India-Russia oil deal : सस्ते कच्चे तेल पर अमेरिकी दबाव और भारत की आर्थिक चुनौती

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India News Live,Digital Desk : भारत और रूस के बीच कच्चे तेल के सौदे को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस छिड़ी हुई है, खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद। अमेरिका ने इस मुद्दे पर भारत पर दबाव बढ़ा दिया है और टैरिफ लगा दिए हैं। ऐसे में अगर भारत रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद कर देता है, तो यह समझना ज़रूरी है कि इसका रूस की अर्थव्यवस्था और भारत की आंतरिक आर्थिक स्थिति पर क्या असर पड़ेगा।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद, पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। ऐसे समय में, भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीदकर उसे आर्थिक रूप से सहारा दिया है। 2021 में रूस से केवल 2% तेल आता था, जो अब बढ़कर 40% से ज़्यादा हो गया है, जिससे भारत रूस से तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। अगर भारत आयात बंद कर देता है, तो रूस की आय में काफ़ी कमी आएगी। हालाँकि, भारत को फिर से ऊँची कीमतों पर तेल खरीदना पड़ेगा, जिससे पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें बढ़ सकती हैं और देश में महंगाई बढ़ सकती है।

भारत और रूस के बीच तेल समझौता

रूस-यूक्रेन युद्ध छिड़ने के बाद, अमेरिका और यूरोप समेत पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए और उससे तेल व गैस खरीदना लगभग बंद कर दिया। रूस को अपनी अर्थव्यवस्था को बचाए रखने के लिए नए ग्राहक खोजने की ज़रूरत थी। ऐसे समय में, भारत ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में रूस से बहुत सस्ते दामों पर कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया। यह सौदा दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हुआ। रूस को राजस्व मिला और भारत को सस्ती कीमतों पर ऊर्जा मिली। 2021 में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी केवल 2% थी, जो 2023 तक बढ़कर 40% से ज़्यादा हो गई। इससे भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया।

यदि भारत तेल खरीदना बंद कर दे तो क्या होगा ?

यदि भारत सरकार अमेरिकी दबाव के आगे झुक जाती है और रूस से तेल खरीदना बंद कर देती है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:

  • रूस पर प्रभाव: रूस की अर्थव्यवस्था काफी हद तक उसके तेल और गैस की बिक्री पर निर्भर है। अगर उसका सबसे बड़ा खरीदार भारत तेल खरीदना बंद कर देता है, तो रूस के राजस्व में भारी गिरावट आएगी। इससे रूस के लिए लंबे समय तक युद्ध जारी रखना आर्थिक रूप से मुश्किल हो जाएगा।
  • भारत पर प्रभाव: रूस से सस्ते तेल का आयात बंद होने से भारत को खाड़ी देशों और अन्य आपूर्तिकर्ताओं से फिर से ऊँची कीमतों पर तेल खरीदना पड़ेगा। इससे पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी होगी, जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर मुद्रास्फीति के रूप में पड़ेगा। इससे आम नागरिकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

भारत की नीति और भविष्य

पश्चिमी देशों का मानना ​​है कि भारत ने सस्ता तेल खरीदकर रूस को आर्थिक रूप से मज़बूत किया है, जिससे युद्ध को लंबा खींचने में मदद मिल रही है। हालाँकि, भारत का तर्क साफ़ है कि उसकी विदेश नीति और आर्थिक फ़ैसले उसके नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। भारत की प्राथमिकता अपने लोगों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना है।