Faridabad clue linked to Red Fort blast : अल-फलाह यूनिवर्सिटी जांच के घेरे में
India News Live,Digital Desk : दिल्ली में लाल किले के पास हुए ब्लास्ट ने पूरे देश को झकझोर दिया है, और अब इस मामले की कड़ियां हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी तक पहुंच गई हैं। इस यूनिवर्सिटी का नाम लगातार सुर्खियों में बना हुआ है, क्योंकि जांच एजेंसियों को यहां के कुछ डॉक्टरों की गतिविधियों पर गंभीर शक है।
यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों से पूछताछ, सामने आए संदिग्ध नाम
जांच के दौरान पुलिस ने फरीदाबाद के धौज स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में तैनात 50 से अधिक डॉक्टरों से पूछताछ की है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस का ध्यान खासतौर पर तीन डॉक्टरों पर केंद्रित है —
डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. शाहीन शाहिद और डॉ. उमर मोहम्मद।
इन पर आरोप है कि वे कथित रूप से जैश-ए-मोहम्मद से प्रेरित एक आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा थे, जो बड़ी मात्रा में विस्फोटक इकट्ठा कर रहा था और दिल्ली में एक बड़े हमले की योजना बना रहा था। इस मॉड्यूल का लिंक पुरानी दिल्ली में हुई कार ब्लास्ट घटना से भी जोड़ा जा रहा है।
फरीदाबाद से बरामद हुए विस्फोटक
फरीदाबाद में जांच एजेंसियों ने एक किराए के मकान से करीब 2,900 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया। यह मकान यूनिवर्सिटी के डॉक्टर मुजम्मिल शकील ने किराए पर लिया हुआ था। इसके अलावा, मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर शाहीन शाहिद की कार से असॉल्ट राइफलें और अन्य हथियार मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
बताया जाता है कि डॉ. उमर मोहम्मद, जो यूनिवर्सिटी में कार्यरत थे, उस कार को चला रहे थे जिसमें लाल किले के पास धमाका हुआ।
यूनिवर्सिटी ने आरोपों से किया इनकार
इन घटनाओं के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने एक बयान जारी कर कहा है कि संस्थान का इन घटनाओं या आरोपित व्यक्तियों से कोई संबंध नहीं है।
कुलपति प्रो. डॉ. भूपिंदर कौर आनंद ने कहा —
“विश्वविद्यालय घटित दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से अत्यंत दुखी है। हमारी संवेदनाएं उन निर्दोष लोगों के साथ हैं जो इस धमाके में प्रभावित हुए हैं। जिन व्यक्तियों पर जांच चल रही है, वे केवल हमारे संस्थान में पेशेवर रूप से जुड़े थे, विश्वविद्यालय उनके व्यक्तिगत कार्यों के लिए जिम्मेदार नहीं है।”
प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि कैंपस परिसर में कोई संदिग्ध रासायनिक पदार्थ नहीं मिला, जैसा कि कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी का परिचय
अल-फलाह यूनिवर्सिटी, हरियाणा के फरीदाबाद जिले के धौज क्षेत्र में 70 एकड़ भूमि पर स्थित है।
- इसकी स्थापना 2014 में हुई, और 2015 में इसे यूजीसी (UGC) से मान्यता मिली।
- यह विश्वविद्यालय अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट (स्थापना 1995) के अंतर्गत संचालित होता है, जिसने 1997 में इंजीनियरिंग कॉलेज से शुरुआत की थी।
- आज इसमें मेडिकल, इंजीनियरिंग, कंप्यूटर, मानविकी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कोर्स संचालित होते हैं।
एमबीबीएस कोर्स और फीस संरचना
अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर ने 2019 से एमबीबीएस कार्यक्रम शुरू किया है।
- यहां 200 छात्रों के प्रवेश की अनुमति है।
- वेबसाइट के अनुसार, चार वर्षों के लिए 16.37 लाख रुपये प्रति वर्ष, और अंतिम वर्ष के लिए 9 लाख रुपये शुल्क लिया जाता है।
- कुल फीस लगभग ₹74.50 लाख बैठती है।
- हॉस्टल शुल्क करीब ₹3 लाख प्रति वर्ष है।
कैंपस में कश्मीरी छात्रों की संख्या करीब 40% बताई जाती है।