'नियुक्ति पाने वालों से पैसे मांगे तो जेल में सड़ना पड़ेगा': CM योगी की सीधी चेतावनी, 3567 शिक्षकों को बांटे नियुक्ति पत्र
उत्तर प्रदेश की सरकारी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, शुचिता और योग्यता आधारित चयन का नया मानक स्थापित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित एक विशाल राज्यस्तरीय समारोह में नवचयनित शिक्षकों को संबोधित किया। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया के तहत चयनित 3,567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचारियों, दलालों और पूर्ववर्ती व्यवस्था के सिंडिकेट्स को अंतिम चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा कि यदि किसी भी विद्यालय प्रबंधक, बिचौलिए या अधिकारी ने नवनियुक्त शिक्षक, प्रवक्ता या प्रधानाचार्य से कार्यभार ग्रहण (ज्वाइनिंग) कराने के नाम पर एक भी रुपये के लेनदेन की बात की, तो उसे सीधे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा और उसे जीवन भर जेल में सड़ना पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने दो-टूक कहा कि अब कोई 'सैफई सिंडिकेट' उत्तर प्रदेश के होनहार युवाओं के भविष्य और अधिकारों पर डकैती डालने का दुस्साहस नहीं कर सकता। उन्होंने याद दिलाया कि भर्ती बोर्डों और आयोगों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए ही यूपी पुलिस के कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
3567 नवनियुक्त शिक्षकों से जुड़े चार मजबूत स्तंभ: एक साल में 3.5 लाख बच्चों को देंगे नई दिशा
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान का यह आयोजन केवल नियुक्ति पत्र बांटने का औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा के चारों मजबूत आधार स्तंभों—सहायक अध्यापक (TGT), प्रवक्ता (PGT), प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य—को एक साथ मंच पर जोड़ने वाला एक ऐतिहासिक संगम बन गया। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि इन 3,567 शिक्षकों का चयन कर उनके हाथों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' और 2047 तक 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने की गुरुतर जिम्मेदारी सौंपी गई है। गणना प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि यदि एक शिक्षक प्रतिवर्ष केवल 100 विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद और मार्गदर्शन स्थापित करता है, तो ये 3,567 नवनियुक्त शिक्षक मिलकर हर साल प्रदेश के 3.5 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का बौद्धिक और नैतिक पथ प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार केवल ईंट-गारे से स्कूल, लैब और इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर सकती है, लेकिन उस इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए देश को वैज्ञानिक, डॉक्टर, कुशल इंजीनियर और शोधकर्ता प्रदान करने का वास्तविक दायित्व केवल एक समर्पित शिक्षक ही निभा सकता है।
'हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे, वे गिनते जाएं': 9 साल में 9.5 लाख भर्तियां, 6 महीने में 1 लाख और नौकरियां
विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के रोजगार के अधिकार को लेकर पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने कहा कि आज 3,567 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं, जबकि केवल बीते एक सप्ताह के भीतर विभिन्न विभागों में कुल 5,297 युवाओं को सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र बांटे जा चुके हैं। पिछले नौ वर्षों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए सीएम ने बताया कि अब तक 9.5 लाख से अधिक योग्य युवाओं को पूरी निष्पक्षता और योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियां दी गई हैं। विपक्ष पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि हमने पूर्ववर्ती सिंडिकेट्स से साफ कह दिया है कि हम लगातार नियुक्ति पत्र बांटते जाएंगे और वे बैठकर केवल गिनते रहें; यदि उन्हें गिनती सीखने में कठिनाई हो रही हो तो वे शिवपाल जी के सानिध्य में कुछ दिन बिता लें, जहां उन्हें गिनती बहुत अच्छे से सिखा दी जाएगी। इसी क्रम में उन्होंने एक बड़ा नीतिगत ऐलान करते हुए कहा कि आने वाले अगले छह महीनों के भीतर राज्य सरकार विभिन्न विभागों में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरियों के अवसर उपलब्ध कराने जा रही है।
2015-16 के घूसखोरी तंत्र की दर्दनाक आपबीती: खेत बेचकर भी नौकरी गंवाने वाले युवा का सपना हुआ साकार
मुख्यमंत्री ने हाल ही में नियुक्ति पत्र पाने वाले एक युवा अभ्यर्थी के भावुक साक्षात्कार का विशेष तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस नौजवान की आंखों में खुशी के आंसू थे, जिसने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया था कि वर्ष 2015-16 के दौरान भी उसने इसी पद के लिए पूरी तैयारी के साथ आवेदन किया था। उस समय की भ्रष्ट व्यवस्था में उससे नौकरी के बदले आठ लाख रुपये की खुली रिश्वत मांगी गई थी। उस बेबस अभ्यर्थी ने अपने पिता का खेत तक बेच दिया और पैसे लेकर पहुंचा, लेकिन तब तक उससे भी अधिक घूस देने वाला एक दूसरा व्यक्ति वहां आ चुका था, जिसके कारण वह होनहार छात्र नौकरी से वंचित रह गया था। मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा कि मौजूदा पारदर्शी व्यवस्था में उस पुरानी दागी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त किया गया और बिना किसी सिफारिश या एक पैसे के खर्च के, केवल अपनी कड़ी मेहनत और योग्यता के दम पर आज उसी युवा को उसी पद पर आधिकारिक नियुक्ति पत्र हासिल हुआ है।
शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा का सुरक्षा कवच: जॉइनिंग में बाधा डालने वाले प्रबंधकों पर होगी सख्त कार्रवाई
शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने सभी शासकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों तथा कर्मियों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ प्रदान कर दिया है। इसके साथ ही बेसिक शिक्षा के रसोइयों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा का सुरक्षा कवच दिया गया है ताकि वे परिवार की चिंता से मुक्त होकर पूरी निष्ठा के साथ शिक्षण कार्य में अपना योगदान दे सकें। स्कूलों के प्रबंधकों को कड़ा संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रबंधक की कोई प्रशासनिक या तकनीकी जिज्ञासा है तो वह शासन के समक्ष विधिवत प्रत्यावेदन दे सकता है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में नवनियुक्त शिक्षक को कार्यभार ग्रहण कराने में कोई अड़चन नहीं आनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर अनुचित दबाव या रिश्वतखोरी की शिकायत आई, तो सरकार बिना किसी रियायत के कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई करेगी।
बीमारू राज्य से देश का ग्रोथ इंजन बना यूपी: बॉटम-5 से निकलकर टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में बनाई जगह
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब आलोचक सुधारों का परिणाम पूछते हैं, तो उत्तर प्रदेश का आर्थिक और प्रशासनिक कायाकल्प इसका सबसे प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जो उत्तर प्रदेश वर्ष 2017 से पहले देश में एक 'बीमारू राज्य' के रूप में उपेक्षित था और जहां युवाओं के सामने पहचान का गंभीर संकट खड़ा कर दिया गया था, आज वही उत्तर प्रदेश भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे तेज 'ग्रोथ इंजन' बनकर उभरा है। राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर बॉटम-फाइव की श्रेणी से छलांग लगाकर देश की टॉप-तीन अर्थव्यवस्थाओं में अपना स्थान पक्का किया है। पिछले नौ वर्षों के वित्तीय अनुशासन, निवेश और पारदर्शी नीतियों के चलते प्रदेश की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना तक बढ़ाने में ऐतिहासिक सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले परीक्षा कोई देता था और नियुक्ति पत्र उसे थमा दिया जाता था जिसने कभी आवेदन फॉर्म तक नहीं भरा था; उस अराजकता को खत्म करके ही आज 'यूपी वाला' कहलाना पूरे देश और दुनिया में गर्व और सम्मान का प्रतीक बन चुका है।
चाणक्य, श्रीराम और कलाम की गुरु परंपरा: प्रयागराज में धरनारत युवाओं के लिए एनसीटीई को पत्र लिखने का निर्देश
भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का स्मरण कराते हुए मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के जीवन में गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र के योगदान, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि अगस्त्य और तक्षशिला के आचार्य चाणक्य के ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आचार्य चाणक्य ने विभाजित शक्तियों को एकजुट कर पाटलिपुत्र में मौर्य साम्राज्य की नींव रखी, उसी प्रकार शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण के लिए छात्रों को गढ़ना होगा। प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाओं के नियमों को लेकर धरने पर बैठे छात्रों की समस्या पर संवेदनशील रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने मंच से ही माध्यमिक शिक्षा मंत्री को निर्देश दिया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई - NCTE) को तुरंत आधिकारिक पत्र लिखा जाए। उन्होंने कहा कि इन प्रतियोगी युवाओं के लिए नियमों में एकमुश्त छूट (रिलैक्सेशन) देने या एक निश्चित समय सीमा के भीतर उन्हें पुनः परीक्षाओं में शामिल होने का अवसर प्रदान करने वाली वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, क्योंकि किसी भी प्रशासनिक जड़ता के कारण युवाओं के उत्साह और हौसलों को टूटने नहीं दिया जा सकता।
ऑपरेशन कायाकल्प से प्रोजेक्ट अलंकार तक: 2300 से अधिक स्कूलों के नए भवन और अटल टिंकरिंग लैब
शिक्षा व्यवस्था के बुनियादी ढांचे में आए बदलावों को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 'ऑपरेशन कायाकल्प' और 'निपुण भारत मिशन' के जरिए बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का सैचुरेशन लेवल 36 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। वहीं माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में 'प्रोजेक्ट अलंकार' के तहत अब तक 2,300 से अधिक सहायता प्राप्त विद्यालयों के जर्जर भवनों का जीर्णोद्धार कर आधुनिक भवनों, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाओं, स्मार्ट क्लासरूम्स, डिजिटल लाइब्रेरीज और अटल टिंकरिंग लैब्स की स्थापना की गई है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने भी शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विद्यार्थियों का सर्वांगीण और संस्कारयुक्त चरित्र निर्माण ही एक शिक्षक की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। समारोह के अंत में मुख्यमंत्री ने कानपुर के राम सिंह, वाराणसी के राघवेंद्र प्रताप सिंह, आंचल शुक्ला, प्रयागराज की प्रज्ञा सिंह, गोरखपुर की ऊषा सिंह सहित 12 शीर्ष चयनित अभ्यर्थियों को व्यक्तिगत रूप से मंच पर नियुक्ति पत्र सौंपकर उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया।