Gangaur Puja 2026: अखंड सौभाग्य के लिए गणगौर पर राशि अनुसार करें इन मंत्रों का जप, बरसेगी शिव-शक्ति की असीम कृपा...

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India News Live,Digital Desk : चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला गणगौर का पर्व सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए विशेष महत्व रखता है। साल 2026 में गणगौर पूजा का यह पावन उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव (गण) और माता पार्वती (गौर) की विधिवत पूजा-अर्चना करने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है और कुंवारी कन्याओं को मनवांछित वर की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि इस दिन अपनी राशि के अनुसार विशेष मंत्रों का जप किया जाए, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।

गणगौर पूजा का धार्मिक महत्व और पूजन विधि

गणगौर का पर्व मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। महिलाएं मिट्टी के ईसर जी और गौर माता की प्रतिमाएं बनाकर उन्हें सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सजाती हैं। सोलह दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत का समापन तृतीया तिथि को विसर्जन के साथ होता है। इस दिन महिलाएं सामूहिक रूप से लोक गीत गाती हैं और गौर माता को सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं। माना जाता है कि माता पार्वती ने भी कठिन तपस्या कर भगवान शिव को प्राप्त किया था, इसीलिए यह व्रत अटूट सुहाग का प्रतीक माना जाता है।

राशि अनुसार मंत्र जप: ऐसे प्रसन्न होंगे ईसर-गणगौर

ज्योतिषियों का मत है कि गणगौर पूजा के दौरान अपनी राशि के अनुरूप मंत्रों का उच्चारण करने से कुंडली के दोष दूर होते हैं और दांपत्य जीवन में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं। मेष और वृश्चिक राशि की महिलाओं को 'ॐ नमः शिवाय' का जप करना चाहिए, जबकि वृष और तुला राशि के लिए 'ॐ उमाये नमः' फलदायी रहता है। मिथुन और कन्या राशि के जातक 'ॐ गौरीशंकराय नमः' का उच्चारण करें। इसी प्रकार धनु और मीन राशि वालों को 'ॐ पार्वत्यै नमः' मंत्र का सहारा लेना चाहिए। सिंह राशि की महिलाएं 'ॐ शक्तिरूपायै नमः' और कर्क राशि वाले 'ॐ सोमाय नमः' का जप कर विशेष आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

शुभ मुहूर्त और पूजा के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां

गणगौर पूजा के लिए सुबह का समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है। पूजन के समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। पूजा की थाली में कुमकुम, हल्दी, काजल, मेहंदी और शुद्ध घी का दीपक होना अनिवार्य है। साथ ही, माता गौरी को विशेष रूप से गुने (एक प्रकार का मीठा पकवान) का भोग लगाया जाता है। पूजा के अंत में कथा सुनना बेहद जरूरी है, क्योंकि बिना कथा के यह व्रत अधूरा माना जाता है। इस पावन अवसर पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है, जिससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।