Jaishankar's strong reply : रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की धमकी को भारत ने बताया अनुचित

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India News Live,Digital Desk : विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस समय रूस की यात्रा पर हैं और उनका यह दौरा बेहद रणनीतिक महत्व रखता है। हाल ही में अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। अमेरिका का आरोप है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहा है।

अमेरिका के इस फैसले पर भारत ने कड़ी नाराजगी जताई है। रूस में मीडिया से बातचीत करते हुए जयशंकर ने कहा कि रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत को धमकाना हैरान करने वाला है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत इस मामले में अकेला नहीं है।

जयशंकर ने साफ कहा कि रूस से सबसे ज़्यादा तेल भारत नहीं, बल्कि चीन खरीदता है। वहीं एलएनजी का सबसे बड़ा खरीदार भारत नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूस के साथ व्यापार में 2022 के बाद सबसे बड़ी बढ़ोतरी भारत में नहीं, बल्कि अन्य देशों में हुई है।

जयशंकर ने याद दिलाया कि अमेरिका खुद भारत से बार-बार यह कहता रहा है कि उसे वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को स्थिर करने के लिए कदम उठाने चाहिए। इसके तहत भारत रूस से भी तेल खरीद रहा है और साथ ही अमेरिका से भी तेल आयात कर रहा है, जिसकी मात्रा लगातार बढ़ी है। ऐसे में अमेरिका के तर्क को समझ पाना कठिन है।

कुछ दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात में कहा था कि अमेरिका और रूस के बीच व्यापार बढ़ रहा है। लेकिन उसी समय भारत पर पाबंदियां लगाना उनके दोहरे रवैये को दर्शाता है।

अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क और 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क रूसी तेल की खरीद पर लगाया है। इस तरह कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया है। ट्रंप लगातार भारत पर दबाव बना रहे हैं कि वह रूस से तेल खरीद बंद करे। उनका दावा है कि यह युद्ध को बढ़ावा दे रहा है।

भारत ने अपने पक्ष में कहा है कि तेल खरीद पूरी तरह बाज़ार की परिस्थितियों, आपूर्ति और राष्ट्रीय हित से तय होती है। जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और रूस के बीच रिश्ते दशकों पुराने हैं और ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के लिए बेहद अहम है।