Impact of Iran-Israel war : चांदी में ₹32,000 का ऐतिहासिक उछाल, ₹3 लाख के पार; सोना भी ₹1.72 लाख के पार पहुंचा

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया (West Asia) में गहराते युद्ध और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबरों ने वैश्विक और भारतीय सराफा बाजार में सुनामी ला दी है। सोमवार, 2 मार्च 2026 को दिल्ली के बुलियन मार्केट में सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की भारी मांग के चलते सोने और चांदी की कीमतों ने अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।

चांदी की कीमतों में 'महा-उछाल': ₹3,00,000 का आंकड़ा पार

चांदी की कीमतों में सोमवार को एक दिन की सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

बढ़ोतरी: ₹32,000 प्रति किलोग्राम (लगभग 12% की वृद्धि)।

नई कीमत: ₹3,00,000 प्रति किलोग्राम (करों सहित)।

पिछला बंद: शुक्रवार को चांदी ₹2,68,000 पर बंद हुई थी।

निवेशकों में युद्ध के कारण औद्योगिक आपूर्ति ठप होने और मुद्रास्फीति बढ़ने के डर ने चांदी की 'पैनिक बाइंग' शुरू कर दी है।

सोना भी ₹1.72 लाख के पार: 10 ग्राम के लिए चुकानी होगी बड़ी कीमत

सोने की कीमतों में भी अभूतपूर्व तेजी देखी गई है। 99.9% शुद्धता वाले सोने की दरें आसमान छू रही हैं:

बढ़ोतरी: ₹8,100 प्रति 10 ग्राम (लगभग 5% की वृद्धि)।

नई कीमत: ₹1,72,800 प्रति 10 ग्राम (करों सहित)।

पिछला सत्र: पिछले कारोबारी दिन यह ₹1,64,700 पर था।

बाजार में उथल-पुथल के मुख्य कारण

ईरान संकट: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों और खामेनेई के निधन की खबरों से बाजार में अनिश्चितता पैदा हो गई है।

क्षेत्रीय अस्थिरता: ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, बहरीन और जॉर्डन जैसे देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने से पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध फैलने का डर है।

अंतर्राष्ट्रीय भाव: वैश्विक बाजार में हाजिर सोना 124 डॉलर उछलकर 5,372 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। वहीं चांदी 92 डॉलर प्रति औंस के करीब है।

विशेषज्ञों की राय: क्या अभी निवेश करना सही है?

एचडीएफसी सिक्योरिटीज और लेमन मार्केट्स के विश्लेषकों ने निवेशकों को आगाह किया है:

अस्थिरता (Volatility): विशेषज्ञों का मानना है कि जितनी तेजी से कीमतें बढ़ी हैं, तनाव कम होने पर उतनी ही तेजी से गिरावट (Correction) भी आ सकती है।

आगामी डेटा: अगले सप्ताह अमेरिका के बेरोजगारी और रोजगार (ADP) के आंकड़े आने वाले हैं, जो कीमतों की दिशा तय करेंगे।

फेड रिजर्व: फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियों में बदलाव से बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव आ सकता है।