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August 12 2026 09:59 pm

ईरान के साथ जंग में अमेरिका को भारी चोट, 42 लड़ाकू विमान तबाह; 2.4 लाख करोड़ का लगा चूना

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India News Live,Digital Desk : वियतनाम और इराक युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिकी सैन्य शक्ति को इस स्तर का नुकसान झेलना पड़ा है। ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिका न केवल अपनी रणनीतिक प्रतिष्ठा खोता नजर आ रहा है, बल्कि उसे आर्थिक और सैन्य रूप से भी भारी क्षति हुई है। युद्ध शुरू हुए दो महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन ईरान का हौसला कम होने के बजाय और मजबूत हुआ है, जिससे ट्रंप प्रशासन के 'सत्ता परिवर्तन' के सपने पर ग्रहण लगता दिख रहा है।

सैन्य इतिहास का बड़ा नुकसान: 42 जेट और ड्रोन स्वाहा

अमेरिकी संसद की रिसर्च विंग 'कांग्रेशनल रिसर्च सर्विस' (CRS) की रिपोर्ट के अनुसार, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में अमेरिकी सेना को अप्रत्याशित नुकसान हुआ है। पेंटागन और सेंट्रल कमान की खुफिया रिपोर्ट्स पर आधारित यह आंकड़े बताते हैं कि आधुनिक अमेरिकी तकनीक भी ईरानी हमलों के आगे घुटने टेकती नजर आई।

तबाह हुए प्रमुख सैन्य उपकरणों की सूची:

रीपर ड्रोन: 24 घातक ड्रोन ईरान ने मार गिराए।

स्टील्थ फाइटर जेट: अमेरिका का सबसे आधुनिक पांचवीं पीढ़ी का विमान भी जंग की भेंट चढ़ गया।

F-15E स्ट्राइक ईगल: 4 घातक फाइटर जेट्स को भारी नुकसान पहुंचा।

रिफ्यूलर विमान: 7 बड़े रिफ्यूलर विमान नष्ट हुए।

अन्य: 1 ग्राउंड-अटैक विमान, 1 E-3 सेंट्री AWACS, 2 स्पेशल ऑपरेशंस विमान, 1 रेस्क्यू हेलीकॉप्टर और 1 MQ-4C ट्राइटन जासूसी ड्रोन।

2.4 लाख करोड़ का आर्थिक संकट

इस सैन्य बर्बादी का सीधा असर अमेरिकी खजाने पर पड़ रहा है। 12 मई को अमेरिकी संसद की 'हाउस एप्रोप्रिएशंस सबकमेटी' में पेंटागन के एक्टिंग कंट्रोलर जूल्स डब्ल्यू हर्स्ट III ने जो आंकड़े पेश किए, उन्होंने सांसदों को स्तब्ध कर दिया। युद्ध का खर्च बढ़कर 29 अरब डॉलर (करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है। यह बजट मुख्य रूप से तबाह हुए महंगे उपकरणों की मरम्मत और उन्हें बदलने में खर्च हो रहा है, जिसने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की कमर तोड़ दी है।

क्या ट्रंप की रणनीति विफल हो रही है?

विश्लेषकों का मानना है कि जहां ट्रंप प्रशासन ईरान को झुकने पर मजबूर करने की उम्मीद में था, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ईरान न केवल अपनी शर्तों पर अड़ा है, बल्कि उसने अमेरिका के 'अजेय' होने के भ्रम को भी तोड़ दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सैन्य हथियारों की यह भारी क्षति केवल पैसों की बर्बादी नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी वायुसेना की 'अजेय' छवि के लिए एक बड़ा झटका है। युद्ध खिंचने और लागत बढ़ने से अब ट्रंप के घरेलू राजनीतिक मोर्चे पर भी मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं।