Govardhan Puja 2025 : भगवान कृष्ण की लीला और गोवर्धन पर्वत की कथा
- by Priyanka Tiwari
- 2025-10-13 17:31:00
India News Live,Digital Desk : वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर गोवर्धन पूजा का त्योहार मनाया जाता है। यह पर्व मथुरा और देशभर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है और भक्त 56 प्रकार के भोग अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से सभी दुख दूर होते हैं और भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
गोवर्धन पूजा 2025 की तारीख और शुभ मुहूर्त
- तारीख: 22 अक्टूबर 2025
- प्रारंभ: 21 अक्टूबर को शाम 05:54 बजे
- समापन: 22 अक्टूबर को रात 08:16 बजे
शुभ मुहूर्त:
- सुबह: 06:20 – 08:38
- दोपहर: 03:13 – 05:49
विशेष मुहूर्त:
- ब्रह्म मुहूर्त: 04:45 – 05:35
- विजय मुहूर्त: 01:58 – 02:44
- गोधूलि मुहूर्त: 05:44 – 06:10
- अमृत काल: 04:00 – 05:48
गोवर्धन पूजा की कथा
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, एक समय इंद्रदेव को अपने बल और सम्मान पर गर्व हो गया। भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव के अहंकार को दूर करने के लिए लीला रची।
एक दिन ब्रजवासी पूजा की तैयारी कर रहे थे और भोग बना रहे थे। भगवान कृष्ण ने माता यशोदा से पूछा कि ये सभी किसकी पूजा कर रहे हैं। माता ने बताया कि इंद्रदेव की पूजा हो रही है, क्योंकि उनकी वर्षा से फसल अच्छी होती है।
भगवान कृष्ण ने समझाया कि वर्षा करना इंद्रदेव का काम है, लेकिन पूजा करनी है तो गोवर्धन पर्वत की करनी चाहिए, क्योंकि यही हमारी चरागाहों की सुरक्षा करता है।
सभी ब्रजवासी गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। यह देखकर इंद्रदेव क्रोधित हुए और वर्षा शुरू कर दी। तब भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया और सभी ब्रजवासियों को उसकी छाया में सुरक्षित रखा। इस घटना के बाद इंद्रदेव को अपनी गलती का अहसास हुआ और तभी से गोवर्धन पूजा का पर्व मनाने की परंपरा चली आ रही है।