गोंडा का संजय सेतु दो महीने रहेगा बंद, 8 जिलों की राह मुश्किल; इलाज को जाने वाले मरीज सबसे ज्यादा परेशान
India News Live,Digital Desk : घाघरा नदी पर बने संजय सेतु की मरम्मत के चलते 10 फरवरी से 9 अप्रैल तक पुल से वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा। इस फैसले से गोंडा ही नहीं, बल्कि बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, अयोध्या, बाराबंकी और लखनऊ जाने वाले हजारों यात्रियों की परेशानी बढ़ने वाली है। पुल बंद होने के कारण गोंडा और बलरामपुर के यात्रियों को करीब 60 किलोमीटर अतिरिक्त सफर तय करना पड़ेगा, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे।
सबसे गंभीर स्थिति उन मरीजों के लिए होगी, जिन्हें इलाज के लिए लखनऊ रेफर किया जाता है। मंडल मुख्यालय पर ट्रॉमा सेंटर की सुविधा न होने के कारण हर दिन 30 से 40 गंभीर मरीज—जिनमें सिर में चोट और हृदय रोगी शामिल हैं—लखनऊ भेजे जाते हैं। पुल बंद होने से एंबुलेंस को लंबा रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिससे समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो सकता है।
पुल बंद होने का असर रेलवे यात्रियों पर भी पड़ेगा। रेलवे तीसरी लाइन बिछाने के कार्य के कारण 18 फरवरी से 20 मार्च तक गोंडा-लखनऊ रूट पर ट्रेनों की गति धीमी रहेगी। इससे ट्रेन से सफर करने वालों को भी अतिरिक्त दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
आमतौर पर गोंडा से लखनऊ की दूरी लगभग 120 किलोमीटर है, जिसे एंबुलेंस या निजी वाहन से दो से ढाई घंटे में तय किया जा सकता है, जबकि सरकारी बसों को तीन से चार घंटे लगते हैं। पुल बंद होने के बाद न सिर्फ समय बढ़ेगा, बल्कि किराए में भी करीब 100 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
संजय सेतु बंद होने के बाद वैकल्पिक मार्गों पर दबाव बढ़ना तय है। अयोध्या, श्रावस्ती और बहराइच की सड़कों पर ट्रैफिक का बोझ बढ़ेगा। वहीं, लोगों की उम्मीदें अब ढेमवाघाट पुल से जुड़ गई हैं। प्रशासन की योजना है कि वहां पीपे का पुल बनाकर छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू की जाए। लोक निर्माण विभाग के अनुसार, निविदा प्रक्रिया पूरी होते ही करीब 15 दिनों में यह पुल तैयार किया जा सकता है।
वैकल्पिक मार्ग (संक्षेप में)
श्रावस्ती–बहराइच–चहलारीघाट होकर लखनऊ: लगभग 197 किमी
गोंडा–अयोध्या होकर लखनऊ: लगभग 180 किमी
गोंडा–परसपुर–वाराही होकर लखनऊ: लगभग 188 किमी
गोंडा–परसपुर–बहुअन होकर लखनऊ: लगभग 230 किमी