India shaken by Ayatollah Khamenei's death : कश्मीर से कर्नाटक तक सड़कों पर उतरा जनसैलाब, इजरायल-अमेरिका के खिलाफ भारी आक्रोश

Post

India News Live,Digital Desk : ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की एक सैन्य अभियान में हुई मृत्यु की खबर ने भारत के कई हिस्सों में शोक और गुस्से की लहर पैदा कर दी है। रविवार शाम से ही देश के विभिन्न राज्यों, विशेषकर जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में शिया समुदाय के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस घटना को लेकर जहां मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इसे 'इस्लामी जगत की अपूरणीय क्षति' बताया है, वहीं कई शहरों में स्वैच्छिक बंद और विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है।

कश्मीर घाटी में थम गई जिंदगी, लाल चौक से बुडगाम तक मातम

खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही कश्मीर घाटी में सन्नाटा पसर गया। श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक से लेकर बुडगाम, बांदीपोरा और पुलवामा तक, हजारों की संख्या में लोग हाथों में काले झंडे और खामेनेई के पोस्टर लिए सड़कों पर दिखाई दिए। घाटी के लगभग 15 लाख शिया आबादी वाले क्षेत्रों में इस घटना को लेकर गहरा दुख है। पट्टन और बारामूला जैसे इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल विरोधी नारे लगाए। बिगड़ती स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।

धार्मिक नेताओं ने की 'ब्लैक मंडे' की अपील

कश्मीर के प्रमुख धार्मिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ कृत्य करार दिया है। उन्होंने मुस्लिम उम्माह से एकजुट रहने का आह्वान किया है। वहीं, धार्मिक संगठनों ने सोमवार, 2 मार्च को घाटी में पूर्ण हड़ताल (Kashmir Strike) का ऐलान किया है। लखनऊ में शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कलबे जवाद ने इसे कायरतापूर्ण हमला बताते हुए तीन दिवसीय शोक की घोषणा की है। उन्होंने राजधानी के लोगों से अपनी दुकानें बंद रखने और कैंडल मार्च में शामिल होने की अपील की है।

लखनऊ और पंजाब में सड़कों पर उमड़ा गुस्सा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, जो अपनी शिया विरासत के लिए जानी जाती है, वहां हजारों लोगों ने विशाल शोक जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि खामेनेई केवल ईरान के नेता नहीं, बल्कि दुनिया भर के मजलूमों (पीड़ितों) की आवाज थे। उधर, पंजाब के लुधियाना में भी तनाव देखा गया। शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने इजरायली प्रधानमंत्री का पुतला फूंक कर अपना विरोध दर्ज कराया।

कर्नाटक के इस गांव से था खामेनेई का खास रिश्ता

दक्षिण भारत के कर्नाटक में भी इस घटना का गहरा असर देखने को मिला। चिक्कबल्लापुर जिले के अलीपुरा गांव में माहौल काफी गमगीन है। दरअसल, अयातुल्ला अली खामेनेई ने साल 1986 में इस गांव का दौरा किया था, जिसके चलते यहां के लोगों का उनसे भावनात्मक जुड़ाव है। उनकी याद में ग्रामीणों ने अस्पताल और बाजारों को बंद रखा और विशेष शोक सभाओं का आयोजन किया।

सरकार की पैनी नजर और सुरक्षा के निर्देश

हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जनता से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशासन विदेश मंत्रालय के संपर्क में है ताकि ईरान में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वहीं, नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में शोक स्वरूप राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुका दिया गया है। भारत सरकार ने भी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है और सभी पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की वकालत की है।