भरे विकल्पों पर विचार कर सकता है। हालांकि, फिलहाल जारी युद्धविराम (Ceasefire) के कारण ऐसी किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई पर रोक लगी हुई है।

वैश्विक चिंता और कूटनीति

ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे नहीं हटेगा और इसे अपनी संप्रभुता का हिस्सा मानता है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही शांति वार्ता में भी परमाणु मुद्दा सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है। दुनिया भर के देशों को डर है कि अगर परमाणु ठिकानों पर और बड़े हमले हुए, तो इससे न केवल क्षेत्र में रेडियोधर्मी विकिरण (Radiation) फैल सकता है, बल्कि यह संघर्ष एक पूर्ण परमाणु युद्ध में भी बदल सकता है।