घर के लिविंग रूम में कहीं आपने भी तो नहीं लगा रखी हैं ये 5 तस्वीरें? तुरंत हटाएं वरना घेर लेगी कंगाली और कलह
घर का हॉल या लिविंग रूम पूरे आवास का केंद्र बिंदु माना जाता है। यह वह स्थान है जहां परिवार के सदस्य एक साथ बैठते हैं और घर आने वाले अतिथियों का सबसे पहले स्वागत यहीं होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार लिविंग रूम की दीवारों पर लगी तस्वीरें घर की ऊर्जा और सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालती हैं। यदि हॉल में नकारात्मक, हिंसक या उदासी दर्शाने वाली पेंटिंग्स लगी हों, तो इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है और घर में अचानक तनाव, बीमारियां और धन की बर्बादी शुरू हो जाती है।
युद्ध, महाभारत और हिंसा दर्शाने वाली तस्वीरें घर में पैदा करती हैं कलह
अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग कलात्मक दृष्टि से युद्ध, तलवारबाजी या महाभारत के दृश्यों वाली पेंटिंग्स घर के मुख्य हॉल में सजा लेते हैं। वास्तु विज्ञान के अनुसार हॉल में युद्ध, खून-खराबा, अस्त्र-शस्त्र या आक्रामक मुद्रा वाली कलाकृतियां लगाना पारिवारिक शांति के लिए अत्यंत घातक सिद्ध होता है। इस प्रकार के चित्र अवचेतन मन पर सीधा प्रहार करते हैं जिससे परिवार के सदस्यों के बीच अहंकार और कटुता बढ़ती है। जब हॉल में आने-जाने वाले लोगों की नजर निरंतर इन हिंसक दृश्यों पर पड़ती है, तो घर का वातावरण हमेशा तनावपूर्ण और अशांत रहने लगता है।
डूबती हुई नाव और पतझड़ के दृश्य रोक देते हैं करियर और धन की प्रगति
कला प्रेमियों के घरों में अक्सर सूर्यास्त, डूबते हुए जहाज या पत्तों से विहीन सूखे पेड़ों की पेंटिंग्स देखने को मिलती हैं। दृश्य रूप से यह भले ही आकर्षक लगें, परंतु वास्तु शास्त्र में इन्हें पतन और ठहराव का प्रतीक माना गया है। डूबती हुई नाव निरंतर असफलता और आर्थिक नुकसान का संकेत देती है, जिससे घर के मुखिया का व्यापार या नौकरी प्रभावित हो सकती है। इसी प्रकार पतझड़, बंजर भूमि या उदास चेहरों वाली पेंटिंग्स घर के माहौल में निराशा का संचार करती हैं और उन्नति के नए अवसरों को अवरुद्ध कर देती हैं।
हिंसक वन्यजीव और रोते हुए बच्चों के चित्र लाते हैं मानसिक विकार
हॉल की दीवारों पर दहाड़ते हुए शेर, चीते, शिकार करते शिकारी जानवर या रोते-बिलखते हुए मासूम बच्चों की तस्वीरें लगाना पूरी तरह वर्जित माना गया है। जंगली और आक्रामक पशुओं की मुद्राएं घर में रहने वाले बच्चों और बुजुर्गों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन और क्रोध भर देती हैं। यह ऊर्जा घर में बेवजह विवादों को जन्म देती है। हॉल को हमेशा सौम्य और शांत ऊर्जा का केंद्र होना चाहिए, न कि भय और आक्रामकता का। ऐसी तस्वीरें सीधे तौर पर स्वास्थ्य समस्याओं और अनिद्रा का कारण भी बन सकती हैं।
खंडहर, ताजमहल और नकारात्मक भावनाओं से जुड़ी कलाकृतियों से बनाएं दूरी
वास्तुकला की दृष्टि से ताजमहल दुनिया का अजूबा हो सकता है, लेकिन यह मूल रूप से एक मकबरा है। वास्तु के जानकारों के अनुसार हॉल में किसी भी प्रकार के मकबरे, श्मशान, खंडहर या वीरान इमारतों की पेंटिंग्स नहीं लगानी चाहिए। ये चीजें मृत ऊर्जा और विदाई का प्रतीक मानी जाती हैं। जिस घर के लिविंग रूम में खंडहर या समाधि जैसी तस्वीरें टंगी होती हैं, वहां के निवासियों में उत्साह की कमी देखने को मिलती है और रिश्ते धीरे-धीरे बिखरने लगते हैं।
हॉल की दीवारों पर किस प्रकार की तस्वीरें लगाना माना जाता है अत्यंत शुभ
हॉल की उत्तरी या पूर्वी दीवार पर सात दौड़ते हुए सफेद घोड़ों की तस्वीर, बहते हुए स्वच्छ पानी का झरना, हरियाली से भरे पहाड़ या उगते हुए सूर्य का चित्र लगाना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इसके अलावा हंसते हुए परिवार की तस्वीर या कामधेनु गाय और राधा-कृष्ण की सौम्य मुद्रा वाली पेंटिंग्स सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं। उत्तर दिशा में कुबेर या माता लक्ष्मी की आशीर्वाद मुद्रा वाली तस्वीर लगाने से आर्थिक तंगी दूर होती है और व्यापार में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिलती है।
घर के ड्राइंग रूम या लिविंग एरिया को सकारात्मकता का स्रोत बनाने के लिए आवश्यक है कि वहां लगी हर तस्वीर मन को शांति और प्रेरणा दे। यदि आपके हॉल में भी ऐसी कोई पेंटिंग मौजूद है जो मन में उदासी, डर या आक्रामकता जगाती हो, तो उसे आज ही सम्मानपूर्वक हटाकर उसके स्थान पर शुभ प्रतीक और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण चित्र स्थापित करें।