चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट! रिकॉर्ड हाई से ₹1.85 लाख हुई सस्ती, क्या यह दांव लगाने का सही मौका

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India News Live,Digital Desk : भारतीय कमोडिटी बाजार से निवेश जगत को हिला देने वाली खबर सामने आ रही है। अगर आप चांदी (Silver) में निवेश करने की सोच रहे थे या इसके गहने खरीदने का प्लान था, तो यह खबर आपके होश उड़ा देगी। साल 2026 की शुरुआत में जहां चांदी आसमान छू रही थी, वहीं अब इसकी कीमतों में ऐसी गिरावट आई है कि निवेशक सन्न रह गए हैं। चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर से लगभग ₹1,85,000 प्रति किलो तक सस्ती हो गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह 'सस्ते में सोना' (चांदी) लूटने का मौका है या अभी और गिरावट बाकी है?

रिकॉर्ड ऊंचाई से 44% फिसली चांदी: आखिर क्या है वजह?

जनवरी 2026 में चांदी ने ₹4,20,048 प्रति किलो का वो ऐतिहासिक स्तर छुआ था, जिसे देखकर लग रहा था कि यह अब कभी नीचे नहीं आएगी। लेकिन, वर्तमान में यह ₹2,34,700 के आसपास कारोबार कर रही है। तकनीकी भाषा में कहें तो जब भी कोई एसेट अपने उच्चतम स्तर से 20% गिरता है, तो उसे 'मंदी का दौर' माना जाता है, और चांदी तो 44% तक टूट चुकी है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और मजबूत होता डॉलर है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो कीमती धातुओं की चमक फीकी पड़ने लगती है।

महंगाई और ऊंची ब्याज दरों का डबल अटैक

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई ने समीकरण बिगाड़ दिए हैं। एलकेपी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है। ऊंची ब्याज दरों का मतलब है कि निवेशक कीमती धातुओं के बजाय डॉलर और बॉन्ड्स में पैसा लगाना पसंद कर रहे हैं। चूंकि चांदी केवल निवेश की वस्तु नहीं बल्कि एक औद्योगिक धातु (Industrial Metal) भी है, इसलिए वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान का असर इसकी कीमतों पर सीधा पड़ रहा है।

सोना सुरक्षित, तो चांदी क्यों है अस्थिर?

अक्सर लोग सोने और चांदी को एक ही तराजू में तौलते हैं, लेकिन विश्व स्वर्ण परिषद के आंकड़े कुछ और ही कहते हैं। सोना एक 'सुरक्षित निवेश' (Safe Haven) माना जाता है, जबकि चांदी एक 'साइक्लिकल एसेट' है। इसका मतलब है कि जब अर्थव्यवस्था रॉकेट की तरह भागती है, तो चांदी सोने से तेज रिटर्न देती है। लेकिन जैसे ही वैश्विक जोखिम बढ़ता है या मंदी की आहट होती है, चांदी सबसे पहले और सबसे तेजी से गिरती है। यही वजह है कि 2025 के अंत में शानदार प्रदर्शन करने वाली चांदी 2026 की शुरुआत में संघर्ष कर रही है।

क्या अभी निवेश करना समझदारी होगी?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के कमोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी का मानना है कि फिलहाल बाजार में जो थोड़ी-बहुत तेजी दिख रही है, वह केवल भारी गिरावट के बाद की 'शॉर्ट कवरिंग' है। उनके मुताबिक, चांदी में छोटी अवधि के लिए सुधार (Recovery) तो दिख सकता है, लेकिन पुराने रिकॉर्ड स्तर को पार करना फिलहाल नामुमकिन सा लग रहा है। डॉलर की मजबूती चांदी की बढ़त पर लगाम लगाए रखेगी। ऐसे में नए निवेशकों को 'सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट' (SIP) का रास्ता चुनना चाहिए, न कि एक साथ सारा पैसा झोंक देना चाहिए।