Gold-Silver Price Today: चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक आग, ₹2.60 लाख के पार निकला भाव; सोने में आई मामूली गिरावट, जानें ताज़ा रेट
India News Live,Digital Desk : बुलियन मार्केट (Bullion Market) में इन दिनों सोने और चांदी की कीमतों ने निवेशकों और आम खरीदारों के होश उड़ा रखे हैं। वैश्विक तनाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के बीच चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ी उछाल दर्ज की गई है। 26 फरवरी 2026 की रात तक के आंकड़ों के अनुसार, चांदी अब 2.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गई है। वहीं, सोने की कीमतों में मामूली नरमी देखी गई है, जिससे शादी-ब्याह के सीजन में खरीदारी करने वालों को थोड़ी राहत मिली है।
चांदी का महा-धमाका: एक साल में 180% का रिटर्न
चांदी ने पिछले एक साल में निवेशकों को मालामाल कर दिया है। 26 फरवरी की रात 11 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमत 2,60,200 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक मांग और वैश्विक अनिश्चितता के चलते चांदी ने एक साल के भीतर 180% से अधिक का बंपर रिटर्न दिया है। हालांकि, वैश्विक बाजार में हाजिर चांदी में हल्की गिरावट देखी गई, लेकिन घरेलू बाजार में मांग जबरदस्त बनी हुई है।
सोने की कीमतों में गिरावट: ₹1,300 सस्ता हुआ गोल्ड
चांदी के विपरीत, 99.9% शुद्धता वाले सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। 26 फरवरी को सोने का भाव लगभग 1% यानी ₹1,300 गिरकर ₹162,900 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
पिछला बंद: ₹164,200 प्रति 10 ग्राम।
24 कैरेट (शुद्ध सोना): लगभग ₹16,189 प्रति ग्राम।
22 कैरेट (जेवराती सोना): लगभग ₹14,840 प्रति ग्राम।
18 कैरेट सोना: लगभग ₹12,142 प्रति ग्राम।
क्या शुरू हो गया है सोने का 'सुपर-साइकिल'?
दिग्गज ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की मानें तो सोने में एक नया 'सुपर-साइकिल' शुरू हो चुका है। फर्म का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार (Comex Gold) में सोने की कीमत 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। यदि ऐसा होता है, तो घरेलू बाजार में भी कीमतों में और भी बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
वैश्विक बाजार और घरेलू मांग का असर
शादी के सीजन के कारण दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में सोने की मांग चरम पर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोना 5,176.21 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक दबाव ने घरेलू बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। निवेशक अब वैश्विक संकेतों और डॉलर की चाल पर पैनी नजर रखे हुए हैं।