Hariyali Teej vs Hartalika Teej कब है कौन सी? जानें अंतर, तिथि और महत्व
India News Live,Digital Desk : हिन्दू धर्म में, तीज का त्योहार महिलाओं, विशेषकर विवाहित महिलाओं के लिए बहुत खास माना जाता है। यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है, और पति की लंबी उम्र व वैवाहिक जीवन में सुख-शांति के लिए मनाया जाता है। तीज कई तरह की होती हैं, जिनमें हरियाली तीज और हरतालिका तीज प्रमुख हैं। भले ही दोनों का मकसद एक जैसा लगे, लेकिन इनके मनाने के तरीके, समय और कहानियों में कुछ अहम फर्क हैं। आइए, इन दोनों तीज के बीच के अंतर को समझते हैं।
हरियाली तीज:
हरियाली तीज श्रावण (सावन) मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। यह त्योहार सावन की हरियाली और प्रकृति की सुंदरता का प्रतीक है। इस दिन विवाहित महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं, हरी चूड़ियां और बिंदी लगाती हैं, और सोलह श्रृंगार करती हैं। वे पेड़ों पर झूले डालती हैं, गीत गाती हैं और नाचती हैं। यह त्योहार आनंद, उमंग और नए जीवन का संचार करता है। माना जाता है कि इसी दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाया था। महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और अपने सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
हरतालिका तीज:
हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है, जो हरियाली तीज के करीब एक महीने बाद होती है। 'हरतालिका' शब्द 'हरित' (हरण करना/अपहरण करना) और 'आलिका' (सहेली) से बना है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती की सहेलियों ने उन्हें अपने पिता की मर्जी के खिलाफ भगवान विष्णु से विवाह करने से बचाने के लिए उनका 'हरण' कर लिया था, ताकि वे अपनी इच्छानुसार भगवान शिव से विवाह कर सकें। यह व्रत बहुत कठिन माना जाता है। महिलाएं बिना पानी पिए निर्जला व्रत रखती हैं और रातभर जागरण करती हैं। इस दिन रेत और मिट्टी से बने शिव-पार्वती की मूर्तियों की विशेष पूजा की जाती है। यह व्रत वैवाहिक जीवन में प्रेम और सम्मान के लिए किया जाता है और मनचाहा पति पाने की कामना के लिए कुंवारी कन्याएं भी इसे करती हैं।
मुख्य अंतर:
सबसे बड़ा अंतर उनकी तिथियों में है - हरियाली तीज श्रावण में आती है, जबकि हरतालिका तीज भाद्रपद में। हरियाली तीज प्रकृति की सुंदरता और नवोल्लास पर अधिक केंद्रित है, जिसमें महिलाएं झूले और गीत-संगीत के माध्यम से उत्सव मनाती हैं। वहीं, हरतालिका तीज अपनी कठोरता के लिए जानी जाती है, जहाँ निर्जला व्रत और जागरण का विशेष महत्व है, जो माता पार्वती की कठोर तपस्या को दर्शाता है।