Impact of Iran-Israel war : भारत में बढ़ी महंगाई, गुजरात का मोरबी सिरेमिक उद्योग ठप्प होने की कगार पर

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India News Live,Digital Desk : मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में सुलग रही युद्ध की आग अब सात समंदर पार भारत की रसोई और उद्योगों को झुलसाने लगी है। ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद उपजे तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। भारत, जो अपनी ऊर्जा और कई आवश्यक वस्तुओं के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर है, इस संकट की सीधी चपेट में आ गया है। सोने-चांदी से लेकर दाल, तेल और सूखे मेवों तक, हर चीज की कीमतें आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही हैं।

गुजरात के मोरबी सिरेमिक उद्योग पर 'ब्लैकआउट' का खतरा

ईरान-इजरायल युद्ध का सबसे घातक असर गुजरात के मोरबी में स्थित विश्व प्रसिद्ध सिरेमिक उद्योग पर पड़ा है।

गैस संकट: सिरेमिक भट्टियों को चलाने के लिए प्राकृतिक गैस और प्रोपेन की भारी जरूरत होती है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी किए जाने से गैस की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला टूट गई है।

बंदी की कगार पर: कच्चे माल की कमी और गैस की आसमान छूती कीमतों के कारण मोरबी की सैकड़ों इकाइयां अगले कुछ दिनों में बंद होने की कगार पर हैं। इससे लाखों मजदूरों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है।

सोना-चांदी: सुरक्षित निवेश के चक्कर में रिकॉर्ड महंगाई

युद्ध के अनिश्चित माहौल में निवेशकों ने सोने को सबसे सुरक्षित ठिकाना मान लिया है, जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों ऐतिहासिक स्तर पर हैं।

सोना: मार्च की शुरुआत में सोना 1.73 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छू गया।

चांदी: चांदी की कीमतें भी 2.90 लाख रुपये प्रति किलो तक जा पहुंचीं। हालांकि, पिछले दो-तीन दिनों में कीमतों में मामूली सुधार देखा गया है, लेकिन तनाव बरकरार रहने तक राहत की उम्मीद कम है।

थाली से गायब होने लगी दाल और महंगा हुआ तेल

भारत अपनी खाद्य तेल की 60% जरूरतें आयात से पूरी करता है। युद्ध के कारण लॉजिस्टिक्स और बीमा लागत (Insurance Risk) बढ़ने से कीमतें बढ़ गई हैं:

खाद्य तेल: कच्चे तेल की कमी को पूरा करने के लिए विदेशों में ताड़ और सोया तेल का उपयोग 'बायोफ्यूल' बनाने में हो रहा है, जिससे खाने के तेल की सप्लाई कम और दाम ज्यादा हो गए हैं।

दालें: म्यांमार और ऑस्ट्रेलिया से आने वाले दाल के जहाजों पर शिपिंग कंपनियों ने 'युद्ध जोखिम अधिभार' (War Risk Surcharge) लगा दिया है, जिससे उड़द, तुअर और मसूर दालें महंगी हो गई हैं।

प्याज: सप्लाई चेन बिगड़ने की आशंका में जमाखोरी बढ़ गई है, जिससे प्याज के दाम भी चढ़ने लगे हैं।

सूखे मेवों का स्वाद हुआ कड़वा

ईरान और अफगानिस्तान से आने वाले पिस्ता, केसर, अंजीर और खुबानी की आवक लगभग पूरी तरह ठप्प हो गई है। दिल्ली के खारी बावली जैसे थोक बाजारों में इन मेवों की कीमतों में 30-40% तक का उछाल देखा जा रहा है।