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October 19 2026 04:19 am

कोलंबो टेस्ट में स्लेजिंग विवाद पर भारतीय कोच का बेबाक बयान: 'मैदान पर थोड़ी-बहुत बातचीत से कोई गुरेज नहीं

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भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे रोमांचक टेस्ट मुकाबले में केवल बल्ले और गेंद की ही जंग देखने को नहीं मिल रही, बल्कि खिलाड़ियों के बीच जुबानी जंग ने भी तापमान बढ़ा दिया है। खेल के अहम मोड़ों पर जब मैच कांटे की टक्कर में फंसा, तो मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच लगातार छींटाकशी और स्लेजिंग देखने को मिली। इस गरमा-गरम माहौल और लगातार हो रही स्लेजिंग को लेकर जब मैच के बाद भारतीय टीम के कोच से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे बेहद सहजता और सकारात्मक अंदाज में लिया। भारतीय कोच ने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें मैदान पर होने वाली इस तरह की थोड़ी-बहुत बातचीत से कोई आपत्ति या गम नहीं है, क्योंकि जब दो प्रतिस्पर्धी टीमें जीत के लिए अपना सब कुछ झोंक देती हैं, तो जुबानी नोकझोंक टेस्ट क्रिकेट का एक स्वाभाविक पहलू बन जाती है।

मैदान पर गरमा-गरमी: कोलंबो टेस्ट में कैसे भड़की जुबानी जंग?

कोलंबो की स्पिन के अनुकूल पिच पर जब मुकाबला बराबरी पर चल रहा था, तब विपक्षी श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने भारतीय बल्लेबाजों का ध्यान भटकाने और दबाव बनाने के लिए लगातार स्लेजिंग का सहारा लिया। नजदीकी फील्डरों, खासकर शॉर्ट लेग और सिली प्वाइंट पर खड़े खिलाड़ियों ने लगातार टिप्पणियां कीं। इसके जवाब में भारतीय खिलाड़ियों ने भी अपनी आक्रामकता दिखाई और विरोधी खेमे को करारा जवाब दिया। अंपायरों को कई मौकों पर बीच-बचाव करना पड़ा और दोनों कप्तानों को खेल की मर्यादा बनाए रखने की हिदायत भी दी गई। हालांकि, आधुनिक क्रिकेट में इस तरह के मनोवैज्ञानिक दबाव को अब रणनीतिक हथियार के रूप में देखा जाता है, जिसका मकसद बल्लेबाज की एकाग्रता को तोड़कर गलत शॉट खेलने पर मजबूर करना होता है।

'जब तक सीमाएं न लांघी जाएं, बातचीत खेल का हिस्सा है'

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय कोच ने स्पष्ट किया कि टेस्ट क्रिकेट कोई दोस्ताना मुकाबला नहीं है, बल्कि यह धैर्य, तकनीक और मानसिक मजबूती की सबसे कड़ी परीक्षा है। कोच के अनुसार, जब तक खिलाड़ी व्यक्तिगत हमले नहीं करते, अपशब्दों का प्रयोग नहीं करते और आईसीसी की आचार संहिता के दायरे में रहते हैं, तब तक मैदान पर शब्दों का यह आदान-प्रदान खेल के रोमांच को दोगुना ही करता है। कोच ने कहा कि एक शांत और नीरस माहौल की तुलना में वह ऐसी प्रतिस्पर्धी क्रिकेट देखना पसंद करेंगे, जहां खिलाड़ी अपनी टीम के लिए पूरे जुनून के साथ लड़ते नजर आएं। कोच का यह बयान साफ दर्शाता है कि आज की भारतीय टीम मैदान पर किसी भी विरोधी के सामने बैकफुट पर जाने या दबने के मूड में बिल्कुल नहीं रहती।

युवा भारतीय खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती और नई आक्रामकता

भारतीय ड्रेसिंग रूम की वर्तमान सोच इस बात पर केंद्रित है कि विपक्षी टीम को उसी की भाषा में जवाब दिया जाए। पिछले कुछ दशकों में भारतीय क्रिकेट का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। अब भारतीय खिलाड़ी विपक्षी खेमे के आक्रामक रवैये से घबराने के बजाय उसका सामना पूरे आत्मविश्वास के साथ करते हैं। कोच ने भारतीय बल्लेबाजों और गेंदबाजों के संयम की सराहना करते हुए कहा कि खिलाड़ी यह बखूबी जानते हैं कि कब जुबानी जंग को नजरअंदाज करना है और कब अपने खेल से उसका जवाब देना है। जब विरोधी खिलाड़ी लगातार स्लेजिंग कर रहे थे, तब भारतीय बल्लेबाजों ने अपने डिफेंस और बाउंड्री शॉट्स से उनका मुंह बंद करने का काम किया।

टेस्ट क्रिकेट का मनोवैज्ञानिक पहलू और एकाग्रता की जंग

रेड-बॉल क्रिकेट में एक-एक सत्र पांच दिनों तक खिलाड़ियों की शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को निचोड़ देता है। ऐसे में स्लेजिंग केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि एक सुनियोजित मनोवैज्ञानिक रणनीति होती है। जब कोई गेंदबाज लगातार 15-20 ओवर तक विकेट नहीं निकाल पाता, तो फील्डर बल्लेबाज को उकसाने का प्रयास करते हैं ताकि वह अपना धैर्य खोकर कोई जोखिम भरा शॉट खेल दे। भारतीय कोचिंग स्टाफ ने खिलाड़ियों को मानसिक रूप से इस तरह तैयार किया है कि वे बाहरी आवाजों को फिल्टर कर केवल गेंद की लाइन और लेंथ पर ध्यान केंद्रित करें। कोच ने जोर देकर कहा कि अगर कोई टीम यह सोचती है कि वह सिर्फ स्लेजिंग के दम पर भारतीय टीम को दबाव में ला सकती है, तो यह उनकी बहुत बड़ी गलतफहमी है।

मैच के नतीजे और रणनीतिक बढ़त पर पूरा फोकस

कोच ने यह भी स्पष्ट किया कि टीम का मुख्य ध्यान इन छोटी-मोटी नोकझोंक में उलझने के बजाय मैच की रणनीति और जीत हासिल करने पर है। कोलंबो की परिस्थितियों में पहली और दूसरी पारी की बढ़त निर्णायक साबित होने वाली है। भारतीय टीम प्रबंधन ने अपने खिलाड़ियों को सलाह दी है कि वे अपनी ऊर्जा को मैदान पर बेहतर फील्डिंग, सटीक गेंदबाजी और लंबी साझेदारियां बनाने में लगाएं। भारतीय खेमे का यह परिपक्व रवैया साबित करता है कि टीम किसी भी विवाद से विचलित हुए बिना केवल अपने लक्ष्य पर केंद्रित है और कोलंबो में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के लिए पूरी तरह आश्वस्त है।