IIT बॉम्बे सुसाइड केस: एग्जाम हॉल से निकला और हॉस्टल गया... क्राइम ब्रांच के हाथ लगा 15 मिनट का अहम CCTV फुटेज
देश के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के पवई स्थित परिसर में द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस जांच को बेहद निर्णायक और बड़ा तकनीकी मोड़ मिला है। मामले की तहकीकात में जुटी मुंबई क्राइम ब्रांच की स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम को उस परीक्षा कक्ष और उससे लगे कॉरिडोर का महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज हाथ लगा है, जहां परीक्षा के दौरान कथित तौर पर नकल करने के आरोप में साहिल को पकड़ा गया था। इस हाई-प्रोफाइल केस ने देश भर के अकादमिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस छेड़ रखी है। एक ओर जहां पीड़ित छात्र के परिवार ने संस्थान के भीतर असहनीय मानसिक प्रताड़ना, जातिगत भेदभाव और अपमान का आरोप लगाते हुए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों के जरिए उस दिन के हर एक मिनट की कड़ियों को आपस में जोड़ने में जुट गई हैं।
दोपहर 12:30 से 12:45 के बीच का 15 मिनट का फुटेज क्यों है सबसे अहम सुराग
क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारियों के मुताबिक, परीक्षा के अंतिम चरण का यह 15 मिनट का समय अंतराल पूरे मामले का केंद्र बिंदु है। निर्धारित समय सारिणी के अनुसार यह परीक्षा दोपहर ठीक 1:00 बजे समाप्त होने वाली थी। ठीक इसी समय, यानी 12:30 बजे से 12:45 बजे के बीच, इनविजिलेटर ने साहिल को कथित तौर पर परीक्षा में अनफेयर मीन्स (अनुचित साधन) का सहारा लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। पुलिस के लिए यह फुटेज इसलिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी क्लिप से यह स्पष्ट हो सकेगा कि इनविजिलेटर और छात्र के बीच वास्तविक संवाद किस प्रकार का था, क्या वहां कोई अप्रिय या अपमानजनक स्थिति पैदा हुई थी, और कमरे से बाहर निकाले जाने के समय छात्र की शारीरिक भाषा (बॉडी लैंग्वेज) व मानसिक स्थिति कैसी दिखाई दे रही थी। इस 15 मिनट के घटनाक्रम के हर एक सेकंड का विश्लेषण करने के लिए फॉरेंसिक वीडियो एनालिस्ट्स की मदद ली जा रही है।
सीसीटीवी में कैद हुआ सच: प्रोफेसर डूला ने हॉल से बाहर भेजा, अकेले कमरे की ओर बढ़ा साहिल
बरामद किए गए सीसीटीवी फुटेज के प्राथमिक दृश्य सामने आने के बाद जांच की दिशा और स्पष्ट हुई है। फुटेज में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि जब छात्र को कथित रूप से परीक्षा कक्ष के नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया गया, तब परीक्षा निरीक्षक (इनविजिलेटर) प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला ने उसे नियमों का हवाला देते हुए परीक्षा हॉल से बाहर जाने का निर्देश दिया। इसके तुरंत बाद, अकादमिक ब्लॉक और कॉरिडोर में लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग में साहिल बेहद शांत लेकिन गंभीर कदमों से परीक्षा हॉल की मुख्य इमारत से बाहर निकलता हुआ दिखाई दे रहा है। इसके बाद के कैमरों में वह अकेले कैंपस की सड़कों से गुजरते हुए सीधे अपने हॉस्टल ब्लॉक की तरफ बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। यह फुटेज इस बात की पुष्टि करता है कि हॉल से निकलने के बाद छात्र सीधे अपने कमरे में गया था, जहां बाद में उसका शव संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया।
पुलिस अधिकारी धर्मवीर बंसोद के नेतृत्व में गहन जांच: हॉस्टल के कमरे की ली गई तलाशी
इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच सुनिश्चित करने के लिए मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी धर्मवीर बंसोद की अगुवाई में क्राइम ब्रांच की एक विशेष टीम गठित की गई है। धर्मवीर बंसोद और उनकी टीम ने घटनास्थल यानी हॉस्टल के उस कमरे की बारीक फॉरेंसिक तलाशी पहले ही पूरी कर ली है जहां छात्र ने कथित तौर पर फांसी लगाकर अपनी जान दी थी। पुलिस ने कमरे से छात्र के व्यक्तिगत नोट्स, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया है। जांच दल अब एग्जाम हॉल के अंदर मौजूद अन्य छात्रों, सह-परीक्षकों, लैब सहायकों और हॉस्टल के सुरक्षा गार्डों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया में जुटा है ताकि सीसीटीवी टाइमलाइन और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में पूर्ण सामंजस्य स्थापित किया जा सके।
कैंपस में बंटी राय और करीबी दोस्त की गवाही: 'नकल पकड़ी गई थी, जातिवाद के आरोप गलत'
इस दुखद घटना के बाद आईआईटी बॉम्बे के छात्र समुदाय और संकाय सदस्यों के बीच विचारों का गहरा विभाजन देखने को मिल रहा है। कुछ छात्र संगठनों ने प्रशासनिक प्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे सामाजिक अलगाव और व्यवस्थागत संवेदनहीनता का नतीजा बताया है। वहीं, एक बड़ा वर्ग प्रोफेसर और संस्थान के नियमों के पक्ष में खुलकर सामने आया है। समर्थकों का तर्क है कि छात्र परीक्षा कक्ष के अंदर बिना किसी आधिकारिक अनुमति के स्मार्टफोन लेकर बैठा था और अनुचित लाभ लेने की कोशिश कर रहा था, ऐसे में परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए प्रोफेसर का कदम पूरी तरह नियमानुकूल था। इस बीच, मृतक साहिल के एक बेहद करीबी दोस्त ने सामने आकर एक बड़ा बयान दिया है जिसने विवाद को नया आयाम दे दिया है। साहिल के दोस्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह पक्के तौर पर कह सकता है कि मीडिया के कुछ हिस्सों में जो जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए जा रहे हैं, वे वास्तविकता से परे हैं। दोस्त ने खुलासा किया कि परीक्षा के दिन उसका साथी नकल करते पकड़ा गया था, जिसके बाद प्रोफेसर उसे कमरे से बाहर ले गए थे। संस्थान ने तत्काल उस पर कोई भारी अनुशासनात्मक कार्रवाई (डीएसी) भी नहीं थोपी थी, लेकिन इसके बाद हॉस्टल पहुंचकर उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।
फैकल्टी फोरम ने किया प्रोफेसर का बचाव: जांच निष्पक्ष रखने के लिए खुद छोड़ा प्रशासनिक पद
मामले के तूल पकड़ने और प्रोफेसर के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होने के बाद आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने अपने सहयोगी प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का पूरी मजबूती से समर्थन किया है। फैकल्टी सदस्यों ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि प्रशासन द्वारा प्रोफेसर को निलंबित (सस्पेंड) नहीं किया गया है, बल्कि जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और किसी भी पूर्वाग्रह से मुक्त रखने के उद्देश्य से प्रोफेसर डूला ने स्वयं नैतिकता के आधार पर अपने प्रशासनिक पद से हटने का निर्णय लिया है। शिक्षक समुदाय का कहना है कि परीक्षा हॉल में अनुशासन बनाए रखना और शैक्षणिक ईमानदारी की रक्षा करना हर शिक्षक का दायित्व है। यदि नियमों का उल्लंघन रोकने पर शिक्षकों को इस प्रकार के आरोपों का सामना करना पड़ेगा, तो संस्थानों में मूल्यांकन और परीक्षा की पूरी व्यवस्था ही चरमरा जाएगी। पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने स्पष्ट किया है कि कानून के अनुसार सभी पहलुओं, सीसीटीवी रिकॉर्ड्स और डिजिटल साक्ष्यों की जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जाएगी।