Gold prices experience significant fluctuations: वित्त मंत्री ने खोली बाज़ार की गुत्थी

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India News Live,Digital Desk : पिछले कुछ दिनों से सोने की कीमतों में सांप-सीढ़ी का खेल चल रहा है। कभी कीमत आसमान छूती है तो कभी धड़ाम से गिर जाती है। इस अस्थिरता के कारण आम खरीदार और निवेशक असमंजस में हैं। सोने के बाजार में आखिर चल क्या रहा है? अब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खुद इस पर चुप्पी तोड़ी है और बाजार में मची इस उथल-पुथल के पीछे का मुख्य कारण बताया है।

बाजार की इस स्थिति के पीछे का कारण बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा है कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सबसे बड़ा कारण 'वैश्विक अनिश्चितता' है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लगातार बदलती भौगोलिक और आर्थिक स्थिति के कारण निवेशक विभिन्न देशों की मुद्राओं पर भरोसा खो रहे हैं, जिसका सीधा असर सोने की कीमत पर पड़ रहा है।

बाजार की इस स्थिति के पीछे का कारण बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा है कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सबसे बड़ा कारण 'वैश्विक अनिश्चितता' है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लगातार बदलती भौगोलिक और आर्थिक स्थिति के कारण निवेशक विभिन्न देशों की मुद्राओं पर भरोसा खो रहे हैं, जिसका सीधा असर सोने की कीमत पर पड़ रहा है।

जब कागजी मुद्रा जोखिम भरी लगने लगती है, तो निवेशक सोने में भारी निवेश करते हैं, इसे 'सुरक्षित निवेश' मानते हुए। इससे मांग में अचानक उछाल आता है और कीमतें बढ़ जाती हैं। फिर, जब मुनाफा कमाने के लिए 'प्रमाण-पुष्टि' की जाती है, तो कीमतें फिर से गिर जाती हैं। यह चक्र आम उपभोक्ता को मूल्य उतार-चढ़ाव के जाल में फंसा लेता है।

जब कागजी मुद्रा जोखिम भरी लगने लगती है, तो निवेशक सोने में भारी निवेश करते हैं, इसे 'सुरक्षित निवेश' मानते हुए। इससे मांग में अचानक उछाल आता है और कीमतें बढ़ जाती हैं। फिर, जब मुनाफा कमाने के लिए 'प्रमाण-पुष्टि' की जाती है, तो कीमतें फिर से गिर जाती हैं। यह चक्र आम उपभोक्ता को मूल्य उतार-चढ़ाव के जाल में फंसा लेता है।

घरेलू बाजार की बात करें तो पिछले पांच दिनों में सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई है। आंकड़ों के अनुसार, 29 जनवरी को सोने की कीमत 1.70 लाख रुपये (प्रति 10 ग्राम) से अधिक थी, जो अब घटकर लगभग 1.40 लाख रुपये रह गई है। इसका मतलब है कि सिर्फ पांच दिनों में सोने की कीमत में 13% से अधिक की भारी गिरावट आई है।

घरेलू बाजार की बात करें तो पिछले पांच दिनों में सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई है। आंकड़ों के अनुसार, 29 जनवरी को सोने की कीमत 1.70 लाख रुपये (प्रति 10 ग्राम) से अधिक थी, जो अब घटकर लगभग 1.40 लाख रुपये रह गई है। इसका मतलब है कि सिर्फ पांच दिनों में सोने की कीमत में 13% से अधिक की भारी गिरावट आई है।

ऊँची कीमतों पर निवेश करने वालों के लिए यह चिंता का विषय है, लेकिन 'शादी के मौसम' के लिए अभी खरीदारी करने वालों को कुछ राहत मिली है। एमसीएक्स के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को कीमतों में ₹280 की गिरावट भी देखी गई, जो दर्शाता है कि बाजार अभी भी दबाव में है।

ऊँची कीमतों पर निवेश करने वालों के लिए यह चिंता का विषय है, लेकिन 'शादी के मौसम' के लिए अभी खरीदारी करने वालों को कुछ राहत मिली है। एमसीएक्स के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को कीमतों में ₹280 की गिरावट भी देखी गई, जो दर्शाता है कि बाजार अभी भी दबाव में है।

इसके अलावा, वित्त मंत्री ने बजट में डेरिवेटिव बाजार में 'सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स' (एसटीटी) बढ़ाने के बारे में भी स्पष्टीकरण दिया। उनका उद्देश्य अज्ञात और छोटे निवेशकों को जुए जैसे कारोबार यानी 'सट्टा व्यापार' से बचाना है। सरकार नहीं चाहती कि छोटे निवेशक जोखिम भरे व्यापार में फंसकर भारी वित्तीय नुकसान उठाएं।

इसके अलावा, वित्त मंत्री ने बजट में डेरिवेटिव बाजार में 'सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स' (एसटीटी) बढ़ाने के बारे में भी स्पष्टीकरण दिया। उनका उद्देश्य अज्ञात और छोटे निवेशकों को जुए जैसे कारोबार यानी 'सट्टा व्यापार' से बचाना है। सरकार नहीं चाहती कि छोटे निवेशक जोखिम भरे व्यापार में फंसकर भारी वित्तीय नुकसान उठाएं।

वित्त मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि वैश्विक स्थिति स्थिर होने तक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। इसलिए, विशेषज्ञ आम उपभोक्ताओं को सलाह दे रहे हैं कि वे फिलहाल 'प्रतीक्षा करें और देखें' की नीति अपनाएं और जल्दबाजी न करें। सरकार का ध्यान दीर्घकालिक निवेश और रोजगार सृजन पर रहेगा।

वित्त मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि वैश्विक स्थिति स्थिर होने तक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। इसलिए, विशेषज्ञ आम उपभोक्ताओं को सलाह दे रहे हैं कि वे फिलहाल 'प्रतीक्षा करें और देखें' की नीति अपनाएं और जल्दबाजी न करें। सरकार का ध्यान दीर्घकालिक निवेश और रोजगार सृजन पर रहेगा।