ट्रंप के दावे की खाड़ी देशों ने खोली पोल? ईरान पर हमले वाली बात पर मचा घमासान
India News Live,Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर दावा सवालों के घेरे में आ गया है। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के नेताओं ने उनसे ईरान पर सैन्य हमले को टालने का अनुरोध किया था, लेकिन खाड़ी देशों के अधिकारियों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब ईरान-अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है और पूरी दुनिया की नजरें मध्य-पूर्व में बन रहे युद्ध के हालात पर टिकी हैं।
क्या ट्रंप का दावा महज एक जुमला था?
ट्रंप ने सोमवार को दावा किया था कि उन्होंने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई इसलिए स्थगित की क्योंकि खाड़ी देशों के नेताओं ने उन्हें कूटनीति को एक मौका देने की अपील की थी। हालांकि, स्थिति तब पेचीदा हो गई जब खाड़ी देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' को बताया कि उन्हें ट्रंप द्वारा बताए गए किसी भी आसन्न सैन्य अभियान की कोई पूर्व सूचना नहीं थी।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने यह भी कहा कि वे ईरान पर हमले को मंजूरी देने से महज एक घंटे की दूरी पर थे। उन्होंने धमकी भरे लहजे में चेतावनी दी कि हमले का खतरा अभी टला नहीं है, यह शुक्रवार, शनिवार या अगले सप्ताह कभी भी हो सकता है। साथ ही, ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी नेता अब समझौते के लिए 'भीख' मांग रहे हैं।
ईरान का 14 सूत्री प्रस्ताव और अमेरिका का सख्त रुख
तनाव के बीच, ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को एक 14 सूत्री प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में तेहरान ने कई बड़ी मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं:
लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में संघर्ष पर पूर्ण विराम।
ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना।
ईरान की जब्त की गई संपत्तियों को वापस करना।
क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की पूरी तरह से वापसी।
अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को खत्म करना और युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा।
हालांकि, व्हाइट हाउस ने इन प्रस्तावों को 'अपर्याप्त' और 'निरर्थक' बताते हुए तुरंत खारिज कर दिया है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने तो यहां तक कह दिया कि यह प्रस्ताव उन पुराने प्रस्तावों जैसा ही है जिन्हें ट्रंप पहले ही 'बकवास' करार दे चुके हैं।
दो महाशक्तियों के बीच पिस रहे खाड़ी देश
पिछले तीन महीनों से जारी इस संकट ने खाड़ी देशों को एक बेहद कठिन स्थिति में ला खड़ा किया है। ये देश खुद को दो महाशक्तियों के बीच फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं। तेहरान लगातार होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी धमक और ड्रोन हमलों के जरिए खाड़ी सहयोगियों पर दबाव बना रहा है। वहीं, सऊदी अरब और UAE भी ईरान से जुड़े ठिकानों पर अपनी गुप्त कार्रवाइयों के जरिए स्थिति को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की दोहरी नीति—एक तरफ कूटनीति का दिखावा और दूसरी तरफ सैन्य हमले की धमकी—ने क्षेत्र में अनिश्चितता को और गहरा कर दिया है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी हैं, क्योंकि वहां हुई एक छोटी सी चूक भी वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मचा सकती है।